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Kurukshetra News: इतिहास विभाग की छात्राओं ने किया धरोहर संग्रहालय व नाभा का भ्रमण
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कुरुक्षेत्र। धरोहर संग्रहालय के भ्रमण करने के दौरान संग्रहालय के मुख्यद्वार पर बैनर लेकर फोटो
कुरुक्षेत्र। दयानंद महिला महाविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण करवाया गया, जिसमें धरोहर संग्रहालय, नाभा हाऊस व 1857 की क्रांति संग्रहालय लेकर जाया गया। महाविद्यालय की 44 छात्राओं ने हिस्सा लिया।
प्राचार्या डॉ. उपासना आहूजा ने कहा कि समय-समय पर महाविद्यालय की ओर से इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण कराए जाते हैं, जिसका उद्देश्य छात्राओं को अपनी प्राचीन समृद्ध हरियाणवी संस्कृति से परिचित करवा कर उनके ज्ञान में वृद्धि करना है। युवा अपनी संस्कृति से जुड़ रहे इसलिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर हरियाणा का भ्रमण करवाया गया।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रुकमेश चौहान ने बताया कि प्राचीन काल से ही हमारी संस्कृति बड़ी समृद्ध रही है। शैक्षणिक भ्रमण के उद्देश्य से छात्राओं को हरियाणवी संस्कृति के सभी आयामों को सरलता से समझाया गया। इसी के साथ पुरातात्विक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्राचीन वस्तुएं चाहे जर्जर अवस्था में ही क्यों न हो, उस समय के इतिहास के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व आर्थिक इतिहास की जानकारी प्रदान करती है।
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1857 के संग्रहालय का अवलोकन करते हुए उन्होंने बताया कि यह आजादी के लिए किया गया पहला ऐसा संघर्ष था, जिसने लोगों के मन में देश प्रेम की भावना तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी थी। विद्रोह की नायिका रानी लक्ष्मीबाई से महिलाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए जो शत्रु से चारों ओर घिर जाने के बावजूद हार नहीं मानी थी।
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प्राचार्या डॉ. उपासना आहूजा ने कहा कि समय-समय पर महाविद्यालय की ओर से इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण कराए जाते हैं, जिसका उद्देश्य छात्राओं को अपनी प्राचीन समृद्ध हरियाणवी संस्कृति से परिचित करवा कर उनके ज्ञान में वृद्धि करना है। युवा अपनी संस्कृति से जुड़ रहे इसलिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर हरियाणा का भ्रमण करवाया गया।
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इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रुकमेश चौहान ने बताया कि प्राचीन काल से ही हमारी संस्कृति बड़ी समृद्ध रही है। शैक्षणिक भ्रमण के उद्देश्य से छात्राओं को हरियाणवी संस्कृति के सभी आयामों को सरलता से समझाया गया। इसी के साथ पुरातात्विक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्राचीन वस्तुएं चाहे जर्जर अवस्था में ही क्यों न हो, उस समय के इतिहास के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व आर्थिक इतिहास की जानकारी प्रदान करती है।
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1857 के संग्रहालय का अवलोकन करते हुए उन्होंने बताया कि यह आजादी के लिए किया गया पहला ऐसा संघर्ष था, जिसने लोगों के मन में देश प्रेम की भावना तथा अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी थी। विद्रोह की नायिका रानी लक्ष्मीबाई से महिलाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए जो शत्रु से चारों ओर घिर जाने के बावजूद हार नहीं मानी थी।