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बारिश न होने से प्रति एकड़ दस हजार खर्च बढ़ा
ब्यूरो/ अमर उजाला,कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 16 Sep 2014 12:05 AM IST
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भारत सरकार की अंतर मंत्रालय केंद्रीय टीम के सदस्यों ने कुरुक्षेत्र और पिहोवा का दौरा करके सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया। टीम सोमवार को गांव प्रतापगढ़ पहुंची। टीम के साथ कृषि विभाग के महानिदेशक विजेंद्र सिंह एवं कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुरेश गहलावत भी थे। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव ने पिपली विश्रामगृह में टीम सदस्यों को जिले में कम वर्षा के कारण पैदा हुए सूखे के हालात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामान्य से अधिक खर्च करके किसानों ने अपनी फसलों को बचाया है।
इसके कारण भूमिगत पानी के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। गांव प्रतापगढ़ के किसानों ने केंद्रीय टीम को बताया कि इस बार कम से कम पांच से छह बार फसल में सिंचाई करनी पड़ी जो सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक है। बारिश न होने से खाद विशेषकर यूरिया एवं जिंक सल्फेट पर अधिक खर्च करना पड़ा। भूमिगत जलस्तर नीचे जाने के कारण 20 फीट अतिरिक्त पाइप डालने पर 10 हजार रुपये प्रति ट्यूबवेल खर्च करना पड़ा। इस मौके पर एसडीएम थानेसर विनय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।
इसके बाद टीम ने पिहोवा के गांव अरुणाय और जलबेहड़ा का दौरा किया। दोनों गांवों में किसानों से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। टीम के सदस्य डॉ. डीपी मलिक, डॉ. रामानांद, डॉ. एके राजपूत, डीआर कौल, अतिश हल्दर ने गांव अरुणाय में डेरा कंबोज फार्म और गांव जलबेहड़ा का दौरा किया। टीम के साथ एचएसडीसी के महाप्रबंधक डॉ. डीएस दुग्गल व अतिरिक्त कमिश्नर डॉ. जगदीप बराड़ थे। किसानों ने टीम को बताया कि इस साल बारिश न होने के कारण प्रति एकड़ 10 हजार रुपये खर्चा बढ़ा है। जहां पहले एक एकड़ पर 20 हजार रुपये खर्च आता था, इस बार एक एकड़ पर 30 हजार रुपये खर्च आया है।
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पानी की कमी के कारण पर भूजल स्तर 5-10 फीट नीचे चला गया है। किसानों को दोबारा बोरवेल करवाने पड़े। टीम के सदस्यों ने सूखा ग्रस्त से संबंधित तमाम आंकड़े व रिपोर्ट लेने के पश्चात किसानों को आश्वासन दिया कि इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद अंतिम फैसला होगा। इस अवसर पर जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम धर्मवीर सिंह, तहसीलदार नौरंग दास, बीडीपीओ प्रताप सिंह व कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. मदन राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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इसके कारण भूमिगत पानी के स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। गांव प्रतापगढ़ के किसानों ने केंद्रीय टीम को बताया कि इस बार कम से कम पांच से छह बार फसल में सिंचाई करनी पड़ी जो सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक है। बारिश न होने से खाद विशेषकर यूरिया एवं जिंक सल्फेट पर अधिक खर्च करना पड़ा। भूमिगत जलस्तर नीचे जाने के कारण 20 फीट अतिरिक्त पाइप डालने पर 10 हजार रुपये प्रति ट्यूबवेल खर्च करना पड़ा। इस मौके पर एसडीएम थानेसर विनय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।
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इसके बाद टीम ने पिहोवा के गांव अरुणाय और जलबेहड़ा का दौरा किया। दोनों गांवों में किसानों से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। टीम के सदस्य डॉ. डीपी मलिक, डॉ. रामानांद, डॉ. एके राजपूत, डीआर कौल, अतिश हल्दर ने गांव अरुणाय में डेरा कंबोज फार्म और गांव जलबेहड़ा का दौरा किया। टीम के साथ एचएसडीसी के महाप्रबंधक डॉ. डीएस दुग्गल व अतिरिक्त कमिश्नर डॉ. जगदीप बराड़ थे। किसानों ने टीम को बताया कि इस साल बारिश न होने के कारण प्रति एकड़ 10 हजार रुपये खर्चा बढ़ा है। जहां पहले एक एकड़ पर 20 हजार रुपये खर्च आता था, इस बार एक एकड़ पर 30 हजार रुपये खर्च आया है।
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पानी की कमी के कारण पर भूजल स्तर 5-10 फीट नीचे चला गया है। किसानों को दोबारा बोरवेल करवाने पड़े। टीम के सदस्यों ने सूखा ग्रस्त से संबंधित तमाम आंकड़े व रिपोर्ट लेने के पश्चात किसानों को आश्वासन दिया कि इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद अंतिम फैसला होगा। इस अवसर पर जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम धर्मवीर सिंह, तहसीलदार नौरंग दास, बीडीपीओ प्रताप सिंह व कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. मदन राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।