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जग पालक व सृष्टि के नियामक हैं श्रीकृष्ण : भारती
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पिहोवा। श्री कृष्ण कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु। विज्ञप्ति
पिहोवा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से पुरानी अनाज मंडी में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत तृतीय दिवस भी जारी रही। संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरु आशुतोष की शिष्या कथा व्यास साध्वी मनस्विनी भारती ने समस्त धार्मिक ग्रन्थों के समन्वय से युक्त इस भव्य आयोजन में प्रभु के जन्म एवं उनके जीवन की लीलाओं के भीतर छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर किया।
साध्वी ने बताया कि प्रभु का अवतरण धर्म के जिस संदेश को धारण किए हुए है वह हर युग काल व देश की सीमाओं से परे है व वर्तमान युग की समस्त समस्याओं का निवारण प्रस्तुत करता है। संसार में नाना प्रकार के रोग, शोक, जन्म, मृत्यु इत्यादि में पड़े काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार में अंधे हो चुके मानव को सन्मार्ग पर लाने के लिए प्रभु अवतीर्ण होते हैं।
साध्वी ने प्रभु के संबंध में बताते हुए कहा कि प्रभु श्री कृष्ण जग पालक व सृष्टि के नियामक तत्व हैं जो साकार रूप धारण कर अवतरित होते हैं। निराकार परमात्मा धर्म की स्थापना के लिए साकार रूप धारण करता है। प्रभु का जन्म रात्रि के समय हुआ जो हम सबके लिए एक संदेश है कि जब मैं प्रकट होता हूं, तो अज्ञान रूप अंधकार हट जाता है और जब प्रभु का अवतरण हमारे घट में होता है तो हमारे भीतर का अज्ञान भी मिट जाता है। ज्ञान रूपी प्रकाश प्रकट हो जाता है। प्रभु का जन्म कारागार में हुआ।
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उन्होंने बताया कि यह कारागार हमारे मानव तन का प्रतीक है जिसमें ईश्वर का वास है लेकिन माया की नींद में सोए होने के कारण हम उनका दर्शन नहीं कर पाते। इसलिए जब तक हम माया के पाश से बाहर नही आ जाते तब तक प्रभु दर्शन नही कर पाते। इसलिए तब तक हम माया के पाश से बाहर नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि माता देवकी ने अपने घट में जिस प्रकार प्रभु के चतुर्भुज रूप में दर्शन किए। ठीक इसी प्रकार हम भी अपने भीतर ऐसा अनुभव पूर्ण सतगुरु की कृपा से कर सकते हैं।
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साध्वी ने बताया कि प्रभु का अवतरण धर्म के जिस संदेश को धारण किए हुए है वह हर युग काल व देश की सीमाओं से परे है व वर्तमान युग की समस्त समस्याओं का निवारण प्रस्तुत करता है। संसार में नाना प्रकार के रोग, शोक, जन्म, मृत्यु इत्यादि में पड़े काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार में अंधे हो चुके मानव को सन्मार्ग पर लाने के लिए प्रभु अवतीर्ण होते हैं।
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साध्वी ने प्रभु के संबंध में बताते हुए कहा कि प्रभु श्री कृष्ण जग पालक व सृष्टि के नियामक तत्व हैं जो साकार रूप धारण कर अवतरित होते हैं। निराकार परमात्मा धर्म की स्थापना के लिए साकार रूप धारण करता है। प्रभु का जन्म रात्रि के समय हुआ जो हम सबके लिए एक संदेश है कि जब मैं प्रकट होता हूं, तो अज्ञान रूप अंधकार हट जाता है और जब प्रभु का अवतरण हमारे घट में होता है तो हमारे भीतर का अज्ञान भी मिट जाता है। ज्ञान रूपी प्रकाश प्रकट हो जाता है। प्रभु का जन्म कारागार में हुआ।
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उन्होंने बताया कि यह कारागार हमारे मानव तन का प्रतीक है जिसमें ईश्वर का वास है लेकिन माया की नींद में सोए होने के कारण हम उनका दर्शन नहीं कर पाते। इसलिए जब तक हम माया के पाश से बाहर नही आ जाते तब तक प्रभु दर्शन नही कर पाते। इसलिए तब तक हम माया के पाश से बाहर नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि माता देवकी ने अपने घट में जिस प्रकार प्रभु के चतुर्भुज रूप में दर्शन किए। ठीक इसी प्रकार हम भी अपने भीतर ऐसा अनुभव पूर्ण सतगुरु की कृपा से कर सकते हैं।

पिहोवा। श्री कृष्ण कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु। विज्ञप्ति