फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   sarswati river is center of haryana culture

सरस्वती नदी हरियाणा की संस्कृति का केंद्र: घनश्याम

Tue, 17 Nov 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Tue, 17 Nov 2015 12:10 AM IST
विज्ञापन
sarswati river is center of haryana culture
प्रदेश के जनस्वास्थ्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) घनश्याम सर्राफ ने कहा कि सरस्वती नदी के पावन तट पर ही हरियाणा की प्राचीन संस्कृति बसी थी।
विज्ञापन


सदियों से हरियाणा की संस्कृति का केंद्र बिंदु सरस्वती नदी रही है। इसलिए सरकार ने विलुप्त सरस्वती नदी को फिर से धरातल पर लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की स्थापना भी की है।

राज्यमंत्री रविवार देर शाम पिहोवा में कैथल रोड स्थित एक निजी पैलेस में राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन का आयोजन राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद तथा हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के तत्वावधान में किया गया था।
विज्ञापन


राज्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की पावन धरा पर पवित्र सरस्वती नदी को फिर से जमीन पर लाने के लिए सभी पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है। राज्य सरकार हरियाणा की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता को संरक्षित करने का काम कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके लिए ही सरकार ने प्राचीन सरस्वती नदी के लिए बोर्ड गठित किया है। राज्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सरस्वती नदी को फिर से प्रवाहित करने और कुरुक्षेत्र, पिहोवा तीर्थ नगरी को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है।

इसके लिए कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्णा सर्किट में शामिल करते हुए करीब 200 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है। इस प्रोजेक्ट पर शीघ्र कार्य शुरू होगा। उन्होंने अपने कोष से 2 लाख 51 हजार रुपये का अनुदान देने की भी घोषणा की।

हरियाणा कर्मचारी आयोग के चैयरमेन भारत भूषण भारती ने राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने वाले मेहमानों और वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। कहा कि सरस्वती नदी पर आयोजित इस राष्ट्रीय अधिवेशन में विषय विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन के सकारात्मक परिणाम भविष्य में देखने को मिलेंगे।


राष्ट्रीय अधिवेशन में बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशंात भारद्वाज, यूनिवर्सिटी से डॉ. एआर चौधरी, इंदिरा गंाधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति सुषमा यादव, प्रोफेसर नागेश्वर राव, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति दिवाकर नाथ वाजपेयी, महंत बंसीपुरी महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर प्रो. एसपी बंसल, प्रो. विजय सिंह, आचार्य अरुण, प्रो. एपी पांडे, डॉ. राजकुमार भाटिया, डॉ. रमेश हुडा, डॉ. अश्विनी महापात्रा, डॉ. अजय श्रीवास्तव, युधिष्ठर बहल, रामधारी शर्मा, सचिन मितल, एसडी मुरार, विजय सयाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed