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रोडवेज कर्मचारी पकड़ सकते हैं आंदोलन की राह
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 20 May 2014 12:14 AM IST
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन प्रदेश सरकार बनाई जा रही ओल्ड की न्यू पॉलिसी का विरोध करेगी। मांगें पूरी नहीं होने पर कर्मियों में रोष पनप रहा है और अगर यही हालत रहे तो एक बार फिर से रोडवेज कर्मचारियों द्वारा आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
दूसरी ओर प्राइवेट परमिट देने पर रोष व्यक्त करने के लिए यूनियन ने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। यूनियन ने प्राइवेट परमिट रद्द करने और कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर 23 मई को प्रदर्शन और सात जून को सम्मेलन करने का निर्णय लिया है।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन (संबद्ध इंटक) के प्रांतीय प्रेस सचिव नरेश कुमार ने बताया कि सरकार निजी परमिट देकर अन्याय कर रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यूनियन ने शुरू से ही निजी परमिट देने का विरोध किया है और भविष्य में भी इसकी खिलाफत जारी रहेगी।
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उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बनाई जा रही ओल्ड की न्यू पॉलिसी के खिलाफ कर्मचारी आवाज उठाएंगे। इसकी रूपरेखा तैयार करते हुए यूनियन ने 23 मई को हरियाणा के सभी डिपो और सब डिपो पर दो घंटे का प्रदर्शन करने फैसला लिया है।
इसके अलावा सात जून को कुरुक्षेत्र में कर्मियों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार करते हुए पदाधिकारियों के साथ-साथ कर्मियों से मांगों पर विचार-विमर्श होगा।
कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग पर उन्होंने कहा कि सरकार ने 15 दिन में योजना को लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब फिर से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
आचार संहिता भी खत्म हो चुकी है, लेकिन सरकार रोडवेज में काम करने वाले कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए आगामी कार्रवाई नहीं कर रही, जिसे लेकर प्रदेश भर के कर्मचारियों में रोष पनप रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो कर्मी फिर से आंदोलन पर जाने को विवश होंगे।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के सदस्य सतपाल रोहिला ने कहा कि सरकार रोडवेज में प्राईवेट परमिट को बढ़ावा दे रही है, जिसके किसी भी हाल में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
यूनियन कर्मियों को साथ लेकर इसके खिलाफ आवाज बुलंद करेगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी परमिट देने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाते हुए कच्चे कर्मियों को शीघ्र पक्का किया जाए।
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दूसरी ओर प्राइवेट परमिट देने पर रोष व्यक्त करने के लिए यूनियन ने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। यूनियन ने प्राइवेट परमिट रद्द करने और कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर 23 मई को प्रदर्शन और सात जून को सम्मेलन करने का निर्णय लिया है।
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हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन (संबद्ध इंटक) के प्रांतीय प्रेस सचिव नरेश कुमार ने बताया कि सरकार निजी परमिट देकर अन्याय कर रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यूनियन ने शुरू से ही निजी परमिट देने का विरोध किया है और भविष्य में भी इसकी खिलाफत जारी रहेगी।
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उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बनाई जा रही ओल्ड की न्यू पॉलिसी के खिलाफ कर्मचारी आवाज उठाएंगे। इसकी रूपरेखा तैयार करते हुए यूनियन ने 23 मई को हरियाणा के सभी डिपो और सब डिपो पर दो घंटे का प्रदर्शन करने फैसला लिया है।
इसके अलावा सात जून को कुरुक्षेत्र में कर्मियों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार करते हुए पदाधिकारियों के साथ-साथ कर्मियों से मांगों पर विचार-विमर्श होगा।
कच्चे कर्मियों को पक्का करने की मांग पर उन्होंने कहा कि सरकार ने 15 दिन में योजना को लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब फिर से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
आचार संहिता भी खत्म हो चुकी है, लेकिन सरकार रोडवेज में काम करने वाले कच्चे कर्मियों को पक्का करने के लिए आगामी कार्रवाई नहीं कर रही, जिसे लेकर प्रदेश भर के कर्मचारियों में रोष पनप रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो कर्मी फिर से आंदोलन पर जाने को विवश होंगे।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के सदस्य सतपाल रोहिला ने कहा कि सरकार रोडवेज में प्राईवेट परमिट को बढ़ावा दे रही है, जिसके किसी भी हाल में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
यूनियन कर्मियों को साथ लेकर इसके खिलाफ आवाज बुलंद करेगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी परमिट देने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाते हुए कच्चे कर्मियों को शीघ्र पक्का किया जाए।