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बारिश, शीतलहर ने छुड़ाई कंपकंपी
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बारिश के दौरान सड़क से गुजरते वाहन। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। रुक-रुककर हुई बारिश और शीतलहर ने शनिवार को दिनभर लोगों की कंपकंपी छुड़ाए रखी। सुबह से ही बारिश के साथ शीत लहर चलनी शुरू हो गई थी, जिससे तापमान एकदम से नीचे चला गया। न्यूनतम तापमान दो से तीन डिग्री नीचे गिर गया। पूरे दिन की बारिश ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया।
सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। शाम को 6 बजे के बाद तेज बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटा चली बारिश ने लोगों की मुश्किलों में इजाफा कर दिया। दिनभर बूंदाबांदी के कारण लोग पहले ही घरों से बाहर नहीं निकले। शनिवार को अधिकतम तापमान 14.2 व न्यूनतम 11.2 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं दिनभर की बारिश से सड़कों पर पानी इकट्ठा हो गया, जिस वजह से वाहन चालकों को समस्या का सामना करना पड़ा। ठंड से बचने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयत्न करते दिखाई दिए।
ऑटो चालक दिनभर यात्रियों का इंतजार करते रहे, लेकिन बारिश के बीच लोग बाहर नहीं निकले। वहीं फलों आदि की रेहड़ी वाले भी दिनभर खाली बैठे रहे। उधर, चिकित्सकों ने इस मौसम में स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने की हिदायत दी है। उजाला सिग्नस के फिजिशियन डॉ. पंकज ने कहा कि ठंड व बारिश के दिनों में दमा के मरीजों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस मौसम में दमा बढ़ जाता है। वहीं बाहर का खाना भी नजरअंदाज करें। सुबह-शाम की सैर बंद कर दें।
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आलू और टमाटर की फसल प्रभावित : डॉ. सिंह
सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि ठंड व बारिश से आलू व टमाटर की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी जमा होने से आलू व टमाटर गलने लगे हैं। इस मौसम में टमाटर की फसल को बचा पाना मुश्किल है। वहीं गेहूं की फसल में पानी खड़ा रहने व प्रकाश संश्लेषण की क्रिया न हो पाने की वजह से गेहूं का पौधा पीला पड़ने लगा है। इस मौसम में गेहूं में पानी खड़ा होना पौधे के लिए घात सिद्ध होगा। यदि पौधा पीला पड़ गया है तो यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मौसम परिवर्तन की वजह से हुआ है। डॉ. सिंह ने बताया कि इस मौसम में जड़ वाली फसल को फायदा होगा बशर्ते पानी न भरा हो। इनमें गाजर, मूली, शलगम व धनिया शामिल हैं।
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कुरुक्षेत्र। रुक-रुककर हुई बारिश और शीतलहर ने शनिवार को दिनभर लोगों की कंपकंपी छुड़ाए रखी। सुबह से ही बारिश के साथ शीत लहर चलनी शुरू हो गई थी, जिससे तापमान एकदम से नीचे चला गया। न्यूनतम तापमान दो से तीन डिग्री नीचे गिर गया। पूरे दिन की बारिश ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया।
सुबह से दोपहर तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। शाम को 6 बजे के बाद तेज बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटा चली बारिश ने लोगों की मुश्किलों में इजाफा कर दिया। दिनभर बूंदाबांदी के कारण लोग पहले ही घरों से बाहर नहीं निकले। शनिवार को अधिकतम तापमान 14.2 व न्यूनतम 11.2 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं दिनभर की बारिश से सड़कों पर पानी इकट्ठा हो गया, जिस वजह से वाहन चालकों को समस्या का सामना करना पड़ा। ठंड से बचने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयत्न करते दिखाई दिए।
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ऑटो चालक दिनभर यात्रियों का इंतजार करते रहे, लेकिन बारिश के बीच लोग बाहर नहीं निकले। वहीं फलों आदि की रेहड़ी वाले भी दिनभर खाली बैठे रहे। उधर, चिकित्सकों ने इस मौसम में स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने की हिदायत दी है। उजाला सिग्नस के फिजिशियन डॉ. पंकज ने कहा कि ठंड व बारिश के दिनों में दमा के मरीजों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस मौसम में दमा बढ़ जाता है। वहीं बाहर का खाना भी नजरअंदाज करें। सुबह-शाम की सैर बंद कर दें।
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आलू और टमाटर की फसल प्रभावित : डॉ. सिंह
सब्जी विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि ठंड व बारिश से आलू व टमाटर की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी जमा होने से आलू व टमाटर गलने लगे हैं। इस मौसम में टमाटर की फसल को बचा पाना मुश्किल है। वहीं गेहूं की फसल में पानी खड़ा रहने व प्रकाश संश्लेषण की क्रिया न हो पाने की वजह से गेहूं का पौधा पीला पड़ने लगा है। इस मौसम में गेहूं में पानी खड़ा होना पौधे के लिए घात सिद्ध होगा। यदि पौधा पीला पड़ गया है तो यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मौसम परिवर्तन की वजह से हुआ है। डॉ. सिंह ने बताया कि इस मौसम में जड़ वाली फसल को फायदा होगा बशर्ते पानी न भरा हो। इनमें गाजर, मूली, शलगम व धनिया शामिल हैं।