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Kurukshetra News: इस्कॉन मंदिर में मनाया गया राधाष्टमी प्राकट्य उत्सव
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कुरुक्षेत्र। इस्कॉन मंदिर में राधाष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में राधा-कृष्ण की प्रतिमा का अभिषे
कुरुक्षेत्र। इस्कॉन मंदिर में राधारानी का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी, मेन बाजार स्थित इस्कॉन के श्री राधा राधाकांत मंदिर में राधाष्टमी का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में राधारानी के चरण दर्शन से हुई, जो कि वर्ष में केवल एक दिन ही किए जा सकते हैं।
मंगल आरती के बाद भक्तों ने कीर्तन और नृत्य के साथ उत्सव मनाया। करीब साढे 10 बजे भगवान श्री कृष्ण और राधारानी का अभिषेक किया गया। कीर्तन और अभिषेक के बाद राधारानी की लीलाओं पर आधारित कथा हुई। इस्कॉन के अध्यक्ष साक्षी गोपाल ने बताया कि राधा रानी की कृपा के बिना किसी को भगवान श्री कृष्ण मिलने वाले नहीं हैं। भगवान गीता में अर्जुन को बता रहे हैं कि कोई भी मेरे भक्त की कृपा के बिना मुझे कोई भी प्राप्त नहीं कर सकता। राधा रानी जी कृष्ण की सबसे बड़ी भक्त हैं। अगर भगवान को प्राप्त करना है, उनकी कृपा प्राप्त करनी है तो राधा रानी को प्रसन्न करना होगा।
साक्षी गोपाल ने राधारानी के प्राकट्य की कथा सुनाई। कैसे वृषभानु जी को रावल में खेत जोते समय आकाशवाणी के माध्यम से एक दिव्य पुत्री की प्राप्ति हुई, जिसे वो लेकर अपनी पत्नी कीर्तिदा के पास लेकर गए।
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कुरुक्षेत्र धाम की विशेषता बताते हुए उपाध्यक्ष मोहन गौरचंद्र ने बताया कि ब्रज के बाहर कुरुक्षेत्र एकमात्र ऐसा स्थान है जहां राधारानी ने भ्रमण किया। इस्कॉन के संस्थापक आचार्य प्रभुपाद बचपन से ही राधारानी के परम भक्त थे, जिन्होंने लंदन में राधा कृष्ण का पहला मंदिर स्थापित किया। उसके बाद श्रील प्रभुपाद जी ने पूरे विश्व में 100 से अधिक मंदिरों की स्थापना की।
कथा के बाद भंडारे में करीब 500 भक्तों ने भगवान का सुंदर प्रितीभोज ग्रहण किया।
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मंगल आरती के बाद भक्तों ने कीर्तन और नृत्य के साथ उत्सव मनाया। करीब साढे 10 बजे भगवान श्री कृष्ण और राधारानी का अभिषेक किया गया। कीर्तन और अभिषेक के बाद राधारानी की लीलाओं पर आधारित कथा हुई। इस्कॉन के अध्यक्ष साक्षी गोपाल ने बताया कि राधा रानी की कृपा के बिना किसी को भगवान श्री कृष्ण मिलने वाले नहीं हैं। भगवान गीता में अर्जुन को बता रहे हैं कि कोई भी मेरे भक्त की कृपा के बिना मुझे कोई भी प्राप्त नहीं कर सकता। राधा रानी जी कृष्ण की सबसे बड़ी भक्त हैं। अगर भगवान को प्राप्त करना है, उनकी कृपा प्राप्त करनी है तो राधा रानी को प्रसन्न करना होगा।
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साक्षी गोपाल ने राधारानी के प्राकट्य की कथा सुनाई। कैसे वृषभानु जी को रावल में खेत जोते समय आकाशवाणी के माध्यम से एक दिव्य पुत्री की प्राप्ति हुई, जिसे वो लेकर अपनी पत्नी कीर्तिदा के पास लेकर गए।
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कुरुक्षेत्र धाम की विशेषता बताते हुए उपाध्यक्ष मोहन गौरचंद्र ने बताया कि ब्रज के बाहर कुरुक्षेत्र एकमात्र ऐसा स्थान है जहां राधारानी ने भ्रमण किया। इस्कॉन के संस्थापक आचार्य प्रभुपाद बचपन से ही राधारानी के परम भक्त थे, जिन्होंने लंदन में राधा कृष्ण का पहला मंदिर स्थापित किया। उसके बाद श्रील प्रभुपाद जी ने पूरे विश्व में 100 से अधिक मंदिरों की स्थापना की।
कथा के बाद भंडारे में करीब 500 भक्तों ने भगवान का सुंदर प्रितीभोज ग्रहण किया।