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Kurukshetra News: गर्भ संस्कार केंद्र से गर्भवती महिलाओं को मिलेगा लाभ
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कुरुक्षेत्र। आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में गर्भ संस्कार केंद
- फोटो : kathua
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि गर्भ संस्कार केवल एक परंपरा नहीं बल्कि ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संतुलित और स्वस्थ समाज की नींव है। आयुष विश्वविद्यालय में गर्भ संस्कार जैसे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शोध और चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भावी पीढ़ी न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ हो बल्कि संस्कारों से भी संपन्न हो।
वे सोमवार को आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान (आयुर्वेदिक अस्पताल) में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा स्थापित किए गए गर्भ संस्कार केंद्र के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान माता-पिता के आहार, व्यवहार और विचार तीनों का प्रभाव शिशु के जीवन पर पड़ता है। इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चेयरमैन एवं डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. वैद्य जितेश कुमार पंडा, प्राचार्य प्रो. वैद्य देवेंद्र खुराना, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. वैद्य राजेंद्र चौधरी, प्रो. सीमा एवं वैद्य सुनीति तंवर समेत अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।
गर्भवती महिलाएं बनेंगी ब्रांड एंबेसडर : प्रो. धीमान
कुलपति ने कहा कि गर्भ संस्कार एक आयुर्वेदिक और वैदिक परंपरा है। इसका उद्देश्य गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान माता-पिता और भ्रूण के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर को शुद्ध व संतुलित करना होता है। यह न केवल स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है बल्कि संस्कारित, गुणवान और तेजस्वी संतान के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पहुंची सभी गर्भवती महिलाएं हमारे विश्वविद्यालय के गर्भ संस्कार केंद्र की ब्रांड एंबेसडर बनेंगी।
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वहीं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेश कुमार पंडा ने कहा कि गर्भ संस्कार से गर्भस्थ शिशु का विकास यानी मन, मस्तिष्क व बुद्धि का विकास गर्भ में ही शुरू हो जाता है। गर्भधारण, प्रसव और शिशु-पालन की प्रक्रिया सहज और स्वस्थ हो, इसलिए भी गर्भ संस्कार जरूरी है।
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वे सोमवार को आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान (आयुर्वेदिक अस्पताल) में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा स्थापित किए गए गर्भ संस्कार केंद्र के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान माता-पिता के आहार, व्यवहार और विचार तीनों का प्रभाव शिशु के जीवन पर पड़ता है। इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चेयरमैन एवं डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. वैद्य जितेश कुमार पंडा, प्राचार्य प्रो. वैद्य देवेंद्र खुराना, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. वैद्य राजेंद्र चौधरी, प्रो. सीमा एवं वैद्य सुनीति तंवर समेत अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।
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गर्भवती महिलाएं बनेंगी ब्रांड एंबेसडर : प्रो. धीमान
कुलपति ने कहा कि गर्भ संस्कार एक आयुर्वेदिक और वैदिक परंपरा है। इसका उद्देश्य गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान माता-पिता और भ्रूण के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर को शुद्ध व संतुलित करना होता है। यह न केवल स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है बल्कि संस्कारित, गुणवान और तेजस्वी संतान के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पहुंची सभी गर्भवती महिलाएं हमारे विश्वविद्यालय के गर्भ संस्कार केंद्र की ब्रांड एंबेसडर बनेंगी।
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वहीं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. जितेश कुमार पंडा ने कहा कि गर्भ संस्कार से गर्भस्थ शिशु का विकास यानी मन, मस्तिष्क व बुद्धि का विकास गर्भ में ही शुरू हो जाता है। गर्भधारण, प्रसव और शिशु-पालन की प्रक्रिया सहज और स्वस्थ हो, इसलिए भी गर्भ संस्कार जरूरी है।