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Kurukshetra News: आठ माह की गर्भावस्था में कर्तव्य निभाने को तैनात हो गईं पूजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 May 2025 02:40 AM IST
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Pooja got deployed to perform duties during eight months of pregnancy
कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस अर्थात नर्सों का दिन। अस्पतालों में इस अवसर पर विशेष आयोजन हुए। लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल की नर्सों का समर्पण और जज्बा हर किसी के दिल को छू रहा है। अपनी खुशियों व पीड़ा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को दरकिनार कर ये नर्सें मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटीं हैं। इनमें से कुछ अपनी गर्भावस्था की चुनौतियों को भूलकर, तो कुछ नवविवाहित अपनी खुशियों को पीछे छोड़कर भारत-पाक तनाव के चलते बने आपातकाल में सेवा निभाने के लिए डट गईं।
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ऐसे में ये नर्सें न केवल अपने काम की मिसाल हैं, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही हैं कि कर्तव्य और सेवा का जज्बा हर परिस्थिति में जीवित रहता है। नर्सों का कहाना है कि सच्ची सेवा वही है, जो निजी सुख-दुख से ऊपर उठकर की जाए। नर्सें किसी भी अस्पताल की रीढ़ होती हैं। वह मरीजों को कभी प्यार से तो कभी मां की तरह डांट कर उन्हें सही से इलाज लेने में उनकी मदद करती हैं।
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गर्भावस्था में भी कर्तव्य को रखा सर्वोपरि
अस्पताल में कार्यरत नर्स पूजा आठ माह की गर्भवती होने पर मातृ अवकाश पर थीं, लेकिन भारत-पाक के बीच युद्ध के हालात के चलते स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आया तो वे भी सेवा के लिए अपनी शारीरिक पीड़ा को भूलकर ड्यूटी पर लौट आईं। गर्भावस्था के नाजुक दौर में भी उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और मरीजों की देखभाल में कोई कमी नहीं आने दी। पूजा का यह जज्बा नर्सिंग पेशे की गरिमा को और ऊंचा करता है।
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दो नवविवाहिता नर्सें प्रशासन के बुलावे पर पहुंचीं
नवविवाहित नर्स पुष्पेंद्र कौर और अनुराधा अपनी शादी की खुशियों को पीछे छोड़कर अस्पताल की सेवा में जुट गईं। शादी के बाद के शुरुआती दिन, जो आमतौर पर नवदंपती के लिए उत्सव और खुशियों भरे होते हैं, इन नर्सों ने मरीजों की देखभाल में समर्पित कर दिए। अस्पताल प्रशासन के एक बुलावे पर दोनों ने तुरंत ड्यूटी संभाली और बिना किसी शिकायत के अपनी जिम्मेदारियों को निभाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि उनके लिए मरीजों की जान से बढ़कर कुछ नहीं।


मरीजों के बीच बांटे फल बांटकर मनाया दिवस
सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरमीत कौर का कहना है कि नर्सिंग दिवस के मौके पर भी इन नर्सों ने अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता दी। जहां इस दिन को उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा थी, वहीं अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम को रद्द कर नर्सों ने मरीजों के बीच फल बांटकर अपनी खुशियां साझा कीं। कई नर्सों का विपरीत परिस्थितियों में काम करना उनके त्याग भाव को दर्शाता है।



डेढ़ साल की बेटी को घर पर छोड़ा
नर्स कोमल की कहानी भी प्रेरणादायक है। वह अपनी डेढ़ साल की बेटी को घर पर छोड़कर कोमल हर दिन ड्यूटी पर आती हैं। मां होने की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह मरीजों की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़तीं। उनकी यह निष्ठा और संतुलन की क्षमता हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

कुरुक्षेत्र। नर्स कोमल।

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