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Kurukshetra News: प्रदूषण बिगाड़ रहा लोगों का स्वास्थ्य, अस्पताल पहुंच रहा हर चौथा व्यक्ति नेत्र, अस्थमा व श्वास का रोगी
Sat, 22 Nov 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:36 AM IST
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कुरुक्षेत्र। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज। संवाद
- फोटो : 1
मुनीश मुंडे
कुरुक्षेत्र। पिछले कई साल से पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। पर्यावरणीय चुनौतियां हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं।
वायु-जल के साथ वातावरण में कई प्रकार के प्रदूषण बढ़ रहे हैं जिनसे सीधे तौर पर हृदय रोग, कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह के अलावा अन्य कई गंभीर बीमारियों से संबंध हैं। इन दिनों अस्पतालों में पहुंचने वाला हर चौथा व्यक्ति नेत्र, अस्थमा, श्वास रोग से पीड़ित पहुंच रहा है।
जिले में किस बीमारी के कितने मरीज
बीमारी का नाम रोगियों की संख्या
मधुमेह 50 हजार
फैटी लीवर 55 हजार
उच्च रक्तचाप 1.25 लाख
हद्य रोगी 15 हजार
वायु प्रदूषण सबसे खतरनाक
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण पर्यावरण तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण ठोस-सूक्ष्म कणों और कुछ गैसों का हवा में मिल जाना होता है। ये कण और गैसें कार, बाइक, ऑटो और ट्रक से निकलने वाले धुएं और खेतों में जलाए जाने वाले धान के अवशेष के कारण बढ़ रहे हैं।
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नहीं रहा हार्ड वर्क, जीवनशैली जिम्मेदार : डॉ. रमेश
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभरवाल का कहना है कि हमारे शरीर की संरचना हार्ड वर्क के अनुसार बनी है। हमारे लोग मेहनत ज्यादा करते थे। साइकिल का इस्तेमाल करते थे, अनाज को पीसने के लिए चक्की का इस्तेमाल करते थे। लेकिन आजकल ऐसा नहीं हो रहा। फर्टिलाइजर ज्यादा प्रयोग किए जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली ही बीमारियों की मुख्य वजह है।
जीवनशैली बदलें, स्मोकिंग से रहें दूर
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप ने बताया कि जिन लोगों को अनियंत्रित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की परेशानी है, उन्हें अपनी डाइट और जीवनशैली का खास ख्याल रखना चाहिए। स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ तरीकों से लोग अपने स्ट्रेस को कम कर सकते हैं। ध्यान यानी मेडिटेशन तनाव प्रबंधन में मदद करते हैं।
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कुरुक्षेत्र। पिछले कई साल से पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। पर्यावरणीय चुनौतियां हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं।
वायु-जल के साथ वातावरण में कई प्रकार के प्रदूषण बढ़ रहे हैं जिनसे सीधे तौर पर हृदय रोग, कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह के अलावा अन्य कई गंभीर बीमारियों से संबंध हैं। इन दिनों अस्पतालों में पहुंचने वाला हर चौथा व्यक्ति नेत्र, अस्थमा, श्वास रोग से पीड़ित पहुंच रहा है।
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जिले में किस बीमारी के कितने मरीज
बीमारी का नाम रोगियों की संख्या
मधुमेह 50 हजार
फैटी लीवर 55 हजार
उच्च रक्तचाप 1.25 लाख
हद्य रोगी 15 हजार
वायु प्रदूषण सबसे खतरनाक
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण पर्यावरण तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण ठोस-सूक्ष्म कणों और कुछ गैसों का हवा में मिल जाना होता है। ये कण और गैसें कार, बाइक, ऑटो और ट्रक से निकलने वाले धुएं और खेतों में जलाए जाने वाले धान के अवशेष के कारण बढ़ रहे हैं।
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नहीं रहा हार्ड वर्क, जीवनशैली जिम्मेदार : डॉ. रमेश
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभरवाल का कहना है कि हमारे शरीर की संरचना हार्ड वर्क के अनुसार बनी है। हमारे लोग मेहनत ज्यादा करते थे। साइकिल का इस्तेमाल करते थे, अनाज को पीसने के लिए चक्की का इस्तेमाल करते थे। लेकिन आजकल ऐसा नहीं हो रहा। फर्टिलाइजर ज्यादा प्रयोग किए जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली ही बीमारियों की मुख्य वजह है।
जीवनशैली बदलें, स्मोकिंग से रहें दूर
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप ने बताया कि जिन लोगों को अनियंत्रित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की परेशानी है, उन्हें अपनी डाइट और जीवनशैली का खास ख्याल रखना चाहिए। स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ तरीकों से लोग अपने स्ट्रेस को कम कर सकते हैं। ध्यान यानी मेडिटेशन तनाव प्रबंधन में मदद करते हैं।

कुरुक्षेत्र। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज। संवाद- फोटो : 1