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कृत्रिम रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों से ही खेलें होली : डॉ. ममगाई
Mon, 25 Mar 2024 03:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 25 Mar 2024 03:19 AM IST
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कुरुक्षेत्र। होली पर्व उत्साह का त्योहार है लेकिन विशेष तौर पर मधुमेह, हृदय और सांस-एलर्जी से पीडि़त लोग होली खेलते हुए अपनी सेहत का ख्याल भी रखे। क्योंकि मिलावटी रंग फेफड़ों, आंखों, कानों, बालों, त्वचा और हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कहना है पूर्व सिविल सर्जन एवं जिला नागरिक अस्पताल के हृदय एवं छाती-क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाई शैली का। उन्होंने कहा कि पीड़ित कृत्रिम रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें।
उन्होेंने बताया कि बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में रासायनिक पदार्थ, धातु व कांच के टुकडे़ और कीटनाशक कण मिले होते हैं, जोकि श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। क्रोमियम और पारा अस्थमा और एलर्जी का कारण बनने के साथ-साथ जिगर और गुर्दों पर असर डाल सकते हैं। पहले से ही सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों में ये समस्या और बढ़ सकती है। पर्व के दिन घरों में पकवान बनते हैं। ऐसे में दिल के मरीजों का कोलेस्ट्रॉल का ध्यान रखते हुए ऐसी मिठाइयों और पकवानों का सेवन करना चाहिए, जिनमें कम तेल और घी का इस्तेमाल किया गया हो। हार्ट अटैक से से पीडि़त लोगों को कम मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए। होली खेलते समय आंख पर चश्मा, चेहरे पर मास्क और कानों में ईयर प्लग, कॉटन बॉल या इयर मफ का उपयोग करने से आंखों एवं कानों में नुकसान होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
ऐसे करें प्राकृतिक रंगों की पहचान
डॉ. ममगाई ने कहा कि प्राकृतिक गुलाल हाथों पर लगाने से अपना रंग नहीं छोड़ता है। लेकिन रसायनयुक्त रंग हाथों में अपना निशान छोड़ता है और इससे नुकसान भी होता है। रासायनिक रंगों से शरीर को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। कृत्रिम रंगों की जगह जड़ी बूटियों, फलों और पत्तियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें।
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उन्होेंने बताया कि बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में रासायनिक पदार्थ, धातु व कांच के टुकडे़ और कीटनाशक कण मिले होते हैं, जोकि श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। क्रोमियम और पारा अस्थमा और एलर्जी का कारण बनने के साथ-साथ जिगर और गुर्दों पर असर डाल सकते हैं। पहले से ही सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों में ये समस्या और बढ़ सकती है। पर्व के दिन घरों में पकवान बनते हैं। ऐसे में दिल के मरीजों का कोलेस्ट्रॉल का ध्यान रखते हुए ऐसी मिठाइयों और पकवानों का सेवन करना चाहिए, जिनमें कम तेल और घी का इस्तेमाल किया गया हो। हार्ट अटैक से से पीडि़त लोगों को कम मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए। होली खेलते समय आंख पर चश्मा, चेहरे पर मास्क और कानों में ईयर प्लग, कॉटन बॉल या इयर मफ का उपयोग करने से आंखों एवं कानों में नुकसान होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
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ऐसे करें प्राकृतिक रंगों की पहचान
डॉ. ममगाई ने कहा कि प्राकृतिक गुलाल हाथों पर लगाने से अपना रंग नहीं छोड़ता है। लेकिन रसायनयुक्त रंग हाथों में अपना निशान छोड़ता है और इससे नुकसान भी होता है। रासायनिक रंगों से शरीर को नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है। कृत्रिम रंगों की जगह जड़ी बूटियों, फलों और पत्तियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें।
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