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जिंदल सिटी विवाद: अदालत ने तीनों पक्ष की सुनी दलीले, अब अगली सुनवाई 30 को

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 12:51 AM IST
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जिंदल सिटी सड़क विवाद मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद जिंदल सिटी वासी, फर्म व डीटीपी के वकीलों ने अपना-अपना पक्ष अदालत के सामने रखा। बहस करते हुए फर्म व सरकारी वकील ने सड़क में कॉलोनाइजरों को हिस्सा देने की मांग रखी गई। वहीं आरडब्ल्यूए के वकील ने इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने जिंदल सिटी की सड़क को सिर्फ जिंदल सिटी वासियों के लिए ही रखने के लिए दलील पेश की। डेढ़ घंटे तक तीनों पक्षों की कड़ी बहस चली। वहीं सड़क के रखरखाव को लेकर भी बहस हुई। उसके बाद कोर्ट ने करीब सवा 3 बजे अगली सुनवाई 30 नवंबर को करने का फैसला दिया।
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जिंदल सिटी वासियों की ओर से अधिवक्ता संदीप नरवाल ने दलील पेश करते हुए कोर्ट को बताया कि 24 मीटर सड़क को मूल रूप से सेक्टरवासियों के अलावा आसपास की कॉलोनी के लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जिस सड़क में फर्म हिस्सेदारी चाहती है वह 24 मीटर न होकर मात्र 10-12 मीटर की है। यहां पर उक्त फर्म गेट लगाना चाहती है। इस दायरे में सिर्फ सेक्टर 29 और 30 का डिवाइडिंग रोड ही आता है न कि फर्म की जमीन के सामने का रोड।
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उधर, फर्म की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विशाल मदान ने बताया कि जिंदल सिटी में बनी सड़कें इसके आसपास वाली कॉलोनी भी इस्तेमाल में ला सकती हैं। इसके अलावा यदि जिंदल ग्रुप सड़क का रखरखाव नहीं करना चाहते तो फर्म सड़क का रखरखाव करने के लिए तैयार है।
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ग्रीन होम्स लिमिटेड फर्म की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विशाल मदान ने बताया कि सरकार के वर्ष 2020 के एक फैसले के अनुसार सभी सड़कें जनता के इस्तेमाल के लिए हैं। जिंदल सिटी की भी सभी सड़कें सिर्फ जिंदल सिटी वासियों के लिए ही नहीं बल्कि आम जनता के इस्तेमाल के लिए भी हैं। फर्म की ओर से यह पक्ष रखा गया है कि यदि 24 मीटर सड़क जिंदल सिटी वासी रखरखाव नहीं कर सकते तो नए बिल्डर इसका रखरखाव करने के लिए तैयार हैं।
जिंदल सिटी वासियों के अधिवक्ता संदीप नरवाल ने बताया कि सिटी वासियों के पास वर्ष 2007 से लाइसेंस है व खुद के खर्च पर ही सिटी का रखरखाव किया जा रहा है। जब तक कॉलोनी 70 प्रतिशत से ज्यादा विकसित नहीं होती तब तक कॉलोनी डेवलपर सड़कें आदि को हैंडओवर नहीं कर सकते। पांच साल के बाद ही कोई भी कंपनी सड़कें आदि को हैंडओवर कर सकती हैं। जिंदल सिटी में करीब 700 प्लॉट हैं जबकि इनमें से मात्र 200 मकान ही बने हुए हैं। इन 200 मकानों में कुछ मकानों में तो लोगों ने रहना भी शुरू नहीं किया है।

जिला नगर योजनाकार सतीश पूनिया ने बताया कि उनके अधिवक्ता की ओर से अदालत में दलील पेश की गई है। 24 मीटर रोड से संबंधित कागजात अदालत में पेश किए गए हैं। अदालत का जो भी फैसला होगा मंजूर होगा।
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