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महासागर कानून से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बढ़ेगी : हाइडे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Oct 2024 04:40 AM IST
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Ocean law will enhance security and peace in the Indo-Pacific region: Hyde
कुरुक्षेत्र। कुवि के सीनेट हॉल में आयोजित इंडो-पैसिफिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास विषय पर अफ्रिका, मलेशिया, फ्रांस, कीनिया, जापान, मॉरिशस, अमेरिका, वियतनाम देशों के कूटनीतिज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने वैश्विक स्तर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास विषयों पर भावी योजनाओं एवं परिणामों पर चर्चा की।
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सम्मेलन में फ्रांस से जुड़े विशिष्ट अतिथि जीन क्लाउड ब्रूनेट ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र संपूर्ण विश्व में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने में अनिवार्य भूमिका अदा कर सकता है। इस क्षेत्र में भारत विशेष भूमिका अदा कर जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
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मुख्य वक्ता सासाकावा पीस फाउंडेशन टोक्यो के अध्यक्ष हाइडे सागाकोची ने कहा कि महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं आपसी सहयोग से ही देश प्रगति की ओर अग्रसर होता है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन ने न केवल समुद्री परिवहन अपितु खाद्य आपूर्ति सहित अन्य संसाधनों को भी प्रभावित किया है। जापान देश की नई सरकार द्वारा महासागर कानून लाया गया है, जिसके अंतर्गत इस क्षेत्र में सुरक्षा, शांति एवं देशों के बीच आपसी सहयोग पर बल दिया गया है।
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कनाडा में विपक्ष के नेता सलाहकार एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र नेता एवं खिलाड़ी गुलाब सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति पूरे विश्व में रंग ला रही है। यूएसए से शिकाहो गोटो ने कहा कि नीली अर्थव्यवस्था पर विश्व के करोड़ों लोगों का जीवन निर्भर करता है।
वैश्विक दौर में नई चुनौतियों का सामना करने में इंडो-पैसिफिक देश पूरे विश्व में अपनी निर्णायक भूमिका अदा कर सकते हैं। साउथ अफ्रीका से डॉ. नोमवूयो एन नोखवे ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र संभावनाओं व अवसरों से भरा हुआ है। इस दृष्टि से विकास को प्राथमिकता देकर इंडो-पैसिफिक देश गरीब देशों के सामने आ रही चुनौतियों एवं समस्याओं के समाधान में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

मॉरिशस यूनिवर्सिटी के कुलपति संजीव के सोभी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित बहुत सारी चुनौतियां हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति, बढ़ती हुई प्रतियोगिता, शक्तियों के बीच में टकराव इत्यादि। इटली से प्रो. फ्रांसिसिको डि पाओला ने कहा कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व के लिए बड़ी समस्या बन चुका है, जिस कारण 1.5 डिग्री तापमान बढ़ा है। इसलिए प्रत्येक देश को कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है।


इंडोनेशिया से फिरदोस दहलान ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश आपसी सौहार्द से ओशियन समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। इसमें भारत केंद्र में रहकर पूरे विश्व में नई भूमिका अदा कर सकता है। पूर्व महासचिव इओरा एवं दक्षिण अफ्रीका के पूर्व उच्चायुक्त डॉ. नोम्वुयो एन नोक्वे ने कहा कि जलवायु एवं सतत विकास के मुद्दों पर इंडो-पैसिफिक देश एक मंच पर आकर वैश्विक समस्याओं का समाधान निकाल सकता है।
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