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Kurukshetra News: अब मिल सकेगी प्राकृतिक अवयवों युक्त एंटीबायोटिक दवा, नहीं होगा दुष्प्रभाव
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कुरुक्षेत्र। सर्वविदित है कि एंटीबायोटिक दवाओं का शरीर पर साइड इफेक्ट होता है, लेकिन अब मरीजों को ऐसी एंटीबायोटिक दवा मिल सकेगी, जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसे प्राकृतिक अवयवों के मिश्रण से तैयार किया गया है। यह एंटीबायोटिक दवा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने हाल ही में ईजाद की है। इसके बाद 13 सितंबर को इसका पेटेंट भी हो गया है।
शोधार्थियों के अनुसार, यह दवा माइक्रोबियल संक्रमण से प्रभावी ढंग से निपट सकती है। वहीं यह स्टैफिलोकोकस ऑरियस (एस. ऑरियस), बैसिलस सबटिलिस (बी. सबटिलिस) और एस्चेरिचिया कोली (ई. कोली) और ए. नाइजर जैसे विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी होगी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उनका यह प्रयास माइक्रोबियल संक्रमण के लिए नए और अभिनव उपचार के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। साथ ही वे इस क्षेत्र में अपना शोध जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि यह पहली बार है कि प्राकृतिक अवयव के मिश्रण के साथ ऐसी एंटीबायोटिक दवा बनाई गई है, जिसका न तो साइड इफेक्ट होगा और न ही मरीज को इसकी लत लगेगी। रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं में प्रो. डॉ सोहन लाल, डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. संजीव अरोड़ा के अलावा शोधार्थी शिखा रानी पिछले दो साल से इस प्रयोग पर लगे थे, जिसमें अब सफलता मिल पाई है।
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प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं पर गर्व : कुलपति
कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि यह पेटेंट कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए जा रहे नवोन्मेषी और अभूतपूर्व कार्य को दर्शाता है। यह अनुसंधान और विकास में निवेश के महत्व पर प्रकाश डालता है। विश्वविद्यालय को अपनी टीम में ऐसे प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं पर गर्व है। हर संभव तरीके से शोधकर्ताओं के काम को समर्थन करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
क्या है माइक्रोबियल संक्रमण
डॉ. सोहन लाल के मुताबिक, माइक्रोबियल संक्रमण जीव में संक्रामक एजेंटों के आक्रमण, उनके गुणन और इन एजेंटों के खिलाफ मेजबान ऊतक की प्रतिक्रिया की संयुक्त प्रक्रिया है। संक्रामक एजेंटों में मुख्य रूप से बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, कवक आदि शामिल हैं।
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शोधार्थियों के अनुसार, यह दवा माइक्रोबियल संक्रमण से प्रभावी ढंग से निपट सकती है। वहीं यह स्टैफिलोकोकस ऑरियस (एस. ऑरियस), बैसिलस सबटिलिस (बी. सबटिलिस) और एस्चेरिचिया कोली (ई. कोली) और ए. नाइजर जैसे विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी होगी।
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शोधकर्ताओं का मानना है कि उनका यह प्रयास माइक्रोबियल संक्रमण के लिए नए और अभिनव उपचार के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। साथ ही वे इस क्षेत्र में अपना शोध जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि यह पहली बार है कि प्राकृतिक अवयव के मिश्रण के साथ ऐसी एंटीबायोटिक दवा बनाई गई है, जिसका न तो साइड इफेक्ट होगा और न ही मरीज को इसकी लत लगेगी। रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं में प्रो. डॉ सोहन लाल, डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. संजीव अरोड़ा के अलावा शोधार्थी शिखा रानी पिछले दो साल से इस प्रयोग पर लगे थे, जिसमें अब सफलता मिल पाई है।
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प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं पर गर्व : कुलपति
कुवि के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि यह पेटेंट कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए जा रहे नवोन्मेषी और अभूतपूर्व कार्य को दर्शाता है। यह अनुसंधान और विकास में निवेश के महत्व पर प्रकाश डालता है। विश्वविद्यालय को अपनी टीम में ऐसे प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं पर गर्व है। हर संभव तरीके से शोधकर्ताओं के काम को समर्थन करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
क्या है माइक्रोबियल संक्रमण
डॉ. सोहन लाल के मुताबिक, माइक्रोबियल संक्रमण जीव में संक्रामक एजेंटों के आक्रमण, उनके गुणन और इन एजेंटों के खिलाफ मेजबान ऊतक की प्रतिक्रिया की संयुक्त प्रक्रिया है। संक्रामक एजेंटों में मुख्य रूप से बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, कवक आदि शामिल हैं।