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Kurukshetra News: अब नवनिर्मित शनिदेव मंदिर में विराजमान होंगे शनिदेव महाराज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2024 05:07 AM IST
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Now Shanidev Maharaj will be seated in the newly constructed Shanidev temple.
कुरुक्षेत्र। प्राचीन श​क्तिपीठ मां भद्रकाली में तैयार किया गया शनि मंदिर। संवाद
कुरुक्षेत्र। मां भद्रकाली शक्तिपीठ में नवनिर्मित शनिदेव मंदिर में शनिदेव महाराज की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा छह जून को शनि जयंती के उपलक्ष्य में होगी। इसके लिए मंदिर परिसर में तैयारियां भी की जा रही हैं। मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एक जून से छह जून तक कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार शनि देव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं और वे कौए की सवारी करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव महाराज श्री कृष्ण के भक्त है। वे बाल्यावस्था में ही भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लीन रहते थे।
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पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि मंदिर परिसर में बने शनिदेव महाराज की प्राण प्रतिष्ठा छह जून को होगी, इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के हिस्सा लेने की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के लिए शनि शिला को ध्यान मुद्रा में जयपुर के कारीगरों ने तैयार किया है। इसके अलावा नवग्रहों की मूर्तियां भी मंदिर परिसर में जानकारी के साथ स्थापित की जाएंगी। मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात दोपहर को भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इस मौके पर नरेंद्र वालिया, एमके मौदगिल, धर्मपाल गोयल, जीवन मौदगिल, शिमला देवी, हेमराज शर्मा, अन्नू पॉल, स्नेहिल शर्मा, संजीव मित्तल, रामपाल लाठर, अजय शर्मा, विजय सहित अन्य मौजूद रहे।
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मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पर यह होंगे अनुष्ठान
शनिदेव महाराज की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान एक जून को मंडप पूजन, वास्तु पूजन, नवग्रह पूजन, स्थान जागृति पूजन कार्यक्रम होंगे। हर रोज दो ब्राह्मणों द्वारा शनिदेव महाराज के आह्वान व प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मंत्रों का जाप सुबह नौ बजे से सायं को आरती होने तक होगा। जबकि दो जून को धन्नाधिवास, अन्नाधिवास कार्यक्रम का आयोजन होगा और तीन जून को औषधाधिवास, शर्कराधिवास किया जाएगा।
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वहीं चार जून को गंधाधिवास, पुष्पाधिवास कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा और पांच जून को फलाधिवास, जबकि छह जून को शनि जयंती के उपलक्ष्य में सुबह नौ बजे दशविध स्नान घी, दही, औषधि, भस्म, शहद से किया जाएगा। इसके पश्चात शनिदेव महाराज की मूर्ति को स्थापित कर मंत्र उच्चारण किया जाएगा।
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