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ऑटो म्यूटेशन सिस्टम से अब रजिस्ट्री होने के बाद स्वत: दर्ज हो रहा इंतकाल
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कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए ऑटो म्यूटेशन सिस्टम और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 लॉन्च किया है। यह पहल नागरिकों को तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी। इसे आमजन के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया गया है।
ऑटो म्यूटेशन सिस्टम लागू होने के बाद संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही संबंधित इंतकाल स्वत: दर्ज हो जाएगा। नागरिकों को अलग से इंतकाल दर्ज करवाने के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा। जिन मामलों में अतिरिक्त जांच या विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत होगा। जटिल मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि विरासत, पारिवारिक बंटवारे और न्यायालय की डिक्री आधारित मामलों को भी समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा। इस डिजिटल पहल से भूमि अभिलेखों का रिकॉर्ड तेजी से अपडेट होगा।
नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। वे संबंधित दस्तावेज की प्रतियां भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों और भूमि स्वामियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा। पहले भूमि की रजिस्ट्री के बाद इंतकाल दर्ज करवाने के लिए पटवार भवन जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी और अनावश्यक परेशानियां होती थीं।
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ऑटो म्यूटेशन सिस्टम लागू होने के बाद संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही संबंधित इंतकाल स्वत: दर्ज हो जाएगा। नागरिकों को अलग से इंतकाल दर्ज करवाने के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा। जिन मामलों में अतिरिक्त जांच या विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत होगा। जटिल मामलों का निपटान अधिकतम 10 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि विरासत, पारिवारिक बंटवारे और न्यायालय की डिक्री आधारित मामलों को भी समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा। इस डिजिटल पहल से भूमि अभिलेखों का रिकॉर्ड तेजी से अपडेट होगा।
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नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। वे संबंधित दस्तावेज की प्रतियां भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों और भूमि स्वामियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा। पहले भूमि की रजिस्ट्री के बाद इंतकाल दर्ज करवाने के लिए पटवार भवन जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी और अनावश्यक परेशानियां होती थीं।
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