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आयुष शिक्षा को नई उड़ान: श्रीकृष्ण आयुष विवि में शुरू होंगे तीन नए कोर्स
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का प्रवेश द्वार। संवाद
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय प्रदेश में आयुष शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की तैयारी में है। प्रशासन ने आगामी तीन वर्षों का रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत विशेष रूप से आयुर्वेद में बीएससी नर्सिंग, बी फार्मेसी और एम फार्मेसी जैसे नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। साथ ही अस्पताल में विशेष अनुसंधान केंद्र की भी स्थापना होगी।
इसके साथ ही पंचकर्म चिकित्सा के लिए मरीजों को निजी कमरों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यकाल में विस्तार मिलने के बाद कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने विशेष बातचीत में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की आयुष शिक्षा एवं अनुसंधान संस्था के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए अकादमिक विस्तार के साथ आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शिक्षा एवं उपचार को बढ़ावा देने के लिए बीएससी नर्सिंग, बी फार्मेसी और एम फार्मेसी शुरू करने की प्रक्रिया पर कार्य चल रहा है। इन पाठ्यक्रमों के शुरू होने से विद्यार्थियों को आयुष और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे। आवश्यक स्वीकृतियां और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विवि में अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की भी योजना है। आयुर्वेद, पंचकर्म, औषधीय पौधों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की मदद से शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
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पंचकर्म चिकित्सा के तहत पहली बार की जाएगी निजी कमरों की व्यवस्था
विवि के आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म चिकित्सा के लिए बहुत से मरीज आते हैं। उनकी तरफ से निजी कमरों की डिमांड रहती है। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहली बार प्राइवेट रूम की व्यवस्था बनाई जाएगी। मरीजों को उपचार के दौरान बेहतर वातावरण और अधिक गोपनीयता मिल सकेगी। विवि का मानना है कि इससे बाहरी राज्यों के मरीज भी उपचार के लिए आकर्षित होंगे। इसके अलावा विवि का नया परिसर फतुहपुर में 465 करोड़ के बजट से 100 एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा। आधुनिक शैक्षणिक भवन, प्रयोगशालाएं, शोध केंद्र, छात्रावास, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अत्याधुनिक अस्पताल शामिल रहेंगे। निर्माण कार्य को ढाई वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
तीन साल का लक्ष्य, राष्ट्रीय पहचान पर फोकस
कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि अगले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नए भवन खड़े करना नहीं, शिक्षा, शोध और उपचार के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना है, जो श्रीकृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी को उच्चतम श्रेणी में स्थापित करे। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध गतिविधियों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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इसके साथ ही पंचकर्म चिकित्सा के लिए मरीजों को निजी कमरों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यकाल में विस्तार मिलने के बाद कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने विशेष बातचीत में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की आयुष शिक्षा एवं अनुसंधान संस्था के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए अकादमिक विस्तार के साथ आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत बनाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शिक्षा एवं उपचार को बढ़ावा देने के लिए बीएससी नर्सिंग, बी फार्मेसी और एम फार्मेसी शुरू करने की प्रक्रिया पर कार्य चल रहा है। इन पाठ्यक्रमों के शुरू होने से विद्यार्थियों को आयुष और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे। आवश्यक स्वीकृतियां और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विवि में अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की भी योजना है। आयुर्वेद, पंचकर्म, औषधीय पौधों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की मदद से शोध कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
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पंचकर्म चिकित्सा के तहत पहली बार की जाएगी निजी कमरों की व्यवस्था
विवि के आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म चिकित्सा के लिए बहुत से मरीज आते हैं। उनकी तरफ से निजी कमरों की डिमांड रहती है। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहली बार प्राइवेट रूम की व्यवस्था बनाई जाएगी। मरीजों को उपचार के दौरान बेहतर वातावरण और अधिक गोपनीयता मिल सकेगी। विवि का मानना है कि इससे बाहरी राज्यों के मरीज भी उपचार के लिए आकर्षित होंगे। इसके अलावा विवि का नया परिसर फतुहपुर में 465 करोड़ के बजट से 100 एकड़ भूमि में विकसित किया जाएगा। आधुनिक शैक्षणिक भवन, प्रयोगशालाएं, शोध केंद्र, छात्रावास, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अत्याधुनिक अस्पताल शामिल रहेंगे। निर्माण कार्य को ढाई वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
तीन साल का लक्ष्य, राष्ट्रीय पहचान पर फोकस
कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि अगले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नए भवन खड़े करना नहीं, शिक्षा, शोध और उपचार के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना है, जो श्रीकृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी को उच्चतम श्रेणी में स्थापित करे। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध गतिविधियों और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का प्रवेश द्वार। संवाद