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भारत के भाग्य को बदलने वाला दस्तावेज है नई शिक्षा नीति: प्रो. केसी शर्मा
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं संस्कार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत के भाग्य को बदलने वाला दस्तावेज है। यह एक ऐसी नीति है जो भारत में वैश्विक नागरिक तैयार करने में मदद करेगी व समाज की विभिन्न समस्याओं के निदान का कारण बनेगी। वे बुधवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेंटर फार कॉन्टिनूयिंग एजुकेशन रूसा 2.0 तथा फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में रोल ऑफ टीचर्स इन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, रविंद्र नाथ टैगोर एवं महात्मा गांधी ने देश में जिस तरह की शिक्षा व्यवस्था की कल्पना की थी यह शिक्षा नीति बिल्कुल वैसी ही है। किसी भी देश में बड़ा बदलाव शिक्षा क्षेत्र के सहयोग के बिना संभव नहीं है। यह दस्तावेज आने वाले दो दशकों में भारत में बड़े बदलाव का कारण बनेगा। प्रो. शर्मा ने कहा कि इस दस्तावेज को बनाने के लिए लगभग पांच वर्ष तक गंभीर चर्चा हुई है। देश भर से आए करीब 2.5 लाख सुझावों को इसमें शामिल कर इसे तैयार किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भाषा एवं भारतीयता नई शिक्षा नीति की आत्मा है। यह विद्यार्थी केंद्रित एक ऐसा दस्तावेज है जो नए भारत के निर्माण में अपना योगदान देगा। नई शिक्षा नीति में नई सूचना तकनीक आधारित शिक्षा, शिक्षकों की नियुक्तियां, प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन, शोध की गुणवत्ता, विश्वविद्यालयों एवं शिक्षकों की स्वायत्तता सहित सभी विषयों पर प्रमुखता के साथ चर्चा की गई है। डीन एकेडमिक अफेयर प्रोफेसर मंजूला चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद इसे सही रूप में पाठ्यक्रम के माध्यम से लागू करना शिक्षकों की जिम्मेवारी है। हमारे भविष्य के पाठ्यक्रम कैसे हो, भविष्य में हम विद्यार्थियों को किस तरह के कौशल एवं रोजगार मिलेंगे इस बारे में शिक्षकों को विचार करना चाहिए। इस मौके पर फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा ने सभी का स्वागत किया।मंच का संचालन प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. अशोक कुमार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ संजीव शर्मा, प्रोफेसर एसपी सिंह, प्रोफेसर श्याम कुमार, प्रोफेसर एसएस बूरा सहित सभी डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद, रविंद्र नाथ टैगोर एवं महात्मा गांधी ने देश में जिस तरह की शिक्षा व्यवस्था की कल्पना की थी यह शिक्षा नीति बिल्कुल वैसी ही है। किसी भी देश में बड़ा बदलाव शिक्षा क्षेत्र के सहयोग के बिना संभव नहीं है। यह दस्तावेज आने वाले दो दशकों में भारत में बड़े बदलाव का कारण बनेगा। प्रो. शर्मा ने कहा कि इस दस्तावेज को बनाने के लिए लगभग पांच वर्ष तक गंभीर चर्चा हुई है। देश भर से आए करीब 2.5 लाख सुझावों को इसमें शामिल कर इसे तैयार किया गया है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भाषा एवं भारतीयता नई शिक्षा नीति की आत्मा है। यह विद्यार्थी केंद्रित एक ऐसा दस्तावेज है जो नए भारत के निर्माण में अपना योगदान देगा। नई शिक्षा नीति में नई सूचना तकनीक आधारित शिक्षा, शिक्षकों की नियुक्तियां, प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन, शोध की गुणवत्ता, विश्वविद्यालयों एवं शिक्षकों की स्वायत्तता सहित सभी विषयों पर प्रमुखता के साथ चर्चा की गई है। डीन एकेडमिक अफेयर प्रोफेसर मंजूला चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद इसे सही रूप में पाठ्यक्रम के माध्यम से लागू करना शिक्षकों की जिम्मेवारी है। हमारे भविष्य के पाठ्यक्रम कैसे हो, भविष्य में हम विद्यार्थियों को किस तरह के कौशल एवं रोजगार मिलेंगे इस बारे में शिक्षकों को विचार करना चाहिए। इस मौके पर फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर के निदेशक प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा ने सभी का स्वागत किया।मंच का संचालन प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. अशोक कुमार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ संजीव शर्मा, प्रोफेसर एसपी सिंह, प्रोफेसर श्याम कुमार, प्रोफेसर एसएस बूरा सहित सभी डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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