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प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक अनुसंधान की आवश्यकता : प्रो. चंद्र
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से शुक्रवार को ‘अणु और सामग्री प्रौद्योगिकी’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ राजस्थान के महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय भरतपुर के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र ने बतौर मुख्य अतिथि किया।
प्रो. रमेश चंद्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अंत:विषय परक अनुसंधान की प्रासंगिकता पर जोर दिया। साथ ही प्रतिभागियों और छात्रों को लीक से हटकर सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पदार्थ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक सहयोगी अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में आईओसीएल फरीदाबाद के उप-महाप्रबंधक व विशिष्ट अतिथि डॉ. गुरमीत सिंह ने राष्ट्र के विकास में रासायनिक उद्योग की भूमिका एवं विस्तृत उपयोगों के बारे में जानकारी दी।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी ने भविष्य के लिए स्मार्ट पदार्थों के उत्पादन एवं संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को स्थायी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रयास करने की सलाह दी और साथ ही छात्रों से उन तकनीकों पर काम करने का आग्रह किया जोकि प्रकृति को संरक्षित करने में मदद करेंगी।
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सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि प्रो. रमेश चंद्र और संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी की ओर से सार-पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
संस्थान के प्रवक्ता प्रो. विकास मित्तल ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विदेशों के साथ-साथ देशभर की आईआईटी, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, अनुसंधान एवं विकास संगठनों, उद्योग के विशेषज्ञों से बातचीत आमंत्रित की जाएगी। इस सम्मेलन में 200 से अधिक शोधकर्ता मौखिक और पोस्टर सत्रों में अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। इस मौके पर डॉ. जेके कपूर, डॉ. घुले विकास डी., डॉ. राम कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।
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प्रो. रमेश चंद्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अंत:विषय परक अनुसंधान की प्रासंगिकता पर जोर दिया। साथ ही प्रतिभागियों और छात्रों को लीक से हटकर सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पदार्थ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक सहयोगी अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में आईओसीएल फरीदाबाद के उप-महाप्रबंधक व विशिष्ट अतिथि डॉ. गुरमीत सिंह ने राष्ट्र के विकास में रासायनिक उद्योग की भूमिका एवं विस्तृत उपयोगों के बारे में जानकारी दी।
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सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी ने भविष्य के लिए स्मार्ट पदार्थों के उत्पादन एवं संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को स्थायी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रयास करने की सलाह दी और साथ ही छात्रों से उन तकनीकों पर काम करने का आग्रह किया जोकि प्रकृति को संरक्षित करने में मदद करेंगी।
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सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि प्रो. रमेश चंद्र और संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमणा रेड्डी की ओर से सार-पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
संस्थान के प्रवक्ता प्रो. विकास मित्तल ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विदेशों के साथ-साथ देशभर की आईआईटी, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, अनुसंधान एवं विकास संगठनों, उद्योग के विशेषज्ञों से बातचीत आमंत्रित की जाएगी। इस सम्मेलन में 200 से अधिक शोधकर्ता मौखिक और पोस्टर सत्रों में अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। इस मौके पर डॉ. जेके कपूर, डॉ. घुले विकास डी., डॉ. राम कुमार सहित अन्य मौजूद रहे।