फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   NDRI develops artificial stomach, allowing tests to be conducted without causing pain to the animal

Kurukshetra News: एनडीआरआई ने विकसित किया कृत्रिम पेट, पशु को दर्द पहुंचाए बिना हो सकेगी जांच

Sat, 15 Nov 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Sat, 15 Nov 2025 01:24 AM IST
विज्ञापन
NDRI develops artificial stomach, allowing tests to be conducted without causing pain to the animal
देव शर्मा
विज्ञापन

करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के वैज्ञानिकों ने पशुओं के पेट में चारे के के पाचन की प्रक्रिया और उससे बनने वाले पोषक तत्वों के साथ मिथेन जैसी गैसों के बनने की स्थिति को समझने के लिए कृत्रिम पेट (मशीन) तैयार किया है। इससे अब पशुओं के पेट में छेद करके चारे (दाना) के पाचन की प्रक्रिया जानने से निजात मिल जाएगी। पशुओं के लिए यह प्रक्रिया बहुत कष्टप्रद होती है।
एनडीआरआई के पशुपोषण विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रमन मलिक ने बताया कि अधिकतर बीमारियां व अन्य समस्याएं पेट से बनती हैं। खास बात ये है कि अन्य प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ पशुओं से भी मीथेन गैस बनती है, जो स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाती है। पशुओं के स्वास्थ्य के लिए यह जानकारी होना बेहद आवश्यक है कि उसके पेट में जो चारा जाता है, वह पचता कैसे है, पचने के दौरान या उसके बाद उससे क्या-क्या पोषक तत्व बनते हैं, मीथेन या अन्य गैसें कैसे बनती हैं।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि जांच तो पहले भी की जाती है लेकिन इसके लिए पशु को दर्दभरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पशु में चार पेट होते हैं, सबसे बड़ा रूमेन होता है। अभी तक इसी रूमेन में छेद करके चारे को थैली में डालकर पेट में डाला जाता है। इसी को कुछ समय बाद बाहर निकालकर जांच की जाती है कि कितनी देर में कितना पचा। उसी के आधार पर संपूर्ण पाचन का अनुमान लगाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर निदेशक डॉ. धीर सिंह के निर्देशन में कंटीन्यूअस रूमेन बायोरिएक्टर (सीआरबी) तैयार किया है। इसे कृत्रिम पेट कहा जाता है। इसमें पशु के पेट जैसी ही स्थिति है, अब चारे को पशु के पेट में डालने के बजाय सीआरबी में डालकर पाचन प्रक्रिया को देखा जा सकेगा।

---
- पहले एक पशु में एक बार में एक नमूने पर काम होता था लेकिन इसमें एकसाथ 30 से 35 नमूने भी लगाकर जांच की जा सकेगी। इससे पता लगेगा कि चारा जाने के बाद पेट में क्या होता है, वोलेटाइल फैटी एसिड (वीएफए) बनता है, कितना प्रोटीन, एसिडिटी (पीएच), कौन-कौन सी गैस बनती हैं। इस पर आगे शोध किए जा सकेंगे। विकसित किए गए सीआरबी से कई प्रयोग बिना पशु को कोई दर्द दिए हो सकेंगे। -डॉ. रमन मलिक, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख पशुपोषण, एनडीआरआई
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed