फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Namo sank Chairs wave

नमो की लहर में डूब गई अध्यक्षों की लुटिया

Sun, 18 May 2014 12:19 AM IST
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 18 May 2014 12:19 AM IST
विज्ञापन
कुुरुक्षेत्र। नमो की लहर में हरियाणा में सत्तारूढ़ कांग्रेस सहित सभी दलों के प्रमुखों की लुटिया डूब गई। इनमें सबसे बुरा हश्र कांग्रेस के साथ हो रहा है,  जिसके प्रदेशाध्यक्षों की हार का सिलसिला जारी है।
विज्ञापन


लगातार दो हार सत्तारूढ़ कांग्रेस के जनाधार का ग्राफ नीचे की ओर खींच रहा है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी को जीत नहीं दिला सके, वहीं उनसे पूर्व के प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना भी 2009 में मुलाना से चुनाव हार चुके हैं।
विज्ञापन


विधानसभा चुनाव-2014 से पहले सत्तारुढ़ कांग्रेस के लिए ये दोनों मामले चिंता और चिंतन का विषय है। इधर कांग्रेस के विपक्षी दल इनेलो और हजकां के अध्यक्षों लिए भी वातावरण माकूल नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनेलो की दुकान बंद कराने के दावों के साथ हिसार सीट हारने पर राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर चुके हजकां सुप्रीमो भी पराजित हो गए। हालांकि अपने गृहक्षेत्र से पराजित होने के बाद हजकां सुप्रीमो बिश्नोई ने नतीजों के तुरंत बाद 16 मई को इस्तीफा दे दिया।

हरियाणा में दो सीटों पर चुनाव लड़ने वाली हजकां प्रदेश में दोनों सीटों पर हार चुकी है, वहीं 10 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ रही इनेलो, भले दो सीटों पर जीत का झंडा लहराने में कामयाब हुई है।

हरियाणा में जल्द होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो के लिए चिंता का विषय प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा की परफॉर्मेंस है।

जाहिर है कि प्रदेशाध्यक्ष अरोड़ा के गृहक्षेत्र में इस बार भी इनेलो ने अपनी सीट गंवा दी। हालांकि परंपरागत रूप से यह सीट इनेलो की मानी जाती रही है।

मगर इस सीट पर 2004 में अभय चौटाला, 2009 में खुद इनेलो प्रदेशाध्यक्ष और 2014 में पार्टी उपाध्यक्ष हार गए, जबकि वर्तमान में इस लोकसभा क्षेत्र में इनेलो के पांच विधायक हैं।

बावजूद अरोड़ा जिस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, वहां भी इनेलो के लोकसभा प्रत्याशी को करारी शिकस्त मिली। हालांकि इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला, अजय चौटाला और शेर सिंह बड़शामी के जेल जाने के बाद पार्टी का जिम्मा प्रदेशाध्यक्ष अरोड़ा के कंधों पर है।

इस लोकसभा चुनाव में वे इनेलो के स्टार प्रचारक थे। लिहाजा जहां उनके खाते में यह हार जुड़ रही है, वहीं उपलब्धि के रूप में 15 साल बाद पहली बार मिली लोकसभा की दो सीटें भी इनेलो को हासिल हुई। गौरतलब है कि 1999 के बाद इनेलो 16 मई को दूसरा मौका आया, जब इनेलो के दो प्रत्याशी संसद की सीढ़ियां चढ़ेंगे।

देश में 16वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कई इतिहास गढ़ दिए और हरियाणा भी इससे अछूता नहीं रहा। एक और जहां पहली बार भाजपा के सात कमल खिलकर 16वीं लोकसभा में सजने जा रहे हैं। अब राज्य के अगले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ऐसा ही इतिहास बनाने जुगत में है।

लोकसभा की चुनावी जंग के बाद अब विधानसभा की महाभारत लड़ने के  लिए व्यूह रचना बनना शुरू होगी, लेकिन रणनीति बनाने के साथ-साथ उन अब पहलुओं पर भी चिंतन शुरू हो चुका है, जिस कारण हार-जीत हुई।


बहुजन संदेश पार्टी की अध्यक्ष कांता आलड़िया ने कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जमानत बचाना तो दूर वह सम्मान जनक वोट भी हासिल नहीं कर सकी। इस चुनाव में आलड़िया को महज 1534 वोट हासिल हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed