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मास्टर प्लान 2041 : बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बना दिए सेक्टर
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कुरुक्षेत्र। शहर की वर्ष 2041 में 10 लाख 13 हजार आबादी पहुंचने की संभावना है। इसके मद्देनजर तैयार किए गए अपने ही मास्टर प्लान में जिला प्रशासन उलझ गया है। मास्टर प्लान में दो सेक्टरों को ऐसे एरिया में बसाने की तैयारी कर दी गई है, जो बाढ़ग्रस्त रहा है। संबंधित अधिकारी इस क्षेत्र को बाढ़ग्रस्त मानते हुए आपत्ति जता चुके हैं। ऐसे में पत्राचार के दौर के साथ-साथ अब प्रशासनिक अधिकारियों को मास्टर प्लान पर माथापच्ची करनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि इस प्लान में रिंग रोड व बाईपास का प्रावधान न होने का मुद्दा विपक्ष लगातार उठा रहा है। ऐसे में अब मास्टर प्लान पर और भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं आम लोग भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में रिहायशी सेक्टर बनाए जाने के प्रस्ताव पर चकित हैं। इस बावत अधिकारियों का कहना है कि अभी इस प्लान को जिला स्तर पर ही मंजूरी मिली है जबकि इसे सरकार से मंजूरी उपरांत अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाना है, जिसमें फिलहाल लंबा समय लगेगा। इसके साथ ही आपत्तियां भी ली जाती रहेंगी लेकिन अंतिम निर्णय प्रदेश सरकार द्वारा ही लिया जाना है।
उत्तर पश्चिमी छोर की ओर का क्षेत्र माना जाता है बाढ़ग्रस्त : शहर के उत्तर पश्चिमी छोर की ओर के एरिया को बाढ़ग्रस्त माना जाता है। इसमें शहर के नजदीकी गांव नरकातारी, बाहरी, जोगनाखेड़ा, गुलाबगढ़ व आसपास का एरिया आता है। जहां वर्ष 2011 में एसवाईएल टूटने से पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था वहीं शहर का भी इस ओर का अधिकतर हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था।
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वर्ष 2023 में भी यह पूरा एरिया बाढ़ ग्रस्त रहा। शहर के बाहरी ओर इस एरिया में बसी आधा दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां भी बाढ़ की चपेट में रही थीं। अब प्रशासन ने नए मास्टर प्लान में उक्त एरिया में ही दो नए सेक्टर बसाने की योजना तैयार की है।
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गौरतलब है कि इस प्लान में रिंग रोड व बाईपास का प्रावधान न होने का मुद्दा विपक्ष लगातार उठा रहा है। ऐसे में अब मास्टर प्लान पर और भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं आम लोग भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में रिहायशी सेक्टर बनाए जाने के प्रस्ताव पर चकित हैं। इस बावत अधिकारियों का कहना है कि अभी इस प्लान को जिला स्तर पर ही मंजूरी मिली है जबकि इसे सरकार से मंजूरी उपरांत अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाना है, जिसमें फिलहाल लंबा समय लगेगा। इसके साथ ही आपत्तियां भी ली जाती रहेंगी लेकिन अंतिम निर्णय प्रदेश सरकार द्वारा ही लिया जाना है।
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उत्तर पश्चिमी छोर की ओर का क्षेत्र माना जाता है बाढ़ग्रस्त : शहर के उत्तर पश्चिमी छोर की ओर के एरिया को बाढ़ग्रस्त माना जाता है। इसमें शहर के नजदीकी गांव नरकातारी, बाहरी, जोगनाखेड़ा, गुलाबगढ़ व आसपास का एरिया आता है। जहां वर्ष 2011 में एसवाईएल टूटने से पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था वहीं शहर का भी इस ओर का अधिकतर हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था।
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वर्ष 2023 में भी यह पूरा एरिया बाढ़ ग्रस्त रहा। शहर के बाहरी ओर इस एरिया में बसी आधा दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां भी बाढ़ की चपेट में रही थीं। अब प्रशासन ने नए मास्टर प्लान में उक्त एरिया में ही दो नए सेक्टर बसाने की योजना तैयार की है।