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Kurukshetra News: नदी का आकार सिकुड़ने से कहर बरपा रही मारकंडा
Sat, 23 Aug 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:44 AM IST
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सेवा सिंह
कुरुक्षेत्र। दशकों से खोदाई न होने मारकंडा नदी की चौड़ाई घट गई है। जिससे इसका आकार सिकुड़ गया है। तटबंध भी स्थाई नहीं। न सरकार ठोस कदम उठा पा रही तो न हीं किसान स्थाई समाधान के लिए उम्मीद अनुसार आगे आ रहे। अधिकारी सिर्फ बेबसी ही जताते रहे। ऐसे में मारकंडा नदी के रौद्र रूप के कारण जिले की हजारों एकड़ फसल खराब हो रही है।
इस बार फिर मारकंडा ने कहर बरपाया तो हर कोई त्रस्त हो उठा। स्थायी समाधान की मांग उठी तो हर बार की तरह इस बार भी आश्वासन मिला है। योजना सिरे चढ़ पाएगीया नहीं, यह समय आने पर ही पता चल पाएगा। जानकारी के अनुसार मारकंडा ने अपना सबसे गंभीर रौद्र रूप वर्ष 1978 में उस समय दिखाया था।
करीब 70 हजार क्यूसेक तक पानी नदी में बहने लगा था। उस समय झेले गए बाढ़ के मंजर को लोग आज भी नहीं भूले हैं। वर्ष 2023 में भी मारकंडा की बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया था। यहां तक कि चार लोगों की जान भी गई। इस बार फिर मारकंडा की मार से हजारों एकड़ फसल बर्बाद तो सड़कें खस्ताहाल हो गई। अभी भी लोग इस कहर को झेल रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो समय-समय पर मारकंडा के इस रूप को देख मानसून सीजन आते ही बाढ़ का डर बैठने लगता है। इसमें आने वाले पानी के बहाव के लिए कम से कम 500 फीट की चौड़ाई चाहिए वहीं अनेक जगह पक्के निर्माण तक बन गए हैं। संवाद
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कुरुक्षेत्र। दशकों से खोदाई न होने मारकंडा नदी की चौड़ाई घट गई है। जिससे इसका आकार सिकुड़ गया है। तटबंध भी स्थाई नहीं। न सरकार ठोस कदम उठा पा रही तो न हीं किसान स्थाई समाधान के लिए उम्मीद अनुसार आगे आ रहे। अधिकारी सिर्फ बेबसी ही जताते रहे। ऐसे में मारकंडा नदी के रौद्र रूप के कारण जिले की हजारों एकड़ फसल खराब हो रही है।
इस बार फिर मारकंडा ने कहर बरपाया तो हर कोई त्रस्त हो उठा। स्थायी समाधान की मांग उठी तो हर बार की तरह इस बार भी आश्वासन मिला है। योजना सिरे चढ़ पाएगीया नहीं, यह समय आने पर ही पता चल पाएगा। जानकारी के अनुसार मारकंडा ने अपना सबसे गंभीर रौद्र रूप वर्ष 1978 में उस समय दिखाया था।
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करीब 70 हजार क्यूसेक तक पानी नदी में बहने लगा था। उस समय झेले गए बाढ़ के मंजर को लोग आज भी नहीं भूले हैं। वर्ष 2023 में भी मारकंडा की बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया था। यहां तक कि चार लोगों की जान भी गई। इस बार फिर मारकंडा की मार से हजारों एकड़ फसल बर्बाद तो सड़कें खस्ताहाल हो गई। अभी भी लोग इस कहर को झेल रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो समय-समय पर मारकंडा के इस रूप को देख मानसून सीजन आते ही बाढ़ का डर बैठने लगता है। इसमें आने वाले पानी के बहाव के लिए कम से कम 500 फीट की चौड़ाई चाहिए वहीं अनेक जगह पक्के निर्माण तक बन गए हैं। संवाद
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