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Kurukshetra News: मोटरसाइकिल चोरी मामले में दो किशोरों को जेजेबी ने किया बरी, मुख्य गवाह नहीं पहुंचा
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कुरुक्षेत्र। प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) सरवप्रीत कौर की अदालत ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में दो किशोरों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
मामला शाहाबाद थाने के अंतर्गत दर्ज एफआईआर से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 29 सितंबर 2024 को दोपहर करीब 6:40 बजे शिकायतकर्ता राजिंदर कुमार ने मारकंडा मंदिर की पार्किंग में अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की और मंदिर में चले गए। 10 से 15 मिनट बाद बाहर आए तो बाइक गायब थी। उन्होंने चोरी की शिकायत दर्ज कराई।
प्रारंभिक जांच में कोई सुराग नहीं मिला और 8 नवंबर 2024 को अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की गई। बाद में 9 जून 2025 को गुप्त सूचना पर एक नाबालिग को शाहाबाद के बराड़ा रोड पर बिना नंबर प्लेट वाली चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया। बाइक के टूल बॉक्स से आरसी बरामद हुई जिस पर मालिक का नाम राजिंदर कुमार दर्ज था। नाबालिग की बयान पर दूसरे नाबालिग को भी गिरफ्तार किया गया।
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जेजेबी में अभियोजन ने कुल चार गवाह पेश किए। मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता राजिंदर कुमार बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति से अभियोजन का आधार ही कमजोर हो गया है। मुख्य गवाह के अभाव में शिकायत के तथ्य साबित नहीं हो सके। परिणामस्वरूप बोर्ड ने अभियोजन पक्ष को साबित करने में विफल मानते हुए दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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मामला शाहाबाद थाने के अंतर्गत दर्ज एफआईआर से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 29 सितंबर 2024 को दोपहर करीब 6:40 बजे शिकायतकर्ता राजिंदर कुमार ने मारकंडा मंदिर की पार्किंग में अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की और मंदिर में चले गए। 10 से 15 मिनट बाद बाहर आए तो बाइक गायब थी। उन्होंने चोरी की शिकायत दर्ज कराई।
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प्रारंभिक जांच में कोई सुराग नहीं मिला और 8 नवंबर 2024 को अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की गई। बाद में 9 जून 2025 को गुप्त सूचना पर एक नाबालिग को शाहाबाद के बराड़ा रोड पर बिना नंबर प्लेट वाली चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया। बाइक के टूल बॉक्स से आरसी बरामद हुई जिस पर मालिक का नाम राजिंदर कुमार दर्ज था। नाबालिग की बयान पर दूसरे नाबालिग को भी गिरफ्तार किया गया।
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जेजेबी में अभियोजन ने कुल चार गवाह पेश किए। मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता राजिंदर कुमार बार-बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की गैर-उपस्थिति से अभियोजन का आधार ही कमजोर हो गया है। मुख्य गवाह के अभाव में शिकायत के तथ्य साबित नहीं हो सके। परिणामस्वरूप बोर्ड ने अभियोजन पक्ष को साबित करने में विफल मानते हुए दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।