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जिले में अब जापानी बुखार ने दी दस्तक
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 15 Sep 2015 12:36 AM IST
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डेंगू के लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग की परेशानियाें में जापानी बुखार ने इजाफा कर दिया है।
जिले में डेंगू के बाद अब जापानी बुखार ने भी दस्तक दे दी है। जिले में डेंगू के 32 पॉजीटिव मरीज मिल चुके हैं। अब जिले में जापानी बुखार के भी दो पॉजीटिव केस सामने आ गए हैं। इससे पहले मलेरिया ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा ही रखी है।
जिले में कुल मिलाकर मलेरिया के 154 केस सामने आ चुके हैं। डेंगू, मलेरिया और जापानी बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुद ब खुद सामने आ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग अभी कह रहा है कि इन बीमारियों की रोकथाम के लिए वह जागरूकता अभियान चला रहा है।
बिगड़े हुए हालात के लिए वह नगर निकायों और पंचायतों के असहयोग को भी जिम्मेदार ठहरा रहा है।
जिले में जापानी बुखार और डेंगू पिछले सालों के मुकाबले इस बार कई गुना तेजी से बढ़ रहा है। पिछले वर्ष जिले में एक भी व्यक्ति जापानी बुखार का पीड़ित नहीं था, लेकिन इस बार अभी तक जापानी बुखार के दो केस सामने आ चुके है।
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वहीं पिछले साल डेंगू के महज 6 केस मिले थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक 32 केस डेंगू के मिल चुके है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमें इस बार नगर परिषद, पंचायतों से पुरी तरह से सहयोग नहीं मिला। फॉगिंग करने की जम्मेदारी हमारी है, लेकिन उसके लिए पेट्रोल खर्च नगर परिषद और पंचायतों का काम है।
यह इस बार नहीं मिला है। ये भी इस समस्या का मुख्य कारण माना जा रहा है।
थानेसर में मिले मरीज
जापानी बुखार के दोनों मरीज थानेसर ब्लॉक के ही है। गांव बजगांवा गामड़ी की बुर्जुग महिला और गांव मुंडा खेड़ा के 45 वर्षीय पुरुष को जापानी बुखार हुआ है।
इनमें पुरुष मरीज की गंभीर हालत के चलते पीजीआई चंडीगढ़ रैफर कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी तक 32 केस डेंगू के मिल चुके हैं। इनमें अधिकतर गुड़गांव, दिल्ली और सोनीपत में काम या पढ़ाई कर रहे हैं।
इसलिए यह क्षेत्र है प्रभावित
जापानी बुखार अधिकतम धान वाले क्षेत्र में ही होता है, क्योंकि धान में इसका मच्छर आसानी से बढ़ता है। ये रोग अधिकतर कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल और करनाल के क्षेत्रों में मिलता है।
डेंगू के केस
वर्ष केस
2013 59 केस
2014 06 केस
2015 32 केस
जापानी बुखार के केस
वर्ष केस
2013 01 केस
2014 00 केस
2015 02 केस (अभी तक)
धान में पलता है मच्छर
रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव चावला ने बताया कि जापानी बुखार को जैपनीज इनसेफ्लाइटिस (जेई) के नाम से भी जाना जाता है। यह मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर धान वाले क्षेत्रों में सबसे अधिक होता है।
लक्षण
जापानी बुखार में मरीज के शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ये दिमाग पर असर करता है। इसलिए इसे दिमागी बुखार भी कहते है।
इस कारण मरीज पागलों जैसी हरकतें भी करने लग जाता है। उसे सिर में दर्द, गले में दर्द और दौरे आने लगते है। धिक हालत बिगड़ने पर मरीज कोमा में चला जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
बचाव
-मच्छरों से बचाव करना
-पानी को इकट्ठा न होने दें
-इक्ट्ठे हुए पानी में तेल डालें
- मच्छरदानी का प्रयोग करना
-घरों में मच्छरों से बचाव के लिए दवाई छिड़कें
जिले में डेंगू के 32 केस मिले है। इसके साथ ही दो केस जापानी बुखार के भी मिले हैं। विभाग इस समस्या से निपटने के लिए तैयार है। विभाग ने कई टीमों का गठन किया हुआ है। वह जगह-जगह जाकर लारवा चेक कर रहे हैं।
डॉ. केके शर्मा, कार्यवाहक सीएमओ
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जिले में डेंगू के बाद अब जापानी बुखार ने भी दस्तक दे दी है। जिले में डेंगू के 32 पॉजीटिव मरीज मिल चुके हैं। अब जिले में जापानी बुखार के भी दो पॉजीटिव केस सामने आ गए हैं। इससे पहले मलेरिया ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा ही रखी है।
जिले में कुल मिलाकर मलेरिया के 154 केस सामने आ चुके हैं। डेंगू, मलेरिया और जापानी बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुद ब खुद सामने आ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग अभी कह रहा है कि इन बीमारियों की रोकथाम के लिए वह जागरूकता अभियान चला रहा है।
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बिगड़े हुए हालात के लिए वह नगर निकायों और पंचायतों के असहयोग को भी जिम्मेदार ठहरा रहा है।
जिले में जापानी बुखार और डेंगू पिछले सालों के मुकाबले इस बार कई गुना तेजी से बढ़ रहा है। पिछले वर्ष जिले में एक भी व्यक्ति जापानी बुखार का पीड़ित नहीं था, लेकिन इस बार अभी तक जापानी बुखार के दो केस सामने आ चुके है।
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वहीं पिछले साल डेंगू के महज 6 केस मिले थे, लेकिन इस वर्ष अभी तक 32 केस डेंगू के मिल चुके है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हमें इस बार नगर परिषद, पंचायतों से पुरी तरह से सहयोग नहीं मिला। फॉगिंग करने की जम्मेदारी हमारी है, लेकिन उसके लिए पेट्रोल खर्च नगर परिषद और पंचायतों का काम है।
यह इस बार नहीं मिला है। ये भी इस समस्या का मुख्य कारण माना जा रहा है।
थानेसर में मिले मरीज
जापानी बुखार के दोनों मरीज थानेसर ब्लॉक के ही है। गांव बजगांवा गामड़ी की बुर्जुग महिला और गांव मुंडा खेड़ा के 45 वर्षीय पुरुष को जापानी बुखार हुआ है।
इनमें पुरुष मरीज की गंभीर हालत के चलते पीजीआई चंडीगढ़ रैफर कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी तक 32 केस डेंगू के मिल चुके हैं। इनमें अधिकतर गुड़गांव, दिल्ली और सोनीपत में काम या पढ़ाई कर रहे हैं।
इसलिए यह क्षेत्र है प्रभावित
जापानी बुखार अधिकतम धान वाले क्षेत्र में ही होता है, क्योंकि धान में इसका मच्छर आसानी से बढ़ता है। ये रोग अधिकतर कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल और करनाल के क्षेत्रों में मिलता है।
डेंगू के केस
वर्ष केस
2013 59 केस
2014 06 केस
2015 32 केस
जापानी बुखार के केस
वर्ष केस
2013 01 केस
2014 00 केस
2015 02 केस (अभी तक)
धान में पलता है मच्छर
रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव चावला ने बताया कि जापानी बुखार को जैपनीज इनसेफ्लाइटिस (जेई) के नाम से भी जाना जाता है। यह मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर धान वाले क्षेत्रों में सबसे अधिक होता है।
लक्षण
जापानी बुखार में मरीज के शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ये दिमाग पर असर करता है। इसलिए इसे दिमागी बुखार भी कहते है।
इस कारण मरीज पागलों जैसी हरकतें भी करने लग जाता है। उसे सिर में दर्द, गले में दर्द और दौरे आने लगते है। धिक हालत बिगड़ने पर मरीज कोमा में चला जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
बचाव
-मच्छरों से बचाव करना
-पानी को इकट्ठा न होने दें
-इक्ट्ठे हुए पानी में तेल डालें
- मच्छरदानी का प्रयोग करना
-घरों में मच्छरों से बचाव के लिए दवाई छिड़कें
जिले में डेंगू के 32 केस मिले है। इसके साथ ही दो केस जापानी बुखार के भी मिले हैं। विभाग इस समस्या से निपटने के लिए तैयार है। विभाग ने कई टीमों का गठन किया हुआ है। वह जगह-जगह जाकर लारवा चेक कर रहे हैं।
डॉ. केके शर्मा, कार्यवाहक सीएमओ