Kurukshetra: कुरुक्षेत्र पहुंचे जगदीश झींडा, कहा-मेरी कमेटी सरकारी कमेटी से बड़ी, सम्मान नहीं कम होने दूंगा
जगदीश झींडा ने कहा कि सरकारी कमेटी में 38 तो उनकी कमेटी में 41 सदस्य है। वे चाहते हैं कि दोनों ही कमेटी के सदस्यों को सिख एक नजर से देखें और दोनों कमेटी का सम्मान बना रहे। इसके लिए वे अपनी कमेटी के एक-एक सदस्य को मनाने के लिए तैयार है।
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हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के लिए संघर्ष करते रहे जगदीश सिंह झींडा सोमवार को कुरुक्षेत्र में गुरुद्वारा छठी पातशाही पहुंचे। यहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश की अलग कमेटी के विरोध में एसजीपीसी की ओर से लगाई गई पुनर्विचार याचिका रद्द कर दिए जाने के बाद बने माहौल पर अपनी कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की। इसके बाद पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि प्रदेश के सिखों को एकजुट करने के लिए मैं कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हूं। गेंद सरकारी कमेटी के प्रधान बाबा कर्मजीत सिंह के पाले में हैं। अब आगे उन्हें कदम बढ़ाना चाहिए। मैं हर समझौते के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरी कमेटी सरकारी कमेटी से बड़ी है और अपनी कमेटी का सम्मान भी नहीं कम होने दूंगा।
झींडा ने कहा कि वे यमुनानगर में एक शादी समारोह में बाबा कर्मजीत सिंह से मिले थे और उन्होंने बाबा कर्मजीत को ऑफर दी थी कि वे प्रदेश के सिखों को एकजुट करना चाहते हैं, इसके लिए वे कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है। इस पर बाबा कर्मजीत का रुख भी सकारात्मक रहा। अब बाबा कर्मजीत सिंह की ओर से अगला कदम उठाने की इंतजार है। जिसके बाद एक बार फिर कमेटी के सभी सदस्यों के साथ बैठक की जाएगी और अपनी कमेटी का मान सम्मान बरकरार रखने के लिए सरकारी कमेटी के साथ सहमति को लेकर एक ड्राफ्ट भी तैयार किया जाएगा।
झींडा ने कहा कि सरकारी कमेटी में 38 तो उनकी कमेटी में 41 सदस्य है। वे चाहते हैं कि दोनों ही कमेटी के सदस्यों को सिख एक नजर से देखें और दोनों कमेटी का सम्मान बना रहे। इसके लिए वे अपनी कमेटी के एक-एक सदस्य को मनाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखी थी पेशकश
झींडा ने बताया कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी हुई थी और उनके सामने भी सिखों को एकजुट करने का प्रस्ताव रखा था। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि गुरुघरों का प्रबंधन तो सरकारी कमेटी ही संभालेगी, लेकिन सिखों को एक होना चाहिए। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष पहल करते हुए प्रस्ताव भी रखा, जिसके बाद उन्होंने बाबा कर्मजीत के साथ शादी समारोह में मुलाकात के दौरान विस्तार से चर्चा की।
सिख बंदी छुड़ाने के लिए चलाएंगे जेल भरो आंदोलन
झींडा ने कहा कि संगीन मामलों में घिरे बाबा गुरमीत सिंह को बार-बार छूट दी जा रही है जबकि सजा पूरी करने के बाद भी अनेकों सिख जेलों में बंद है। इसके जिम्मेदार बादल परिवार व अकाली ही है। बादल ने ही बाबा गुरमीत को माफी दिलाई थी, लेकिन न बादल और न ही गुरमीत सिंह ने सिखों के लिए आज तक कुछ किया है जबकि सिखों ने देश के लिए अनेकों कुर्बानी दी। उच्चतम न्यायालय ने बंदी सिखों के फैसले पर उम्रकैद मृत्यु तक लिखा है, जिसे हटवाने के लिए जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर कानून में संशोधन कर बंदी सिखों को रिहा करने की मांग की जाएगी। सरकार ने यह मांग जल्द नहीं मानी तो जेलभरो आंदोलन हर जिला स्तर पर चलाया जाएगा।