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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव : पर्यटकों ने चखा सहभागी प्रदेश ओडिशा के व्यंजनों का स्वाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Dec 2024 02:14 AM IST
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International Gita Mahotsav: Tourists tasted the cuisine of participating state Odisha
कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर गीता जयंती की छटा देखते ही बन रही है। शिल्पकला और हस्तकला पर्यटकों को बेहद पसंद आ रही है। लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसके साथ ही सहभागी प्रदेश का ओडिशा पवेलियन भी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। यह पर लोगों को ओडिशा की सभ्यता से रूबरू होने और उनकी संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। इससे दोनों प्रदेशों का आपसी तालमेल बढ़ रहा है।
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महोत्सव में आए पर्यटकों को ओडिशा के व्यंजनों का स्वाद भी खूब पसंद आ रहा है। पवेलियन में वहां के मशहूर व्यंजनों की स्टॉल लगाई गई है, जिनको लोग चाव से खा रहे हैं और उनके व्यंजनों की प्रशंसा भी हो रही है। स्टॉल के संचालक शरवेश्वर दास और अरमान देबते ने बताया कि उनकी स्टॉल पर कुल 21 व्यंजन हैं, जिनमें उनके ओडिशा की कई मशहूर मिठाइयां भी शामिल है। पर्यटक उनके व्यंजनों को लेकर रुचि दिखा रहे हैं और जमकर उनका स्वाद चख रहे हैं। दही वडा, छेना पूडो, अंडूरा, रसमलाई लोगों को बेहद पसंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गीता महोत्सव का नजारा उनको बेहद पसंद आ रहा है। उन्होंने हरियाणा पवेलियन का अवलोकन किया है। यहां आने से उनको हरियाणा की संस्कृति और सभ्यता की पहचान हो रही है। लोगों से बातचीत करने पर उन्हें अपनेपन का एहसास हो रहा है।
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पवेलियन में मौजूद ओडिशा के मशहूर व्यंजन

ओडिशा पवेलियन में वहां की संस्कृति और सभ्यता के अलावा पर्यटकों को मशहूर व्यंजन भी चखने को मिले। स्टॉल पर ओडिशा की मशहूर मिठाई छेना गागा, रसभाली, छेना खीरी लोगों को बेहद पसंद आई। इसके अलावा नमकीन में बाराघुनानी, पूरी आलू कसा, चखुली डालमा, आलू दम भी लोगों ने खूब खाया साथ ही पीथा में अंडूरी, मोंडा पीथा, चखुली अरिसा भी स्टॉल पर देखने को मिला।
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महोत्सव में स्थापित हरियाणवी पवेलियन में मची हरियाणवी संस्कृति की धूम

संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। महोत्सव में हरियाणा पवेलियन में हरियाणवी संस्कृति की धूम मची है, जहां रविवार को भी हरियाणा लोक गायन की विभिन्न शैलियां एवं हरियाणवी संस्कृति के विभिन्न आयाम को हरियाणवी लोक कलाकारों ने अपने गीतों एवं नृत्य के द्वारा अवगत करवाया। पुरुषोत्तम पुरा बाग ब्रह्मसरोवर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों (हरियाणा कला परिषद) का आयोजन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग कुवि के द्वारा आयोजित करवाया जा रहा है।

हरियाणवी सांस्कृतिक मंच पर आयोजित कार्यक्रम में हो रहे हरियाणा की लोक संस्कृति, भजन, रागनी संगीत, नृत्य दर्शकों का मन मोह रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय अवार्डी अंतरराष्ट्रीय गीत, भजन एवं गजल गायक दिलावर कौशिक आर्ट एंड कल्चर अफेयर हरियाणा द्वारा प्रस्तुत किए गए देखा है सब ग्रंथों में, उच्च स्थान गीता का...पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर आनंद लिया। इसी प्रकार उन्होंने भगवान रामचंद्र के जीवन पर आधारित गीतों एवं भजनों के अलावा गीता पर आधारित भजनों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया इस पर दर्शकों द्वारा इन कलाकारों की खूब प्रशंसा की।

मंडली सत्संग कुरुक्षेत्र के कलाकारों द्वारा गीता के 10 व 11 अध्याय के बारे में भजनों एवं गीतों के माध्यम से बताया। कलाकारों द्वारा गाए गए गीत गीता ज्ञान सुनाकर, बंदे परले पार उतर जा ने दर्शकों को भावविभोर कर उन्हें भक्ति रस में डुबो दिया। वहीं भजन गायिका सृष्टि ने अपनी मधुर वाणी से आजा नंद के दुलारे, अकेली रोवा मीरा इस धार्मिक गीत का भी श्रोताओं ने तालियों की गड़गडाहट के साथ गायिका का उत्साहवर्धन किया। हरियाणा पवेलियन के मंच पर हरियाणवी हास्य कलाकार रेणू दूहन ने अपने हरियाणवी चुटकुलों के माध्यम से लोगों का खूब मनोरंजन किया।



- स्वरोजगार करने वाले छोटे व्यापारियों के सपनों को पंख लगा रहा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव
- हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी दिखा रहीं हुनर
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में जहां विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार प्रमाणपत्र प्राप्त शिल्पकार अपनी शिल्पकला को प्रदर्शित कर रहे है, वहीं विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने-अपने छोटे-छोटे स्वरोजगार चलाने वाले समूहों ने भी अपने स्टॉलों को स्थापित किया हुआ है। जहां इनके सपनों को पंख लग रहे हैं। इन्हीं समूहों में से एक सरस्वती स्वयं सहायता समूह की उषा रानी ने ब्रह्मसरोवर के उतरी पश्चिमी छोर की तरफ अपना स्टॉल स्थापित किया है। इस स्टॉल पर उनके पति मदन लाल उनका सहयोग कर रहे हैं और उनके द्वारा राज्यस्तरीय प्रदर्शनी में भी एक स्टॉल स्थापित किया गया है।
अहम पहलू यह है कि यह महोत्सव छोटे-छोटे शिल्पकारों व स्वयं का रोजगार स्थापित करने वाले लघु उद्यमियों के लिए भी एक मुख्य मंच बनकर सामने आया है और इसके माध्यम से उनके व्यवसाय को खूब बढ़ावा मिल रहा है। महोत्सव में स्थापित किए गए एक स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के अचार और मुरब्बे मौजूद है। इस स्टॉल पर करीब 40 प्रकार के अचार और मुरब्बे उपलब्ध है। इसके साथ-साथ विशेष रूप से खजूर के गुड़ से बना मीठा अचार, अलसी के लड्डू, तेल में बना आम का अचार सहित कई प्रकार अचार व मुरब्बे उन्होंने महोत्सव में आने वाले पर्यटकों के लिए रखे है। देसी तरीके से बिना केमिकल का इस्तेमाल करके विभिन्न मसालों के माध्यम से यह आचार तैयार किया जाता है

उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ बेलपत्र, एप्पल, अमले, चेरी और गाजर के मुरब्बे, लहसुन अदरक की चटनी, आंवले की चटनी और आंवला कैंडी भी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। इन अचारों में स्वदेशी स्वाद है और ये पूरी तरह से शुद्ध और जैविक मसाले का उपयोग करके बनते हैं, जिसमें कोई स्वाद वर्धक सामग्री नहीं है। इनमें कोई केमिकल नहीं है, जिसकी वजह से यह लंबे वक्त तक स्वादिष्ट रहते हैं। गांव संघौर की उषा रानी द्वारा अपने गांव में 32 ग्रुप बनाए है और ग्रुप की महिलाओं द्वारा अपना स्वरोजगार स्थापित किया गया है। सरकार द्वारा महोत्सव में निशुल्क स्टॉल उपलब्ध करवाया गया है।


हरियाणा महिला विकास निगम का स्टॉल कर रहा है घरेलू उत्पादों की बिक्री
कुरुक्षेत्र। महोत्सव में देश के विभिन्न प्रदेशों से आए शिल्पकारों एवं विभिन्न प्रकार के व्यवसाय करने वाले व्यक्तियों ने शिल्प व सरस मेला में विभिन्न प्रकार के सामान के स्टॉल लगाए हुए हैं। वहीं गीता महोत्सव में हरियाणा महिला विकास निगम की ओर संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा स्टॉल लगाए गए हैं, जिसमें ऊनी वस्त्र, सजावटी सामान सहित लकड़ी के बने घरेलू उत्पाद रखे गए हैं। महिला बाल विकास निगम की ओर से लगाए गए स्टॉल पर पूनम व प्रियंका ने बताया कि वे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वयं सामान तैयार करती है और हरियाणा सरकार की ओर से उन्हें स्वरोजगार चलाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि अन्य महिलाएं स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपना स्वरोजगार चला सकती है।
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