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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव संपन्न : खट्टी-मीठी यादें लेकर शिल्पकार रवाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:49 AM IST
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International Gita Mahotsav concludes: Craftsmen leave with sweet and sour memories
कुरुक्षेत्र। प्रस्तुति के इंतजार में बैठी फोन देखती पंजाब की कलाकार। संवाद
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव रविवार को संपन्न हो गया, जिसके साथ ही खट्टी-मिट्ठी यादों के साथ देशभर से आए शिल्पकार भी रवाना हो गए। 18 दिनों के दौरान भारी भीड़ पर्यटकों की उमड़ी रही, जिसके चलते खूब खरीदारी भी हुई। बेहतर कारोबार से जहां अनेक शिल्पकारों के चेहरे खिले रहे तो वहीं कई उम्मीद अनुसार कारोबार न होने पर मायूस भी दिखाई दिए। इसमें सबसे बड़ी बाधा इंटरनेट की गड़बड़ाई व्यवस्था रही जिसमें प्रशासन कोई खास सुधार नहीं कर पाया और ऑनलाइन भुगतान तो दूर कॉल व मैसेज तक रिसीव नहीं हो पाए।
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नेटवर्क जाम होने का सीधा असर सरस व शिल्प मेले में खरीदारी पर पड़ा, जिसके चलते शिल्पकार ही नहीं अनेक पर्यटक भी परेशानी झेलते रहे। हालांकि महोत्सव के दौरान तीन बार वीक एंंड होने के चलते आए शनिवार व रविवार के दिनों में पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ रही लेकिन अनेक शिल्पकारों का कहना था कि प्रत्येक वर्ष के मुकाबले इस बार कारोबार कमजोर रहा। वहीं अनेक शिल्पकार व पर्यटक चोरी व छीनाझपटी जैसी घटनाओं का शिकार हुए।
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दूसरे सप्ताह हुई अधिक बिक्री : मोहम्मद छोटू
स्टॉल नंबर 58 पर बिहार के भागलपुर से आए कारीगर मोहम्मद छोटू का कहना था कि उनकी स्टॉल पर भागलपुरी साडी, सूट, दुपट्टे सहित सूती और सिल्क के वस्त्र रखे गए थे। अंतिम दिन तक उनकी तीन से साढे तीन लाख रुपये तक की बिक्री हुई है, जिसमें दूसरे सप्ताह सबसे अधिक बिक्री हुई है। स्टॉल का किराया निकालकर उनकी बचत बेहद कम ही रही है। प्रत्येक वर्ष की तुलना में इस वर्ष सबसे कम मुनाफा हुआ है।
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इंटरनेट न चलने से कारोबार रहा प्रभावित : सज्जाद अहमद
जम्मू-कश्मीर से पश्मीना शॉल और ऊनी वस्त्र के विक्रेता सज्जाद अहमद ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें पहली बार यहां आने का मौका मिला है। उन्हें 2011 में पश्मीना कानी विविंग के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। महोत्सव में 18 दिन के दौरान उनकी अच्छी बिक्री हुई। यहां आने पर उन्हें इंटरनेट संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वह पहली बार यहां आने पर अपनी बिक्री से संतुष्ट है।



विदेशी पर्यटकों ने की खूब खरीद : पुष्पेंद्र साहू
महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हाथ से बनाई पेंटिंग के स्टॉल संचालक पुष्पेद्र साहू ने बताया कि वह राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ से आए है। उन्हें भी पहली बार सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में आने का अवसर प्राप्त हुआ। उनकी सारी पेंटिंग कपड़े पर हाथ से बनाई हुई है। हस्तनिर्मित होने के कारण इनकी कीमत ज्यादा होती है, जिस कारण स्थानीय लोगों द्वारा इनकी खरीद नहीं की गई लेकिन विदेशी पर्यटकों ने पेंटिंग की खूब खरीदारी की।



स्टॉल से चोरी हुए 13 पर्स, इंटरनेट समस्या बनी रही : पूजा
मेेले में महिलाओं को आकर्षित करने वाले गुजराती पर्स की स्टॉल भी मौजूद थी। स्टॉल संचालक पूजा का कहना है कि पिछले कई वर्ष से वह अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में स्टॉल लगा रही है और उनकी अच्छी बिक्री होती थी लेकिन इस साल काम बहुत कम है। उन्हें उम्मीद थी कि इस वर्ष काम में बढ़ोतरी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इंटरनेट न चलने की वजह से ऑनलाइन भुगतान नहीं हो रहा था, जिससे अनेक ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा। इसके अलावा उनकी स्टॉल से 13 पर्स चोरी हुए, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा साथ ही रात के समय सुरक्षा के खास इंतजाम न होने का भी खामियाजा भुगतना पड़ा।


इस साल बेहद कमजोर रहा काम : आमिर
यूपी से सहारनपुर के कारीगरों द्वारा 255 नंबर पर हस्तनिर्मित लकड़ी के सामान की स्टॉल स्थापित की गई। स्टॉल संचालक आमिर ने बताया कि वह कई वर्षों से यहां अपनी स्टॉल लगा रहे हैं। इस वर्ष उनका काम बेहद कम रहा है। उनके सामान की अधिक बिक्री नहीं हुई है। प्रत्येक वर्ष काम में बढ़ोतरी होती थी लेकिन इस वर्ष उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक मात्र 50 से 60 हजार तक की बिक्री हुई है साथ ही उनके सामान की भी चोरी हुई है, जिसका उन्हें बहुत देर बाद पता चला।




पूरे महोत्सव के दौरान अच्छी हुई बिक्री : नूर हक्की
महोत्सव में असम से आए कारीगर नूर हक्की का कहना है कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी उनकी अच्छी बिक्री हुई है। उनकी स्टॉल पर बांस की लकड़ी से बनी हस्तनिर्मित वस्तुएं मौजूद है, जो पर्यटकों को बेहद पसंद आ रही है। 18 दिनों में उन्होंने तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक के सामान की बिक्री की है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इंटरनेट बंद पर ऑनलाइन भुगतान न होने से उनके कारोबार पर विपरीत प्रभाव पड़ा लेकिन इसके बावजूद भी बिक्री ठीक हुई।

कुरुक्षेत्र। प्रस्तुति के इंतजार में बैठी फोन देखती पंजाब की कलाकार। संवाद

कुरुक्षेत्र। प्रस्तुति के इंतजार में बैठी फोन देखती पंजाब की कलाकार। संवाद

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