कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में जहां पर्यटक लोक संस्कृति और शिल्पकला का आनंद उठा रहे हैं वहीं कश्मीरी कहवा की मिठास भी लोगों के मन को भा रही है। ये कहवा कोई आम नहीं है बल्कि पहाड़ी जड़ी-बूटियों और ड्राई-फ्रूट से मिलकर बनाया गया है जो कि सर्दी के मौसम में वरदान है। उल्लेखनीय है कि कोरोना काल में यही कहवा पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन बचाव का साधन था। कश्मीर से आए कारोबारी कहवा की मिठास महोत्सव में बांट रहे हैं। यह कश्मीरी कहवा पर्यटकों को ठंडक से राहत पहुंचा रहा है।
कहवा में चाय की पत्तियां, केसर, दालचीनी, खसखस, लौंग, इलायची और बादाम सहित अन्य जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसे पीने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और इसी के साथ सर्दी, खांसी, जुकाम में भी पीने से राहत मिलती है। कारोबारी ने बताया कि सर्दी का मौसम आते ही कुछ गर्मागर्म खाने का मन करता है ऐसे में आप चाय की जगह भी कहवा की चुस्की ले सकते हैं जो कि जितना स्वादिष्ट है और उससे कहीं ज्यादा सेहतमंद के लिए लाभदायक है। श्रीनगर से आए बिलाल ने बताया कि वे महोत्सव में पिछले नौ साल से आ रहे हैं और वह सपरिवार आते है व महोत्सव में दो स्टाॅल लगाई हुई है। वह कश्मीर के ड्राई-फ्रूट और जड़ी-बूटियों से तैयार हुआ कहवा लेकर पहुंचे है जो कि लोग बहुत पसंद करते है।