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स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए भारतवासियों ने हर मूल्य को चुकाया: प्रो. रघुवेंद्र तंवर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 01:39 AM IST
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Indians paid every price to get freedom: Prof. Raghuvendra Tanwar
कुरुक्षेत्र। केयू के सीनेट हॉल में इतिहास विभाग द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत् रिविजटिंग ? - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। भारत एक लंबे समय तक अंग्रेजों के अधीन रहा। इस स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए भारतवासियों ने हर मूल्य को चुकाया है। देश में कई तरह के आंदोलन हुए और हर आंदोलन को सफल बनाने के लिए देशवासियों ने अपना सब कुछ दांव पर लगाया। कई लोगों की जानें भी गईं और कई ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों से शहीद हो गए।
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यह कहना है इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के चेयरमैन पद्मश्री प्रो. रघुवेंद्र तंवर का। वे शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा रिविजटिंग फ्रीडम स्ट्रगल ऑफ इंडिया विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद एक विचारधारा है जो देश के प्रति अटूट प्यार, राष्ट्रभावना और एक प्रकार की सोच है। प्रो.तंवर ने कहा कि आजादी के लिए करीब 126 आंदोलन हुए। आजादी का संघर्ष हिंदू मुसलमानों ने एक साथ लड़ा। 1947 में भारत को मिली स्वतंत्रता ब्रिटिश राज के खिलाफ भारत के लोगों के लंबे संघर्ष का परिणाम थी। स्वतंत्रता संग्राम में करीब 12 हजार 865 लोगों ने अपना बलिदान दिया और शहीद हुए जिनमें से 160 लोगों की आयु 20 वर्ष से भी कम थी।
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केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि 1857 में आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ पहली क्रांति का बिगुल बजा। 1906 के आसपास लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक व विपिंद्र चंद्र पाल ने आजादी के लिए संघर्ष किया। बंगाल के विभाजन के बाद देश में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई और लोगों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया तथा भारतवर्ष में स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग 1918 तक हुआ।
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कुलपति ने कहा कि रोलेट एक्ट 1919 ने भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया था। 13 अप्रैल 1919 में जलियांवाला बाग में अंग्रेज हुक्मरान जनरल डायर ने हजारों निहत्थे हिंदुस्तानियों को अंधाधुंध गोलियों से भुनवा दिया था। इस प्रकरण ने एक चिंगारी का काम कर युवा क्रांतिकारियों के अंदर आजादी की नई अलख जगाने का काम किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रवींद्र भारती विवि कोलकाता के प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि जिस इतिहास को हमने पढ़ा है उसमें बहुत गैप है, जिसको भरने की जिम्मेदारी हमारी है। विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलसचिव प्रो. ज्ञानेश्वर खुराना ने कहा कि अमृत पीने का अधिकारी वही समाज होता है, जिसमें विष पीने की क्षमता है। मनुष्य में स्व का भाव आत्मा, शाश्वता की अवधारणा सही और गलत की पहचान करने की क्षमता प्रदान करती है।

इससे पहले इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसके चहल ने बताया कि हमारे देश का शानदार इतिहास रहा है। इस मौके पर डॉ. गोपाल प्रसाद, प्रो. राजपाल, प्रो. भगत सिंह, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. कृष्णा रंगा, प्रो. राजेश, डॉ. विजेंद्र ढुल, डॉ. महासिंह पूनिया, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. गुरप्रीत सिंह, डॉ. मोना गुलाटी, डॉ. कुसुमलता, डॉ. कुलदीप, डॉ. अनुराग, छात्र प्रदीप व श्वेता कश्यप सहित अन्य मौजूद रहे।
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