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भारतीय संस्थानों में शोध को प्राथमिकता देने की जरूरत : राष्ट्रपति
कुुुरुक्ष्ाेत्र/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2015 12:45 AM IST
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राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देश में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों एवं छात्रों को नए संकल्प लेने के साथ शैक्षणिक उत्कृष्टता के उच्च मानकों को प्राप्त करने का आह्वान किया।
नेशनल नॉलेज नेटवर्क एवं नेशनल इंफोरमेटिक्स सेंटर नई दिल्ली के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में देश भर के सभी राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थानों तथा केंद्रीय यूनिवर्सिटी के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रपति का यह संबोधन राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली से ऑनलाइन आयोजित हुआ। इसमें राष्ट्रपति के संबोधन का स्वागत भाषण आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. इंद्रानील मान्ना द्वारा दिया गया व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. जीसी त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद भाषण दिया गया।
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राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि भारत तब तक शक्तिशाली नहीं बन सकता जब तक वहां के शिक्षण संस्थाएं विश्व के उच्चतम संस्थानों में न आ जाए।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों की श्रेणी तब तक नहीं सुधर सकती जब तक इन संस्थानों में रिसर्च के स्तर को सुधारा न जाए। इसलिए भारतीय संस्थानों में शोध को ज्यादा से ज्यादा प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम दोपहर साढे 12 बजे से प्रारंभ हुआ।
इस संबोधन के लिए एनआइटी कुरुक्षेत्र ने शिक्षकों के लिए वर्चुअल क्लास रूम और सीनेट हॉल, गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए लाइब्रेरी हॉल (प्रथम तल) और संस्थान के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए जुबली हॉल और संस्थान के कई विभागों के कमरों में दिखाने की व्यवस्था की गई थी।
इस अवसर पर संस्थान के प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, प्रो. इंचार्ज (लोक संपर्क) ने बताया कि इस तरह के संबोधन से संस्थान के शिक्षकगणों व विद्यार्थियों में उत्साह का संचार हुआ है।
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नेशनल नॉलेज नेटवर्क एवं नेशनल इंफोरमेटिक्स सेंटर नई दिल्ली के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में देश भर के सभी राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थानों तथा केंद्रीय यूनिवर्सिटी के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
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राष्ट्रपति का यह संबोधन राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली से ऑनलाइन आयोजित हुआ। इसमें राष्ट्रपति के संबोधन का स्वागत भाषण आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. इंद्रानील मान्ना द्वारा दिया गया व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. जीसी त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद भाषण दिया गया।
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राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि भारत तब तक शक्तिशाली नहीं बन सकता जब तक वहां के शिक्षण संस्थाएं विश्व के उच्चतम संस्थानों में न आ जाए।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों की श्रेणी तब तक नहीं सुधर सकती जब तक इन संस्थानों में रिसर्च के स्तर को सुधारा न जाए। इसलिए भारतीय संस्थानों में शोध को ज्यादा से ज्यादा प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम दोपहर साढे 12 बजे से प्रारंभ हुआ।
इस संबोधन के लिए एनआइटी कुरुक्षेत्र ने शिक्षकों के लिए वर्चुअल क्लास रूम और सीनेट हॉल, गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए लाइब्रेरी हॉल (प्रथम तल) और संस्थान के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए जुबली हॉल और संस्थान के कई विभागों के कमरों में दिखाने की व्यवस्था की गई थी।
इस अवसर पर संस्थान के प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, प्रो. इंचार्ज (लोक संपर्क) ने बताया कि इस तरह के संबोधन से संस्थान के शिक्षकगणों व विद्यार्थियों में उत्साह का संचार हुआ है।