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Kurukshetra News: साइबर ठगी के बढ़ते मामले बने पुलिस के लिए चुनौती, छह माह में ही 1500 लोग हो चुके शिकार
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कुरुक्षेत्र। साइबर क्राइम थाना प्रभारी पीएसआई महेश कुमार। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिले में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। इस वर्ष अब तक साइबर पुलिस के पास 1500 से ज्यादा शिकायतें पहुंच चुकीं है व पुलिस ने 38 मामले दर्ज किए हैं। इन शिकायतों में साइबर ठगों ने पीडितों से 7.36 करोड़ रुपये की ठगी की है। हालांकि पुलिस ने भी इन मामलों में कुछ सतर्कता दिखाई है और अब तक 57 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खातों से 1.30 करोड़ रुपये की राशि को ट्रेस कर बैंकों से फ्रीज करवाया है। साइबर थाना पुलिस फिलहाल चार करोड़ रुपये की ठगी से संबंधित मामलों की जांच कर रही है और आरोपियों को पकड़ने के प्रयास व उन खातों को फ्रीज करवाने में जुटी हुई है, जिनमें उन्होंने राशि हड़पी है।
पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल ने बताया कि साइबर ठग फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, और बिजली बिल छूट जैसे बहानों से लोगों को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी साइबर सेल राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सहयोग से ठगों का पता लगा रही है। 57 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ उनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, और फर्जी सिम बरामद किए गए हैं। पुलिस ने अब तक एक करोड़ 30 लाख रुपये फ्रीज कर पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी प्रभारी पीएसआई महेश कुमार के मुताबिक चार करोड़ रुपये की ठगी के मामले जटिल हैं, क्योंकि अपराधी फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी टीम तकनीकी जांच और दबिश में जुटी है। कई ठग विदेशी गिरोहों से जुडे हैं, जिनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अनजान लिंक, कॉल, या मैसेज पर भरोसा न करने की अपील की।
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लोगों की जागरूकता सबसे कारगर उपाय
थाना प्रभारी महेश कुमार का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने में लोगों की जागरूकता सबसे कारगर साबित हो सकती है। पुलिस की ओर से भी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर अन्य संसाधनों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में स्लोगन लेखन, क्विज, और सेमीनार के जरिए लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी रोकने के लिए हमारी टीमें 24 घंटे सक्रिय हैं।
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पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल ने बताया कि साइबर ठग फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, और बिजली बिल छूट जैसे बहानों से लोगों को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी साइबर सेल राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सहयोग से ठगों का पता लगा रही है। 57 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ उनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, और फर्जी सिम बरामद किए गए हैं। पुलिस ने अब तक एक करोड़ 30 लाख रुपये फ्रीज कर पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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साइबर क्राइम थाना प्रभारी प्रभारी पीएसआई महेश कुमार के मुताबिक चार करोड़ रुपये की ठगी के मामले जटिल हैं, क्योंकि अपराधी फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी टीम तकनीकी जांच और दबिश में जुटी है। कई ठग विदेशी गिरोहों से जुडे हैं, जिनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अनजान लिंक, कॉल, या मैसेज पर भरोसा न करने की अपील की।
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लोगों की जागरूकता सबसे कारगर उपाय
थाना प्रभारी महेश कुमार का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों पर अंकुश लगाने में लोगों की जागरूकता सबसे कारगर साबित हो सकती है। पुलिस की ओर से भी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर अन्य संसाधनों के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में स्लोगन लेखन, क्विज, और सेमीनार के जरिए लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी रोकने के लिए हमारी टीमें 24 घंटे सक्रिय हैं।