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Kurukshetra News: राम कथा में देवी सुदीक्षा ने राम वन गमन का किया सजीव चित्रण
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लाडवा। प्राचीनम हनुमान मंदिर में पिछले पांच दिनों से चल रही राम कथा बुधवार को भी जारी रही। श्री राम के चरित्र का वर्णन करते हुए देवी सुदीक्षा सरस्वती ने कहा कि जब प्रभु राम पिता की आज्ञा से 14 वर्ष के लिए वन में जा रहे थे। तब मंत्री सुमंत ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और अयोध्या लौटने का आग्रह किया। तब प्रभु राम ने बड़े विनय के साथ कहा कि वह उस कुल से आते हैं जिनके पूर्वजों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने वचन का पालन करते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया है।
राजा हरिश्चंद्र, कांति देव, महर्षि दधीचि, राजा शिवि, भगीरथ आदि पुण्य आत्माओं ने धर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन की परवाह नहीं की। इस प्रसंग से हमें वचन पालन, आज्ञाकारी, संस्कारों पर गर्व की शिक्षा मिलती हैं। एक अन्य प्रसंग में भगत प्रहलाद की भक्ति एवं प्रभु पर एक भक्त का विश्वास को दर्शाता है। पिता हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की नारायण की भक्ति को रोकने के लिए पहाड़ से गिरवाया, अग्नि में जलाया, उबलते तेल में डलवाया लेकिन उसकी भक्ति और प्रभु पर उसके विश्वास को नहीं तोड़ पाए। भक्त प्रहलाद ने भगवान से पिता को माफ करने की विनती की और भगवान ने भी हिरण्यकश्यप द्वारा मांगे गए वरदान को पूरा करते हुए उसका वध कर अपने लोक में स्थान दिया। देवी सरस्वती ने शिव सती के प्रसंग में भगवान भोले शंकर के आराध्य राम की महिमा में संदेह कर परीक्षा लेने के लिए जाती है और सीता का रूप धारण करती है।
इस अवसर पर रविंद्र बंसल, सुभाष जिंदल, प्रदीप सहगल, प्रदीप गर्ग, अशोक गर्ग, सत प्रकाश शर्मा, अशोक गाजियाबाद, बसंत शर्मा करनाल, नीरज गर्ग, आरडी अरोड़ा एवं सभा के कर्मठ पदाधिकारी प्रधान गोपी रहेजा, सुनील गर्ग, सोम प्रकाश शर्मा, अश्विनी गोस्वामी, निशु, रोहितआनन्द, रवि, दर्शन, विक्की चोपड़ा आदि मौजूद रहे।
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राजा हरिश्चंद्र, कांति देव, महर्षि दधीचि, राजा शिवि, भगीरथ आदि पुण्य आत्माओं ने धर्म की रक्षा के लिए अपने जीवन की परवाह नहीं की। इस प्रसंग से हमें वचन पालन, आज्ञाकारी, संस्कारों पर गर्व की शिक्षा मिलती हैं। एक अन्य प्रसंग में भगत प्रहलाद की भक्ति एवं प्रभु पर एक भक्त का विश्वास को दर्शाता है। पिता हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की नारायण की भक्ति को रोकने के लिए पहाड़ से गिरवाया, अग्नि में जलाया, उबलते तेल में डलवाया लेकिन उसकी भक्ति और प्रभु पर उसके विश्वास को नहीं तोड़ पाए। भक्त प्रहलाद ने भगवान से पिता को माफ करने की विनती की और भगवान ने भी हिरण्यकश्यप द्वारा मांगे गए वरदान को पूरा करते हुए उसका वध कर अपने लोक में स्थान दिया। देवी सरस्वती ने शिव सती के प्रसंग में भगवान भोले शंकर के आराध्य राम की महिमा में संदेह कर परीक्षा लेने के लिए जाती है और सीता का रूप धारण करती है।
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इस अवसर पर रविंद्र बंसल, सुभाष जिंदल, प्रदीप सहगल, प्रदीप गर्ग, अशोक गर्ग, सत प्रकाश शर्मा, अशोक गाजियाबाद, बसंत शर्मा करनाल, नीरज गर्ग, आरडी अरोड़ा एवं सभा के कर्मठ पदाधिकारी प्रधान गोपी रहेजा, सुनील गर्ग, सोम प्रकाश शर्मा, अश्विनी गोस्वामी, निशु, रोहितआनन्द, रवि, दर्शन, विक्की चोपड़ा आदि मौजूद रहे।
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