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Kurukshetra News: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में भाकियू ने बैठक के बाद फूंकीं ट्रेड डील की प्रतियां
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कुरुक्षेत्र। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) चढ़ूनी की ओर से जाट धर्मशाला में एक अहम बैठक की गई, जिसमें भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में किसानों ने इस डील का कड़ा विरोध जताते हुए इसे भारतीय कृषि और किसानों के हितों के खिलाफ बताया। बैठक के बाद किसानों ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और ढांड-कैथल सड़क पर बिरला मंदिर चौक पर बिल की प्रतियां जलाईं।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील देश और किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी दबाव में किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। चढ़ूनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस डील को रद्द नहीं किया तो इसका राजनीतिक खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। बैठक में किसानों ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चार जून को देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर ट्रेड यूनियन बिलों की प्रतियां जलाकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान फैसला लिया गया कि हरिद्वार के वीआईपी घाट पर पांच से आठ जून को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को लेकर भी चर्चा की गई। चढ़ूनी ने बताया कि इस शिविर में देशभर से किसान प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जहां कृषि, व्यापार, किसान अधिकारों और भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति पर मंथन किया जाएगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया और प्रस्तावित ट्रेड डील को वापस नहीं लिया, तो देशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने कहा कि वे अपने हितों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।
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भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि प्रस्तावित ट्रेड डील देश और किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी दबाव में किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। चढ़ूनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस डील को रद्द नहीं किया तो इसका राजनीतिक खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। बैठक में किसानों ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चार जून को देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर ट्रेड यूनियन बिलों की प्रतियां जलाकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान फैसला लिया गया कि हरिद्वार के वीआईपी घाट पर पांच से आठ जून को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को लेकर भी चर्चा की गई। चढ़ूनी ने बताया कि इस शिविर में देशभर से किसान प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जहां कृषि, व्यापार, किसान अधिकारों और भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति पर मंथन किया जाएगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया और प्रस्तावित ट्रेड डील को वापस नहीं लिया, तो देशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने कहा कि वे अपने हितों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।
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