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‘आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही हिंदी भाषा’
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ऑनलाइन परिचर्चा में भाग लेते राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल के विद्यार्थी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्व हिंदी दिवस पर राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल के हिंदी विभाग ने ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईएएस प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को दुनिया की बजाय देश में आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होेंने कहा कि दुनिया के जितने भी सभ्य व विकसित समाज हुए हैं, उनमें उनकी मातृभाषा ने सबसे अहम भूमिका निर्वहन की। भारतीय दर्शन व चिंतन के विभिन्न विद्वान महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, डॉ. बीआर आंबेडकर आदि ने हिंदी के माध्यम से ही समस्त दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने कहा कि हमें हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय व विदेशी मातृ भाषाओं को भी सम्मान देना होगा और इन्हें शिक्षा के माध्यम के तौर अपनाना होगा, तभी हमारा समाज प्रगतिशील व वैज्ञानिक दृष्टिकोण की तरफ आगे बढ़ सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी ने कहा कि हिंदी भाषा विश्व स्तर पर अपनी पहचान लगातार बढ़ा रही है, यह हमारे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। सहायक प्रो. सुनील कुमार थुआ ने कहा कि हमारी हिंदी दुनिया के लिए आने वाली सदी की भाषा है। वर्ष 2030 तक दुनिया का हर 5वां आदमी हिंदी जानेगा।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर बाजारवाद व भूमंडलीकरण के दौर में अविरल गति से अपने तकनीकी पक्षों से ज्ञान व चेतना के माध्यम से बेहतर दुनिया के लिए समाज संस्कृति का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर डॉ. राजबीर, डॉ देवेंद्र, प्रो. विनय पाठक सहित अन्य उपस्थित रहे।
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कुरुक्षेत्र। विश्व हिंदी दिवस पर राजकीय कन्या महाविद्यालय पलवल के हिंदी विभाग ने ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईएएस प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को दुनिया की बजाय देश में आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होेंने कहा कि दुनिया के जितने भी सभ्य व विकसित समाज हुए हैं, उनमें उनकी मातृभाषा ने सबसे अहम भूमिका निर्वहन की। भारतीय दर्शन व चिंतन के विभिन्न विद्वान महात्मा गांधी, रविंद्र नाथ टैगोर, डॉ. बीआर आंबेडकर आदि ने हिंदी के माध्यम से ही समस्त दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने कहा कि हमें हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय व विदेशी मातृ भाषाओं को भी सम्मान देना होगा और इन्हें शिक्षा के माध्यम के तौर अपनाना होगा, तभी हमारा समाज प्रगतिशील व वैज्ञानिक दृष्टिकोण की तरफ आगे बढ़ सकता है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी ने कहा कि हिंदी भाषा विश्व स्तर पर अपनी पहचान लगातार बढ़ा रही है, यह हमारे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। सहायक प्रो. सुनील कुमार थुआ ने कहा कि हमारी हिंदी दुनिया के लिए आने वाली सदी की भाषा है। वर्ष 2030 तक दुनिया का हर 5वां आदमी हिंदी जानेगा।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर बाजारवाद व भूमंडलीकरण के दौर में अविरल गति से अपने तकनीकी पक्षों से ज्ञान व चेतना के माध्यम से बेहतर दुनिया के लिए समाज संस्कृति का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर डॉ. राजबीर, डॉ देवेंद्र, प्रो. विनय पाठक सहित अन्य उपस्थित रहे।