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स्वास्थ्य विभाग ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के नहीं खरीद पाया बैग, धूल फांक रही मशीन
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नागरिक अस्पताल में स्थापित की गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड बैग की कमी के चलते धूल फांक रही है। डेंगू के बढ़ते मामलों के दौरान इस मशीन का मरीजों को कोई फायदा नहीं हो पा रहा है।
लगातार जिले में डेंगू का डंक घातक होता जा रहा है।
वीरवार को भी जिला मलेरिया विभाग की ओर से संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। जिनमें डेंगू की पुष्टि होनी बाकी है। अभी तक विभाग एक हजार से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच करने के पश्चात 130 मरीजों में डेंगू की पुष्टि कर चुका है।
हालात यह हैं कि डेंगू से जंग लड़ रहे सरकारी और निजी अस्पतालों में दाखिल मरीज शरीर में प्लेटलेट्स की कमी से तड़प रहे हैं। कुरुक्षेत्र ही नहीं आसपास के जिलों में भी प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं हो रही। लेकिन लाखों रुपये खर्च करके जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित की गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड बैग की कमी की वजह से धूल फांक रही है। डेंगू पीड़ित मरीजों के परिजनों को प्लेटलेट्स के लिए पंचकूला, चंडीगढ़, यमुनानगर, जगाधरी और रोहतक तक धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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डेंगू की दस्तक से पहले पंचकूला और गुरुग्राम के बाद कुरुक्षेत्र के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का लाइसेंस मिलने से जरूरतमंदों को सरकारी दरों पर प्लेटलेट्स मिलने की आस जगी थी। मशीन इंस्टॉल की जा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक ब्लड बैग की खरीद ही नहीं कर पाया।
बताया गया कि करीब एक माह पहले ही जिला सिविल सर्जन को ब्लड बैग उपलब्ध कराने की डिमांड सौंपी गई थी, लेकिन उनके छुट्टी पर चले जाने के बाद यह डिमांड अधूरी पड़ी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि दो-तीन दिनों में जरूरतमंद मरीजों को प्लेटलेट्स उपलब्ध हो सकेगी।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा को अलग-अलग करती है। इन तत्वों को ब्लड सेपरेटर मशीन से अलग करने के बाद पूरी यूनिट खून चढ़ाने के बजाय इन तत्वों को चढ़ाया जाता है। ऐसे में इन मरीजों को सीधा लाभ पहुंचता है।
जिला अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करके लाई गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन आज तक किसी काम नहीं आई। पहले आधे-अधूरे उपकरणों के चलते मशीन डिब्बे बंद रही। लाइसेंस मिलने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन को नए ब्लड बैंक में इंस्टॉल किया था, लेकिन डिमांड के बाद विभाग अभी तक ब्लड बैग नहीं खरीद पाया। अब इसका खामियाजा प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रमा का कहना है कि लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब सिर्फ ब्लड बैग उपलब्ध होने का इंतजार है। जिला सिविल सर्जन को डिमांड भेजी है। जल्द ही बैग उपलब्ध होने की उम्मीद है। जैसे बैग उपलब्ध होंगे, तभी जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स मुहैया कराई जाएगी।
उप सिविल सर्जन डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि आगामी जल्द बैग उपलब्ध हो जाएंगे। फिलहाल लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि किसी मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो। जल्द ही जिला अस्पताल में जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा उपलब्ध हो सकेगा।
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लगातार जिले में डेंगू का डंक घातक होता जा रहा है।
वीरवार को भी जिला मलेरिया विभाग की ओर से संदिग्ध मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। जिनमें डेंगू की पुष्टि होनी बाकी है। अभी तक विभाग एक हजार से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच करने के पश्चात 130 मरीजों में डेंगू की पुष्टि कर चुका है।
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हालात यह हैं कि डेंगू से जंग लड़ रहे सरकारी और निजी अस्पतालों में दाखिल मरीज शरीर में प्लेटलेट्स की कमी से तड़प रहे हैं। कुरुक्षेत्र ही नहीं आसपास के जिलों में भी प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं हो रही। लेकिन लाखों रुपये खर्च करके जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित की गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड बैग की कमी की वजह से धूल फांक रही है। डेंगू पीड़ित मरीजों के परिजनों को प्लेटलेट्स के लिए पंचकूला, चंडीगढ़, यमुनानगर, जगाधरी और रोहतक तक धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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डेंगू की दस्तक से पहले पंचकूला और गुरुग्राम के बाद कुरुक्षेत्र के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का लाइसेंस मिलने से जरूरतमंदों को सरकारी दरों पर प्लेटलेट्स मिलने की आस जगी थी। मशीन इंस्टॉल की जा चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी तक ब्लड बैग की खरीद ही नहीं कर पाया।
बताया गया कि करीब एक माह पहले ही जिला सिविल सर्जन को ब्लड बैग उपलब्ध कराने की डिमांड सौंपी गई थी, लेकिन उनके छुट्टी पर चले जाने के बाद यह डिमांड अधूरी पड़ी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि दो-तीन दिनों में जरूरतमंद मरीजों को प्लेटलेट्स उपलब्ध हो सकेगी।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा को अलग-अलग करती है। इन तत्वों को ब्लड सेपरेटर मशीन से अलग करने के बाद पूरी यूनिट खून चढ़ाने के बजाय इन तत्वों को चढ़ाया जाता है। ऐसे में इन मरीजों को सीधा लाभ पहुंचता है।
जिला अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करके लाई गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन आज तक किसी काम नहीं आई। पहले आधे-अधूरे उपकरणों के चलते मशीन डिब्बे बंद रही। लाइसेंस मिलने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन को नए ब्लड बैंक में इंस्टॉल किया था, लेकिन डिमांड के बाद विभाग अभी तक ब्लड बैग नहीं खरीद पाया। अब इसका खामियाजा प्लेटलेट्स की कमी से जूझ रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रमा का कहना है कि लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब सिर्फ ब्लड बैग उपलब्ध होने का इंतजार है। जिला सिविल सर्जन को डिमांड भेजी है। जल्द ही बैग उपलब्ध होने की उम्मीद है। जैसे बैग उपलब्ध होंगे, तभी जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स मुहैया कराई जाएगी।
उप सिविल सर्जन डॉ. अनुपमा सिंह का कहना है कि आगामी जल्द बैग उपलब्ध हो जाएंगे। फिलहाल लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि किसी मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो। जल्द ही जिला अस्पताल में जरूरतमंदों को प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा उपलब्ध हो सकेगा।