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Kurukshetra News: पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थापित करना होगा सामंजस्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विकास की प्रतिस्पर्धा दौड़ व आगे निकलने की होड़ में मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है। यदि हमें युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाना है तो पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा।
ये विचार गुरुजंभेश्वर साइंस एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा सेमिनार हॉल में पर्यावरण एवं स्थिरता विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि के रूप में व्यक्त किए। अतिथियों की ओर से राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस पर आधारित पुस्तक के सार का विमोचन भी किया गया। कुलपति प्रो. नरसी बिश्नोई ने युवाओं से आह्वान किया कि शोधार्थी नवाचार द्वारा इन पर्यावरण संतुलन के समक्ष आ रही समस्याओं का समाधान करें। श्रीमद्भगवद् गीता में कहा गया है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही जीवन का सार है। इसलिए प्रकृति से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने के साथ-साथ हमें पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में भी कार्य करने की जरूरत है। पर्यावरण असंतुलन के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्या से पूरा विश्व जूझ रहा है। अमेरिका के जंगलों भी इसी का परिणाम है। एनईपी-2020 तथा एनआईआरएफ रैंकिंग में पर्यावरण के सतत विकास उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अहम स्थान दिया गया है। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन का कारण मनुष्य निर्मित है। भविष्य की स्वस्थ युवा पीढ़ी के लिए पर्यावरण संरक्षण अति आवश्यक है। केंद्र सरकार ने 17 एसडीजी के तहत जलशक्ति, नमामि गंगे, क्लीन एयर मिशन, सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाओं संचालित कर रही है। वहीं नैक मूल्यांकन में हरित वातावरण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अंक निर्धारित किए गए हैं।
इसी को देखते हुए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में कुवि के 40 एकड़ क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण के लिए संरक्षित किया गया है। इसी के साथ पर्यावरण संरक्षण नीति को अपनाते हुए विद्यार्थियों द्वारा पौध रोपित करना एवं उसकी देखभाल करना पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। आयोजन सचिव डॉ. संदीप गुप्ता ने कहा कि हम इसी भूमि की संतान है, इसलिए इसकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है।
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कुरुक्षेत्र। विकास की प्रतिस्पर्धा दौड़ व आगे निकलने की होड़ में मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है। यदि हमें युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाना है तो पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा।
ये विचार गुरुजंभेश्वर साइंस एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा सेमिनार हॉल में पर्यावरण एवं स्थिरता विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्यातिथि के रूप में व्यक्त किए। अतिथियों की ओर से राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस पर आधारित पुस्तक के सार का विमोचन भी किया गया। कुलपति प्रो. नरसी बिश्नोई ने युवाओं से आह्वान किया कि शोधार्थी नवाचार द्वारा इन पर्यावरण संतुलन के समक्ष आ रही समस्याओं का समाधान करें। श्रीमद्भगवद् गीता में कहा गया है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही जीवन का सार है। इसलिए प्रकृति से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों को प्राप्त करने के साथ-साथ हमें पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में भी कार्य करने की जरूरत है। पर्यावरण असंतुलन के कारण ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्या से पूरा विश्व जूझ रहा है। अमेरिका के जंगलों भी इसी का परिणाम है। एनईपी-2020 तथा एनआईआरएफ रैंकिंग में पर्यावरण के सतत विकास उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अहम स्थान दिया गया है। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन का कारण मनुष्य निर्मित है। भविष्य की स्वस्थ युवा पीढ़ी के लिए पर्यावरण संरक्षण अति आवश्यक है। केंद्र सरकार ने 17 एसडीजी के तहत जलशक्ति, नमामि गंगे, क्लीन एयर मिशन, सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाओं संचालित कर रही है। वहीं नैक मूल्यांकन में हरित वातावरण तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अंक निर्धारित किए गए हैं।
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इसी को देखते हुए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में कुवि के 40 एकड़ क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण के लिए संरक्षित किया गया है। इसी के साथ पर्यावरण संरक्षण नीति को अपनाते हुए विद्यार्थियों द्वारा पौध रोपित करना एवं उसकी देखभाल करना पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। आयोजन सचिव डॉ. संदीप गुप्ता ने कहा कि हम इसी भूमि की संतान है, इसलिए इसकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है।
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