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Kurukshetra News: धर्मनगरी में हनुमान जन्मोत्सव धूम, सुंदरकांड तो कहीं पढ़ा गया हनुमान चालीसा
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव की धूम रही। जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुंदरकांड तो कहीं भक्त हनुमान चालीसा पाठ करते दिखाई दिए। चारों ओर वीर बजरंगी के जयकारे गूंजते रहे। पूरी तरह उत्साह से लबरेज भक्त हनुमान मंदिरों में सुबह से ही उमड़ने लगे थे और यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
सबसे मुख्य आयोजन ब्रह्मसरोवर स्थित दक्षिण मुखी प्राचीन हनुमान मंदिर में किया गया, जहां बजरंगबली स्वयं प्रकट हुए थे। यहां सुबह ध्वजारोहण किया गया और इसके बाद शृंगार एवं वस्त्र धारण करवाए गए। सुबह 10 बजे सुंदरकांड का पाठ किया गया। दोपहर 12 बजते ही हनुमान जी को 56 व्यंजन के भोग लगाए गए। इसके उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को हनुमान चालीसा पाठ किया गया। जन्मोत्सव के चलते हनुमान मंदिरों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया। मुख्य पुजारी डॉ. हिमांशु शर्मा के मुताबिक दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में बजरंगबली का दरबार एक क्विंटल फूलों व एक हजार गुब्बारों से सजाया गया था।
हनुमान जी की भक्ति हमें आत्मशक्ति का कराती है अनुभव : प्रो. धीमान
कुरुक्षेत्र। बजरंगबली न केवल रामभक्ति के प्रतीक हैं, बल्कि उनकी शौर्य, निष्ठा और विनम्रता आज भी हर युग के लिए प्रेरणास्रोत है। आज के युग में हनुमान जी के गुण हमें सिखाते हैं कि निष्ठा, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलकर हम जीवन के किसी भी संघर्ष को पार कर सकते हैं। उनकी भक्ति हमें आत्मशक्ति का अनुभव कराती है और उनका चरित्र हमें बताता है कि सच्चा बल केवल बाहुबल नहीं, आत्मबल भी होता है।
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उक्त विचार श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में हनुमान जी जन्मोत्सव के दौरान व्यक्त किए। इससे पहले कुलपति धीमान, कुलसचिव प्रोफेसर ब्रिजेंद्र सिंह तोमर समेत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस मौके पर श्री कृष्ण आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, प्रॉक्टर डॉ. राजा सिंगला, डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. जितेश पांडा, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. रजनीश, उप कुलसचिव विकास शर्मा व सहायक कुलसचिव अतुल गोयल सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि हनुमान जी का संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति का उदाहरण है। उन्होंने न केवल श्री राम की सेवा की, बल्कि अपने जीवन को राम के चरणों में समर्पित कर दिया। सीता माता की खोज में उन्होंने अत्यंत चतुराई से कार्य किया। अपार शक्तियों के बावजूद हनुमान जी सदैव विनम्र रहे।
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सबसे मुख्य आयोजन ब्रह्मसरोवर स्थित दक्षिण मुखी प्राचीन हनुमान मंदिर में किया गया, जहां बजरंगबली स्वयं प्रकट हुए थे। यहां सुबह ध्वजारोहण किया गया और इसके बाद शृंगार एवं वस्त्र धारण करवाए गए। सुबह 10 बजे सुंदरकांड का पाठ किया गया। दोपहर 12 बजते ही हनुमान जी को 56 व्यंजन के भोग लगाए गए। इसके उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को हनुमान चालीसा पाठ किया गया। जन्मोत्सव के चलते हनुमान मंदिरों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया। मुख्य पुजारी डॉ. हिमांशु शर्मा के मुताबिक दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में बजरंगबली का दरबार एक क्विंटल फूलों व एक हजार गुब्बारों से सजाया गया था।
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हनुमान जी की भक्ति हमें आत्मशक्ति का कराती है अनुभव : प्रो. धीमान
कुरुक्षेत्र। बजरंगबली न केवल रामभक्ति के प्रतीक हैं, बल्कि उनकी शौर्य, निष्ठा और विनम्रता आज भी हर युग के लिए प्रेरणास्रोत है। आज के युग में हनुमान जी के गुण हमें सिखाते हैं कि निष्ठा, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलकर हम जीवन के किसी भी संघर्ष को पार कर सकते हैं। उनकी भक्ति हमें आत्मशक्ति का अनुभव कराती है और उनका चरित्र हमें बताता है कि सच्चा बल केवल बाहुबल नहीं, आत्मबल भी होता है।
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उक्त विचार श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में हनुमान जी जन्मोत्सव के दौरान व्यक्त किए। इससे पहले कुलपति धीमान, कुलसचिव प्रोफेसर ब्रिजेंद्र सिंह तोमर समेत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस मौके पर श्री कृष्ण आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, प्रॉक्टर डॉ. राजा सिंगला, डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. जितेश पांडा, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. रजनीश, उप कुलसचिव विकास शर्मा व सहायक कुलसचिव अतुल गोयल सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि हनुमान जी का संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति का उदाहरण है। उन्होंने न केवल श्री राम की सेवा की, बल्कि अपने जीवन को राम के चरणों में समर्पित कर दिया। सीता माता की खोज में उन्होंने अत्यंत चतुराई से कार्य किया। अपार शक्तियों के बावजूद हनुमान जी सदैव विनम्र रहे।