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Kurukshetra News: शिक्षा महाकुंभ में गुरु की तरह विद्यार्थियों को स्टार्टअप का पाठ पढ़ा गए राज्यपाल
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कुरुक्षेत्र। एनआईटी कुरुक्षेत्र में शिक्षा महाकुंभ कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय बुधवार को एक गुरु के रूप में दिखाई दिए। जहां उन्होंने विद्यार्थियों को अपने जीवन में संघर्ष कर सफलता की सीढ़ी चढ़ने का पाठ पढ़ाया। उन्होंने उन्हें स्टार्टअप के गुर दिए तो अपने जीवन के संघर्ष के किस्से भी सुनाए, जिन्हें सुनकर विद्यार्थी ही नहीं प्रोफेसर तक दंग रह गए। कार्यक्रम में राज्यपाल बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। यहां उन्होंने एक-एक कदम पर आने वाली समस्याओं से रूबरू कराते हुए स्टार्टअप का पाठ पढ़ाया।
अपने जीवन के संघर्ष से विद्यार्थियों को अवगत कराते हुए बताया कि जब उनकी मां बाजार में अस्थायी दुकान पर प्याज बेचती थी और वह पांचवीं कक्षा में थे। उस समय उनके पिता जी गुजर गए थे। वे स्कूल के बाद अपनी माता की सहायता करवाते थे, जिससे उनकी माता को सहारा मिलता था। अपनी मां से उन्होंने व्यवसाय सीखा कि कैसे तौला जाता है, कब दाम बढ़ते और कम होते हैं, ये सीख मां से ली और पांचवीं कक्षा से ही पढ़ाई के साथ-साथ आज तक काम करते आ रहे हैं। राज्यपाल ने कार्यक्रम के थीम स्किल, स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप इन एजुकेशन पर बेहद बारीकी से विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को अपने रुझान के मुताबिक स्टार्टअप शुरु कर देना चाहिए, जिसके लिए सरकार की ओर से भी सहायता की जाएगी। उन्होंने अपने जीवन के सफलता के मंत्र भी साझा किए।
उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन होते ही नौकरी मिल गई थी, लेकिन नौकरी नहीं की अगर नौकरी कर लेता आज राज्यपाल नहीं होता। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खुद को भविष्य के लिए संवारने लगते हैं तो आपकी जड़ें मजबूत हो जाती है, फिर आपके स्टार्टअप में उतार-चढ़ाव आए तो जमे रहेंगे कोई भी ताकत हिला नहीं सकती। इसी के साथ विद्यार्थियों को बताया कि नौकरी कर लेता सारी जिंदगी नौकरी ही करता रहता आज इस पद पर आसीन न होता। इसी तरह आप सब भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाले बनें और खुद भी बढ़ते चलें।
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अपने जीवन के संघर्ष से विद्यार्थियों को अवगत कराते हुए बताया कि जब उनकी मां बाजार में अस्थायी दुकान पर प्याज बेचती थी और वह पांचवीं कक्षा में थे। उस समय उनके पिता जी गुजर गए थे। वे स्कूल के बाद अपनी माता की सहायता करवाते थे, जिससे उनकी माता को सहारा मिलता था। अपनी मां से उन्होंने व्यवसाय सीखा कि कैसे तौला जाता है, कब दाम बढ़ते और कम होते हैं, ये सीख मां से ली और पांचवीं कक्षा से ही पढ़ाई के साथ-साथ आज तक काम करते आ रहे हैं। राज्यपाल ने कार्यक्रम के थीम स्किल, स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योरशिप इन एजुकेशन पर बेहद बारीकी से विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को अपने रुझान के मुताबिक स्टार्टअप शुरु कर देना चाहिए, जिसके लिए सरकार की ओर से भी सहायता की जाएगी। उन्होंने अपने जीवन के सफलता के मंत्र भी साझा किए।
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उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन होते ही नौकरी मिल गई थी, लेकिन नौकरी नहीं की अगर नौकरी कर लेता आज राज्यपाल नहीं होता। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खुद को भविष्य के लिए संवारने लगते हैं तो आपकी जड़ें मजबूत हो जाती है, फिर आपके स्टार्टअप में उतार-चढ़ाव आए तो जमे रहेंगे कोई भी ताकत हिला नहीं सकती। इसी के साथ विद्यार्थियों को बताया कि नौकरी कर लेता सारी जिंदगी नौकरी ही करता रहता आज इस पद पर आसीन न होता। इसी तरह आप सब भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी देने वाले बनें और खुद भी बढ़ते चलें।
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