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गीता सागर है, इसमें डुबकी लगाकर ही गीता की महत्ता को समझ सकते : स्वामी ज्ञानानंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2024 02:24 AM IST
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Geeta is an ocean, we can understand the importance of Geeta only by taking a dip in it: Swami Gyananand
कुरुक्षेत्र। गीता सागर है, इसमें डुबकी लगाकर ही गीता की महत्ता को समझा जा सकता है। गीता में समस्या का कारण एवं निवारण दोनों समाहित है। व्यक्ति को जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ना है, उसके लिए एकाग्रता आवश्यक है तथा यह एकाग्रता श्रीमद्भगवद् गीता के अध्ययन से प्राप्त होती है। ये विचार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग में सीनेट हॉल में श्रीमद्भगवद् गीता आधारित संतुलित प्रकृति - शुद्ध पर्यावरण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए।
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तीन दिवसीय संगोष्ठी में गीता पर आधारित पढ़े गए शोध पत्रों, पोस्टर प्रतियोगिता, क्विज के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता से त्याग का भाव जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है। क्योंकि त्याग की भावना से ही मानव जीवन की सभी समस्याएं हल हो सकती हैं। गीता से ही लिए गए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य में भी योग स्थित होकर अपने कर्तव्यों के निर्वहन की बात कही गई है। यह एक संयोग है कि गीता में 700 श्लोक हैं वहीं तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 698 शोध प्रस्तुत किए गए हैं।
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48 कोस मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा ने श्रीमद्भगवद्गीता और सतत पारिस्थितिकी तंत्र पर अपनी प्रस्तुति में भगवद्गीता की गहन शिक्षाओं और समकालीन पर्यावरणीय चिंताओं के लिए उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और कहा कि स्थिरता केवल वैज्ञानिक या आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक भी है। उन्होंने गीता के प्रबंधन, निस्वार्थता और सद्भाव के सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बताया। वहीं विधि संस्थान द्वारा पर्यावरण प्रबंधन में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. सुशीला देवी चौहान ने जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ कृषि और अपशिष्ट प्रबंधन सहित विभिन्न चुनौतियों के पर्यावरण के अनुकूल समाधानों के साथ भारत की पर्यावरण नीतियों में गीता की शिक्षाओं की प्रासंगिकता के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर कुलसचिव प्रो. संजीव शर्मा, सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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