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Kurukshetra: मानसून में पहली बार मारकंडा में पहुंचा 4,000 क्यूसिक पानी; प्रशासन हाई अलर्ट पर
Fri, 10 Jul 2026 10:49 PM IST
मयूर शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Published by: मयूर शर्मा
Updated Fri, 10 Jul 2026 10:49 PM IST
सार
नदी के आसपास डेरों में रहने वाले लोगों को मुनादी कराकर अलर्ट रहने की सलाह दी गई, ताकि अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में कोई व्यक्ति वहां फंस न जाए।
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मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट पर
- फोटो : संवाद
विस्तार
मानसून सीजन में पहली बार मारकंडा नदी में शुक्रवार देर शाम तक करीब चार हजार क्यूसिक पानी पहुंचा, जिसके चलते कुरुक्षेत्र और शाहाबाद प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। दो दिन से जारी आसपास के इलाकों में बारिश के चलते यह पानी पहुंचा है। शाम करीब 7:30 बजे नदी में यह पानी और भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं, अंबाला के मुलाना क्षेत्र में लगभग 38 हजार क्यूसिक और कालाअम्ब में करीब सात हजार क्यूसिक जलस्तर दर्ज किया गया। अनुमान था कि यह पानी आगे बढ़ते हुए शाहाबाद क्षेत्र में भी जलस्तर बढ़ा सकता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क भी किया तो वहीं
संबंधित टीमों को भी अलर्ट रहने के लिए निर्देश
मारकंडा किनारे बसे तंगोर, कठुआ, कलसाना, मुगल माजरा, मलिकपुर, गुमटी और अरूप नगर सहित कई गांवों में अक्सर मारकंडा के पानी से नुकसान होता है। हर वर्ष तेज बहाव के दौरान इन गांवों की कृषि भूमि और फसलें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। पिछले वर्ष मारकंडा नदी के पानी ने बड़ा कहर बरपाया था और आसपास के उक्त गांवों के साथ-साथ बड़े स्तर पर फसलों को भी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में इस बार फिर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एहतियाती तैयारियां शुरू कर दीं, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी प्रकार का नुकसान न हो।
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वहीं नदी के आसपास डेरों में रहने वाले लोगों को मुनादी कराकर अलर्ट रहने की सलाह दी गई, ताकि अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में कोई व्यक्ति वहां फंस न जाए। वहीं लोगों को यह भी अपील की गई कि वे अफवाहों पर भी ध्यान न दें।
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वहीं, अंबाला के मुलाना क्षेत्र में लगभग 38 हजार क्यूसिक और कालाअम्ब में करीब सात हजार क्यूसिक जलस्तर दर्ज किया गया। अनुमान था कि यह पानी आगे बढ़ते हुए शाहाबाद क्षेत्र में भी जलस्तर बढ़ा सकता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क भी किया तो वहीं
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संबंधित टीमों को भी अलर्ट रहने के लिए निर्देश
मारकंडा किनारे बसे तंगोर, कठुआ, कलसाना, मुगल माजरा, मलिकपुर, गुमटी और अरूप नगर सहित कई गांवों में अक्सर मारकंडा के पानी से नुकसान होता है। हर वर्ष तेज बहाव के दौरान इन गांवों की कृषि भूमि और फसलें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। पिछले वर्ष मारकंडा नदी के पानी ने बड़ा कहर बरपाया था और आसपास के उक्त गांवों के साथ-साथ बड़े स्तर पर फसलों को भी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में इस बार फिर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एहतियाती तैयारियां शुरू कर दीं, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में किसी प्रकार का नुकसान न हो।
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वहीं नदी के आसपास डेरों में रहने वाले लोगों को मुनादी कराकर अलर्ट रहने की सलाह दी गई, ताकि अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में कोई व्यक्ति वहां फंस न जाए। वहीं लोगों को यह भी अपील की गई कि वे अफवाहों पर भी ध्यान न दें।