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शो पीस बने दीवारों पर लगाए अग्निशमन यंत्र
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 26 Mar 2016 12:38 AM IST
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अग्निशमन यंत्र
- फोटो : amar ujala
आमजन को सुरक्षा देने का दावा करने वाली पुलिस के मुखिया एसपी का कार्यालय खुद ही असुरक्षित है। जहां आगजनी जैसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र महज शो पीस बनकर रह गए हैं। अधिकारी अपने कार्यालय व भवन की सुरक्षा को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं, इसका अंदाजा इन यंत्रों से ही लगाया जा सकता है, जिन्हें लगभग पांच वर्षों से भी अधिक समय से रीफिल तक करवाने की जहमत नहीं उठाई गई है।
एसपी कार्यालय भवन में पहली मंजिल पर ही एसपी के अलावा दो डीएसपी कार्यालय भी स्थित हैं तो वहीं साईबर सेल, शिकायत केंद्र विभाग से संबधित दूसरे कार्यालय भी इसी तल पर बनाए गए हैं, जहां हर कार्यालय का भारी मात्रा में रिकॉर्ड भी मौजूद है। एसपी सहित दूसरे पुलिस अधिकारियों को किसी न किसी मामले को लेकर मिलने के लिए यहां हर रोज सैकड़ों लोग भी आते हैं तो वहीं भारी संख्या में पुलिसकर्मी भी इन कार्यालयों में कार्यरत रहते हैं। ऐसे में अचानक होने वाली आगजनी जैसी किसी घटना को रोकने के लिए यहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था दिखाई नहीं पड़ रही हैं।
यह कार्यालय एवं भवन कितना सुरक्षित है, इसका अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि एसपी कार्यालय के सामने ही स्थित शिकायत केंद्र के बाहर व साईबर सेल के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों को रीफिल करवाना भी विभाग भूल गया। हालात ये है कि साईबर सेल के बाहर लगा अग्निशमन यंत्र जहां उस पर दर्शाई गई तिथि अनुसार वर्ष 2011 में रीफिल करवाया गया तो वहीं शिकायत केंद्र के बाहर लगे यंत्र के रीफिल करवाने का भी पता तक नहीं चल पा रहा है। ऐसे में कभी होई हादसा हो जाता है तो ये कार्यलय कितने सुरक्षित रह पाएंगे, यह समझना मुश्किल नहीं होगा। बता दें कि कुछ माह पहले ही एसपी कार्यालय भवन के साथ ही स्थित ई दिशा केंद्र में आग लग जाने से एक कंप्यूटर भी जलकर खाक हो गया था।
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देखा नहीं है, कल करवाएंगे जांच : डीएसपी
एसपी से संपर्क न हो पाने के बाद डीएसपी हैडक्वार्टर कृष्ण कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं थी। वह शनिवार को इनकी जांच करवाएंगे। ये यंत्र रीफिल नहीं करवाए गए तो यह बेहद ही गंभीर मामला है। ऐसे यंत्र अपडेट रखने की आवश्यकता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल भवन भी नहीं सुरक्षित
प्रदेश का एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल भी सुरक्षित नहीं है। यहां पर लगाए गए अग्निशमन यंत्र रीफिल करवाए जाने तो दूर जर्जर तक होने लगे हैं। अमर उजाला टीम ने जब अस्पताल भवन का जायजा लिया तो यह खुलासा हुआ। तीन मंजिला इस भवन में जहां अग्निशमन यंत्रों का अकाल पड़ा हुआ है वहीं कहीं-कहीं लगाए गए यह यंत्र भी महज दिवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने तथा प्रथम तल पर लगाए गए यह यंत्र पिछले लगभग 4 वर्र्षों से रीफिल नहीं करवाए जा सके हैं। बता दें कि यहां हर रोज सैकड़ों मरीज ईलाज के लिए आते हैं तो वहीं कुछ मरीज ईलाज के चलते दाखिल भी रहते हैं। उनसे मिलने वाले मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है तो अस्पताल का पूरा रिकॉर्ड भी यहां पर रखा हुआ है। ऐसे हालात में अस्पताल मे कोई हादासा होता है तो यहां रिकॉर्ड तक सुरक्षित बचाने के लिए आवश्यक प्रबंध नहीं है। यह भी अह्म बात है कि इसी अस्पताल के साथ ही स्थित प्रदेश के एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को जहां आयुष यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जा रहा है तो वहीं पूरी सरकार की निगाहें भी इस पर टिकी हैं। यहां तक कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज व विभाग के निदेशक साकेत कुमार भी कॉलेज एवं अस्पताल का दौरा कर चुके हैं।
मेरे संज्ञान में नहीं है मामला : डॉ उषा दत्त
कॉलेज प्राचार्या डॉ. उषा दत्त का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। वह शनिवार को इन्हें खुद देखेंगी और एक्सपायर अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं तो उन्हें बदलवाया जाएगा।
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एसपी कार्यालय भवन में पहली मंजिल पर ही एसपी के अलावा दो डीएसपी कार्यालय भी स्थित हैं तो वहीं साईबर सेल, शिकायत केंद्र विभाग से संबधित दूसरे कार्यालय भी इसी तल पर बनाए गए हैं, जहां हर कार्यालय का भारी मात्रा में रिकॉर्ड भी मौजूद है। एसपी सहित दूसरे पुलिस अधिकारियों को किसी न किसी मामले को लेकर मिलने के लिए यहां हर रोज सैकड़ों लोग भी आते हैं तो वहीं भारी संख्या में पुलिसकर्मी भी इन कार्यालयों में कार्यरत रहते हैं। ऐसे में अचानक होने वाली आगजनी जैसी किसी घटना को रोकने के लिए यहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था दिखाई नहीं पड़ रही हैं।
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यह कार्यालय एवं भवन कितना सुरक्षित है, इसका अंदाजा इसी से ही लगाया जा सकता है कि एसपी कार्यालय के सामने ही स्थित शिकायत केंद्र के बाहर व साईबर सेल के बाहर लगे अग्निशमन यंत्रों को रीफिल करवाना भी विभाग भूल गया। हालात ये है कि साईबर सेल के बाहर लगा अग्निशमन यंत्र जहां उस पर दर्शाई गई तिथि अनुसार वर्ष 2011 में रीफिल करवाया गया तो वहीं शिकायत केंद्र के बाहर लगे यंत्र के रीफिल करवाने का भी पता तक नहीं चल पा रहा है। ऐसे में कभी होई हादसा हो जाता है तो ये कार्यलय कितने सुरक्षित रह पाएंगे, यह समझना मुश्किल नहीं होगा। बता दें कि कुछ माह पहले ही एसपी कार्यालय भवन के साथ ही स्थित ई दिशा केंद्र में आग लग जाने से एक कंप्यूटर भी जलकर खाक हो गया था।
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देखा नहीं है, कल करवाएंगे जांच : डीएसपी
एसपी से संपर्क न हो पाने के बाद डीएसपी हैडक्वार्टर कृष्ण कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में अभी तक जानकारी नहीं थी। वह शनिवार को इनकी जांच करवाएंगे। ये यंत्र रीफिल नहीं करवाए गए तो यह बेहद ही गंभीर मामला है। ऐसे यंत्र अपडेट रखने की आवश्यकता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल भवन भी नहीं सुरक्षित
प्रदेश का एकमात्र आयुर्वेदिक अस्पताल भी सुरक्षित नहीं है। यहां पर लगाए गए अग्निशमन यंत्र रीफिल करवाए जाने तो दूर जर्जर तक होने लगे हैं। अमर उजाला टीम ने जब अस्पताल भवन का जायजा लिया तो यह खुलासा हुआ। तीन मंजिला इस भवन में जहां अग्निशमन यंत्रों का अकाल पड़ा हुआ है वहीं कहीं-कहीं लगाए गए यह यंत्र भी महज दिवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने तथा प्रथम तल पर लगाए गए यह यंत्र पिछले लगभग 4 वर्र्षों से रीफिल नहीं करवाए जा सके हैं। बता दें कि यहां हर रोज सैकड़ों मरीज ईलाज के लिए आते हैं तो वहीं कुछ मरीज ईलाज के चलते दाखिल भी रहते हैं। उनसे मिलने वाले मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है तो अस्पताल का पूरा रिकॉर्ड भी यहां पर रखा हुआ है। ऐसे हालात में अस्पताल मे कोई हादासा होता है तो यहां रिकॉर्ड तक सुरक्षित बचाने के लिए आवश्यक प्रबंध नहीं है। यह भी अह्म बात है कि इसी अस्पताल के साथ ही स्थित प्रदेश के एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज को जहां आयुष यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जा रहा है तो वहीं पूरी सरकार की निगाहें भी इस पर टिकी हैं। यहां तक कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज व विभाग के निदेशक साकेत कुमार भी कॉलेज एवं अस्पताल का दौरा कर चुके हैं।
मेरे संज्ञान में नहीं है मामला : डॉ उषा दत्त
कॉलेज प्राचार्या डॉ. उषा दत्त का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। वह शनिवार को इन्हें खुद देखेंगी और एक्सपायर अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं तो उन्हें बदलवाया जाएगा।