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Kurukshetra News: दवा खरीद में वित्तीय नियम दरकिनार, महंगे दाम पर खरीदीं
Sun, 21 Sep 2025 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 21 Sep 2025 02:03 AM IST
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय। संवाद
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 से 2025 तक हुई दवा खरीद में कथित अनियमितता सामने आई है। ऑडिट रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार विवि प्रशासन ने दवा खरीद में वित्तीय नियमों का पालन न करते हुए अधिक दरों पर दवाएं खरीदीं, जिससे करीब 46 लाख 82 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऑडिट विभाग ने अपनी जांच में बताया कि दवाएं खरीदने के लिए हरियाणा चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड (एचएमएससीएल) सक्षम प्राधिकरण था। इसके बावजूद विवि ने सीमित कोटेशन प्रक्रिया और भारतीय औषधि निगम लिमिटेड के माध्यम से महंगे दामों पर दवाएं खरीदीं।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि आयुष महानिदेशक की ओर से एचएमएससीएल के माध्यम से ही दवाएं खरीदने की अनुमति थी। इसके लिए जून 2023 से जून 2025 तक श्री धन्वंतरि हर्बल्स और मुल्तानी फार्मास्युटिकल लिमिटेड के साथ अनुबंध भी किया गया था। इन कंपनियों से कम दर पर दवाएं उपलब्ध हो सकती थीं, फिर भी अनुबंध के बजाय महंगे कोटेशन से खरीद की गई। ऑडिट विभाग का कहना है कि जब कम दर पर दवा उपलब्ध थी, तब विवि प्रशासन को वित्तीय विवेक का पालन करना चाहिए था। इसी के चलते विवि को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले पर विभाग से विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। आयुष विवि के कुलसचिव प्रो. बिजेंद्र तोमर का कहना है कि दवाइयां सेंटर गवर्नमेंट के अप्रूव्ड सोर्स से खरीदी गई थी, जिस पर आडिट विभाग ने आपत्ति जताई थी। इसका जवाब विभाग को दे दिया गया है।
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 से 2025 तक हुई दवा खरीद में कथित अनियमितता सामने आई है। ऑडिट रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार विवि प्रशासन ने दवा खरीद में वित्तीय नियमों का पालन न करते हुए अधिक दरों पर दवाएं खरीदीं, जिससे करीब 46 लाख 82 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। ऑडिट विभाग ने अपनी जांच में बताया कि दवाएं खरीदने के लिए हरियाणा चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड (एचएमएससीएल) सक्षम प्राधिकरण था। इसके बावजूद विवि ने सीमित कोटेशन प्रक्रिया और भारतीय औषधि निगम लिमिटेड के माध्यम से महंगे दामों पर दवाएं खरीदीं।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि आयुष महानिदेशक की ओर से एचएमएससीएल के माध्यम से ही दवाएं खरीदने की अनुमति थी। इसके लिए जून 2023 से जून 2025 तक श्री धन्वंतरि हर्बल्स और मुल्तानी फार्मास्युटिकल लिमिटेड के साथ अनुबंध भी किया गया था। इन कंपनियों से कम दर पर दवाएं उपलब्ध हो सकती थीं, फिर भी अनुबंध के बजाय महंगे कोटेशन से खरीद की गई। ऑडिट विभाग का कहना है कि जब कम दर पर दवा उपलब्ध थी, तब विवि प्रशासन को वित्तीय विवेक का पालन करना चाहिए था। इसी के चलते विवि को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले पर विभाग से विवि प्रशासन से जवाब मांगा है। आयुष विवि के कुलसचिव प्रो. बिजेंद्र तोमर का कहना है कि दवाइयां सेंटर गवर्नमेंट के अप्रूव्ड सोर्स से खरीदी गई थी, जिस पर आडिट विभाग ने आपत्ति जताई थी। इसका जवाब विभाग को दे दिया गया है।
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