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Kurukshetra News: किसानों ने चम्मच से थाली बजाकर रोष मार्च निकाल, जिला सचिवालय को घेरा
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कुरुक्षेत्र। लघु सचिवालय का घेराव करने के लिए जाते किसान।
कुरुक्षेत्र। क्षतिपूर्ति पोर्टल बंद होने और बेमौसमी बारिश से खराब हुई फसलों की गिरदावरी न होने पर सोमवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर किसानों ने जिला सचिवालय लघु सचिवालय का घेराव किया। इस दौरान विभिन्न किसान संगठनों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर जोरदार प्रदर्शन किया। इससे पहले सुबह करीब साढ़े 11 बजे जसबीर जैनपुर की अध्यक्षता में एसकेएम से संबंधित विभिन्न किसान यूनियन के सदस्य चम्मच से थाली बजाते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। करीब ढाई बजे तक चले प्रदर्शन के बाद किसानों ने लघु सचिवालय में ही सरकार के पुतले को आग के हवाले किया।
वहीं चार घंटे के प्रदर्शन के बाद किसानों के बीच पहुंचे अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी ने तीन दिन के भीतर क्षतिपूर्ति पोर्टल को चलाने और गिरदावरी कराने का आश्वासन दिया, जबकि एसकेएम ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि अगर तीन दिन के भीतर उनकी दोनों मांग को पूरा नहीं किया गया तो किसान ढोल, नगाड़े और बैंडबाजे के साथ जुलूस निकालकर सरकार व प्रशासन को जगाने का प्रयास करेंगे। इसके बाद भी प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू नंबरदार ने बताया कि पिछले दिनों हुई बेमौसमी बारिश से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इस नुकसान का उचित मुआवजा देने के लिए सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन मांगे हैं, मगर पिछले कई दिनों से यह पोर्टल बंद पड़ा है। पोर्टल पर आवेदन करने के लिए क्षेत्र के किसान भटकने को मजबूर हो रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के नेता और प्रशासन क्षतिपूर्ति पोर्टल पर मुआवजा देने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।
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वहीं प्रदेश महासचिव संजीव आलमपुर ने बताया कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर तीन दिन के भीतर आवेदन करना होता है, मगर यहां पोर्टल खुल ही नहीं पाया। आरोप लगाया कि अधिकारी व सत्ता पक्ष के चहेतों के लिए मात्र कुछ समय के लिए पोर्टल खोला जाता है, उसके आवेदन के बाद तुरंत पोर्टल को बंद कर दिया जा रहा है। इस मौके पर जय सिंह, बलविंद्र बाजवा, भूरा राम, संजीव कुमार, लखविंद्र सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
नहीं पहुंचे पटवारी
प्रशासन को बार-बार चेताने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया है। कई बार मांग उठाने के बाद भी नुकसान का आकलन करने वाली टीम और पटवारी जायजा लेने नहीं पहुंचे। इससे नाराज होकर किसानों ने लघु सचिवालय का घेराव किया। साथ ही चेतावनी दी कि तीन दिन के भीतर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो ढोल, नगाड़े और बैंड बाजे के साथ जुलूस निकालकर प्रशासन व सरकार को जगाने का काम करेंगे।
तीसरे दिन जिलेभर में नहीं हुई खरीद
उधर, सरकारी खरीद के तीसरे दिन जिलेभर की अनाज मंडी में कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हुई। हालांकि दिनभर अनाज मंडी में गेहूं का आवक होती रही, मगर फसल को बेचने के लिए किसान दिनभर भटकते दिखे। किसानों का आरोप था कि अधिकारी फसल में नमी की अधिक मात्रा बताकर खरीद नहीं कर रहे हैं, जबकि किसानों को खुले आसमान के नीचे फसल डालने को मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही उसकी रखवाली भी करनी पड़ रही है।
एडीसी बोले, 25 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर खोला जाएगा पोर्टल
एडीसी अखिल पिलानी का कहना है कि पोर्टल बंद नहीं हुआ है। यह फसल में 25 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर ही खोला जाएगा। लेकिन किसानों का कहना है कि सभी के लिए खोला जाए। अब इस संबंध में प्लान किया जा रहा है तो वहीं पटवारी आदि को भेजकर फसलों में नुकसान का पता कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंडियों में गेहूं खरीद शुरू कर दी गई है, लेकिन तय मापदंड पर ही आने वाली गेहूं खरीद की जा सकती है।
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वहीं चार घंटे के प्रदर्शन के बाद किसानों के बीच पहुंचे अतिरिक्त उपायुक्त अखिल पिलानी ने तीन दिन के भीतर क्षतिपूर्ति पोर्टल को चलाने और गिरदावरी कराने का आश्वासन दिया, जबकि एसकेएम ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि अगर तीन दिन के भीतर उनकी दोनों मांग को पूरा नहीं किया गया तो किसान ढोल, नगाड़े और बैंडबाजे के साथ जुलूस निकालकर सरकार व प्रशासन को जगाने का प्रयास करेंगे। इसके बाद भी प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू नंबरदार ने बताया कि पिछले दिनों हुई बेमौसमी बारिश से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इस नुकसान का उचित मुआवजा देने के लिए सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन मांगे हैं, मगर पिछले कई दिनों से यह पोर्टल बंद पड़ा है। पोर्टल पर आवेदन करने के लिए क्षेत्र के किसान भटकने को मजबूर हो रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के नेता और प्रशासन क्षतिपूर्ति पोर्टल पर मुआवजा देने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।
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वहीं प्रदेश महासचिव संजीव आलमपुर ने बताया कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर तीन दिन के भीतर आवेदन करना होता है, मगर यहां पोर्टल खुल ही नहीं पाया। आरोप लगाया कि अधिकारी व सत्ता पक्ष के चहेतों के लिए मात्र कुछ समय के लिए पोर्टल खोला जाता है, उसके आवेदन के बाद तुरंत पोर्टल को बंद कर दिया जा रहा है। इस मौके पर जय सिंह, बलविंद्र बाजवा, भूरा राम, संजीव कुमार, लखविंद्र सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
नहीं पहुंचे पटवारी
प्रशासन को बार-बार चेताने के बाद भी पोर्टल नहीं खोला गया है। कई बार मांग उठाने के बाद भी नुकसान का आकलन करने वाली टीम और पटवारी जायजा लेने नहीं पहुंचे। इससे नाराज होकर किसानों ने लघु सचिवालय का घेराव किया। साथ ही चेतावनी दी कि तीन दिन के भीतर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो ढोल, नगाड़े और बैंड बाजे के साथ जुलूस निकालकर प्रशासन व सरकार को जगाने का काम करेंगे।
तीसरे दिन जिलेभर में नहीं हुई खरीद
उधर, सरकारी खरीद के तीसरे दिन जिलेभर की अनाज मंडी में कहीं भी गेहूं की खरीद नहीं हुई। हालांकि दिनभर अनाज मंडी में गेहूं का आवक होती रही, मगर फसल को बेचने के लिए किसान दिनभर भटकते दिखे। किसानों का आरोप था कि अधिकारी फसल में नमी की अधिक मात्रा बताकर खरीद नहीं कर रहे हैं, जबकि किसानों को खुले आसमान के नीचे फसल डालने को मजबूर होना पड़ रहा है। साथ ही उसकी रखवाली भी करनी पड़ रही है।
एडीसी बोले, 25 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर खोला जाएगा पोर्टल
एडीसी अखिल पिलानी का कहना है कि पोर्टल बंद नहीं हुआ है। यह फसल में 25 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर ही खोला जाएगा। लेकिन किसानों का कहना है कि सभी के लिए खोला जाए। अब इस संबंध में प्लान किया जा रहा है तो वहीं पटवारी आदि को भेजकर फसलों में नुकसान का पता कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंडियों में गेहूं खरीद शुरू कर दी गई है, लेकिन तय मापदंड पर ही आने वाली गेहूं खरीद की जा सकती है।

कुरुक्षेत्र। लघु सचिवालय का घेराव करने के लिए जाते किसान।

कुरुक्षेत्र। लघु सचिवालय का घेराव करने के लिए जाते किसान।