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गेट पर ट्रैक्टर-ट्राली लगा किसान व पल्लेदारों ने किया प्रदर्शन
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धान की सरकारी खरीद शुरू न होने पर किसानों का गुस्सा भड़क गया। मजदूरी में कटौती के विरोध में हड़ताल पर पल्लेदारों को लेकर साथ लेकर किसान अनाज मंडी से ट्रैक्टर-ट्राली में नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। किसानों के आने की भनक लगते ही पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया तथा लघु सचिवालय का प्रवेश द्वार बंद कर दिया।
किसान डीसी कार्यालय के सामने धान डालने के इरादे से आए थे, मगर पुलिस ने गेट बंद करके उनको अंदर नहीं घुसने दिया। इसके जवाब में किसान प्रवेश द्वार पर ट्रैक्टर-ट्राली लगा पर डट गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो किसान प्रवेश द्वारा ही धान डालना शुरू कर देंगे। साढ़े 3 बजे से करीब सवा 4 बजे तक किसानों ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया। पौना घंटे चले प्रदर्शन के बाद एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक और डीएफएसई केके गोयल मौके पर पहुंचे तथा किसानों को समझाने का प्रयास किया, मगर किसान अपनी मांग पर अड़े रहे।
इससे पहले किसानों ने खरीद न होने को लेकर मार्केट कमेटी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पहले से हड़ताल पर बैठे पल्लेदार भी मौके पर पहुंच गए और किसानों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान किसान रेस्ट में ट्रैक्टर-ट्राली से धान उतरती देख किसान भड़क उठे और अधिकारियों व चालक से रेस्ट हाउस में धान उतारने को लेकर पूछताछ करने लगे। किसानों को जब पता चला कि यह धान सत्ता पक्ष के नेता के किसी चहेते की है तो किसान भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्केट कमेटी के अधिकारियों को आम किसानों की फसल की कोई चिंता नहीं है। उनकी फसल मंडी में खुले आसमान के नीचे बिना किसी सुरक्षा के पड़ी है।
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यहां तक बारिश के समय भी किसी अधिकारी ने उनकी फसल को बचाने का प्रयास नहीं किया और न ही बारिश के बाद किसान व फसल की कोई सुध ली, मगर अधिकारी भाजपा नेताओं के इशारे पर उनके चहेतों की फसल को अपने संरक्षण में किसान रेस्ट हाउस में डलवा रहे है। किसानों ने फसल लेकर आए ट्रैक्टर-ट्राली को किसान रेस्ट हाउस में रोक लिया तथा मार्केट कमेटी कार्यालय पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान व पल्लेदारों का रोष प्रदर्शन देकर मार्केट कमेटी ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
मार्केट कमेटी कार्यालय पर लगाया ताला
सत्ता पक्ष के नेता के चहेतों की फसल रेस्ट हाउस में उतरते देख किसान नाराज हो गए। यहां से नारेबाजी करते किसान और पल्लेदार बगल में ही मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे तथा अधिकारियों को कार्यालय खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, मामले की सूचना पाकर थाना कृष्णा गेट प्रभारी मलकीत सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने की कोशिश की, मगर किसानों ने पुलिस की परवाह न करते हुए कमेटी कार्यालय पर ताला जड़ दिया और लघु सचिवालय पर धान डालने की योजना बनाकर सचिवालय की ओर बढ़ गए।
एसडीएम ने दिया लिखित आश्वासन
लघु सचिवालय गेट पर किसानों व पल्लेदारों के प्रदर्शन की सूचना पाकर एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक और डीएफएससी केके गोयल किसानों को समझाने पहुंचे। एसडीएम नरेंद्र पाल ने पल्लेदारों की मजदूरी में कटौती को लेकर किसानों व पल्लेदारों को उनकी मांग चंडीगढ़ उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का लिखित आश्वासन दिया। वहीं, किसानों ने प्रशासन के समक्ष खरीद शीघ्र शुरू करने की मांग भी रखी।
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किसान डीसी कार्यालय के सामने धान डालने के इरादे से आए थे, मगर पुलिस ने गेट बंद करके उनको अंदर नहीं घुसने दिया। इसके जवाब में किसान प्रवेश द्वार पर ट्रैक्टर-ट्राली लगा पर डट गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो किसान प्रवेश द्वारा ही धान डालना शुरू कर देंगे। साढ़े 3 बजे से करीब सवा 4 बजे तक किसानों ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया। पौना घंटे चले प्रदर्शन के बाद एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक और डीएफएसई केके गोयल मौके पर पहुंचे तथा किसानों को समझाने का प्रयास किया, मगर किसान अपनी मांग पर अड़े रहे।
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इससे पहले किसानों ने खरीद न होने को लेकर मार्केट कमेटी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पहले से हड़ताल पर बैठे पल्लेदार भी मौके पर पहुंच गए और किसानों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान किसान रेस्ट में ट्रैक्टर-ट्राली से धान उतरती देख किसान भड़क उठे और अधिकारियों व चालक से रेस्ट हाउस में धान उतारने को लेकर पूछताछ करने लगे। किसानों को जब पता चला कि यह धान सत्ता पक्ष के नेता के किसी चहेते की है तो किसान भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्केट कमेटी के अधिकारियों को आम किसानों की फसल की कोई चिंता नहीं है। उनकी फसल मंडी में खुले आसमान के नीचे बिना किसी सुरक्षा के पड़ी है।
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यहां तक बारिश के समय भी किसी अधिकारी ने उनकी फसल को बचाने का प्रयास नहीं किया और न ही बारिश के बाद किसान व फसल की कोई सुध ली, मगर अधिकारी भाजपा नेताओं के इशारे पर उनके चहेतों की फसल को अपने संरक्षण में किसान रेस्ट हाउस में डलवा रहे है। किसानों ने फसल लेकर आए ट्रैक्टर-ट्राली को किसान रेस्ट हाउस में रोक लिया तथा मार्केट कमेटी कार्यालय पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान व पल्लेदारों का रोष प्रदर्शन देकर मार्केट कमेटी ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
मार्केट कमेटी कार्यालय पर लगाया ताला
सत्ता पक्ष के नेता के चहेतों की फसल रेस्ट हाउस में उतरते देख किसान नाराज हो गए। यहां से नारेबाजी करते किसान और पल्लेदार बगल में ही मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे तथा अधिकारियों को कार्यालय खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, मामले की सूचना पाकर थाना कृष्णा गेट प्रभारी मलकीत सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने की कोशिश की, मगर किसानों ने पुलिस की परवाह न करते हुए कमेटी कार्यालय पर ताला जड़ दिया और लघु सचिवालय पर धान डालने की योजना बनाकर सचिवालय की ओर बढ़ गए।
एसडीएम ने दिया लिखित आश्वासन
लघु सचिवालय गेट पर किसानों व पल्लेदारों के प्रदर्शन की सूचना पाकर एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक और डीएफएससी केके गोयल किसानों को समझाने पहुंचे। एसडीएम नरेंद्र पाल ने पल्लेदारों की मजदूरी में कटौती को लेकर किसानों व पल्लेदारों को उनकी मांग चंडीगढ़ उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का लिखित आश्वासन दिया। वहीं, किसानों ने प्रशासन के समक्ष खरीद शीघ्र शुरू करने की मांग भी रखी।