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Kurukshetra News: किसान प्रतिनिधि समस्याएं लेकर पहुंचे उपायुक्त दरबार, राज्यपाल के नाम सौंपा मांग पत्र
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कुरुक्षेत्र। मांग पत्र देने के बाद डीसी कार्यालय के बाहर किसान प्रतिनिधि । विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। अखिल भारतीय किसान सभा प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल के नाम मांग पत्र सौंपा है जिसमें किसानों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है। किसान नेताओं प्रताप सिंह, रोशन लाल, महावीर देहिया, राजविंदर चांदी, रमेश्वर सिंह और सुनील रत्तन ने कहा कि जिले के किसानों को इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रताप सिंह ने बताया कि धान की फसल हाल ही में हुई भारी बरसात और रोगों (पीलापन, झुलसा व संक्रमण) से बुरी तरह प्रभावित हुई है जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार को तुरंत गिरदावरी कराकर प्रति एकड़ मुआवजा घोषित करना चाहिए।
खाद की किल्लत गहराती जा रही है। अनेक दुकानदार उर्वरक देते समय जबरन अन्य वस्तुएं जैसे कीटनाशक और बीज बेच रहे हैं। इस जबरन बिक्री पर रोक लगाई जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। फसलों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, किसानों की फसलों की खरीद बिना देरी की जाए और भुगतान 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में किया जाए। पराली प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जाए। पराली जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय किसानों को तकनीकी सहायता और मशीनरी पर पर्याप्त सब्सिडी दी जाए।
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डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों की लागत को घटाने के लिए सरकार को राहत देनी चाहिए। किसानों को सस्ती या नि:शुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार अगर किसानों की इन वास्तविक मांगों की अनदेखी करती है तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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प्रताप सिंह ने बताया कि धान की फसल हाल ही में हुई भारी बरसात और रोगों (पीलापन, झुलसा व संक्रमण) से बुरी तरह प्रभावित हुई है जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार को तुरंत गिरदावरी कराकर प्रति एकड़ मुआवजा घोषित करना चाहिए।
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खाद की किल्लत गहराती जा रही है। अनेक दुकानदार उर्वरक देते समय जबरन अन्य वस्तुएं जैसे कीटनाशक और बीज बेच रहे हैं। इस जबरन बिक्री पर रोक लगाई जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। फसलों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, किसानों की फसलों की खरीद बिना देरी की जाए और भुगतान 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में किया जाए। पराली प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जाए। पराली जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय किसानों को तकनीकी सहायता और मशीनरी पर पर्याप्त सब्सिडी दी जाए।
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डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों की लागत को घटाने के लिए सरकार को राहत देनी चाहिए। किसानों को सस्ती या नि:शुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार अगर किसानों की इन वास्तविक मांगों की अनदेखी करती है तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

कुरुक्षेत्र। मांग पत्र देने के बाद डीसी कार्यालय के बाहर किसान प्रतिनिधि । विज्ञप्ति