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नीडोनॉमिक्स से ही संभव है नैतिक व सतत विकास : प्रो. मदन
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कुरुक्षेत्र। प्रो. मदन मोहन गोयल।
कुरुक्षेत्र। नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक, तीन बार कुलपति रह चुके व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो. मदन मोहन गोयल ने कोल्हापुर नगर निगम के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज की ओर से आयोजित बहु-विषयक अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य दिया। सम्मेलन में उद्यमिता, नवाचार व सामाजिक विज्ञान अंतर्दृष्टि के माध्यम से गतिशील समाज और सतत विकास विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नीडोनॉमिक्स से ही नैतिक व सतत विकास संभव है।
कार्यक्रम की शुरुआत सम्मेलन निदेशक व प्राचार्य डॉ. बाबासो एन उलपे के स्वागत भाषण से हुई। संयोजक व ग्रंथपाल आरआर मंगले ने प्रो. एमएम गोयल का परिचय कराया। नैतिक उद्यमिता, नवाचार और सतत विकास के लिए नीडोनॉमिक्स की रूपरेखा विषय पर बोलते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि अर्थशास्त्र का उद्देश्य असीमित लालच नहीं बल्कि वास्तविक मानवीय आवश्यकताओं की जिम्मेदार पूर्ति होना चाहिए।
उन्होंने आवश्यकता, चाहत और लालच के बीच स्पष्ट अंतर करने पर जोर दिया। संसाधनों के इष्टतम उपयोग, परिपत्र उत्पादन प्रणाली, सामुदायिक समृद्धि और अंतर-पीढ़ीगत उत्तरदायित्व को सतत विकास का आधार बताया। ट्रिपल हार्मनी मॉडल स्वयं, समाज और प्रकृति के साथ सामंजस्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि समावेशन दान नहीं बल्कि संरचनात्मक न्याय है। उन्होंने उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र में नीडोनॉमिक्स को अपनाने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत सम्मेलन निदेशक व प्राचार्य डॉ. बाबासो एन उलपे के स्वागत भाषण से हुई। संयोजक व ग्रंथपाल आरआर मंगले ने प्रो. एमएम गोयल का परिचय कराया। नैतिक उद्यमिता, नवाचार और सतत विकास के लिए नीडोनॉमिक्स की रूपरेखा विषय पर बोलते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि अर्थशास्त्र का उद्देश्य असीमित लालच नहीं बल्कि वास्तविक मानवीय आवश्यकताओं की जिम्मेदार पूर्ति होना चाहिए।
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उन्होंने आवश्यकता, चाहत और लालच के बीच स्पष्ट अंतर करने पर जोर दिया। संसाधनों के इष्टतम उपयोग, परिपत्र उत्पादन प्रणाली, सामुदायिक समृद्धि और अंतर-पीढ़ीगत उत्तरदायित्व को सतत विकास का आधार बताया। ट्रिपल हार्मनी मॉडल स्वयं, समाज और प्रकृति के साथ सामंजस्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि समावेशन दान नहीं बल्कि संरचनात्मक न्याय है। उन्होंने उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र में नीडोनॉमिक्स को अपनाने का आह्वान किया।
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