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कुंटिया चुनाव : गहमागहमी तेज, चल रहा बैठकों का दौर
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कुरुक्षेत्र। केयू में होने वाले कुंटिया चुनाव को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। चुनाव पुराने पैटर्न पर कराने पर संघ के पदाधिकारियों और केयू प्रशासन में चर्चा जारी है। वहीं चुनाव मैदान में उतरने वाले दल भी अपने कार्यकर्ताओं से मंथन करने में जुटे हैं। इन बैठकों में चुनाव को लेकर नई रणनीतियों पर चर्चा की जा रही हैं। इसके साथ ही चुनाव को लेकर गहमागहमी एकाएक बढ़ गई है।
निवर्तमान कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर का कहना है कि कुछ समय पहले कार्यकारिणी की बैठक एसोसिएशन कार्यालय में हुई। जिसमें सभी कार्यकारिणी सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि कुंटिया का चुनाव विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से करवाया जाए, जिससे कुंटिया के मान-सम्मान को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है, जिसका जवाब केयू प्रशासन की ओर से जल्द आएगा।
निवर्तमान महासचिव अनिल लोहट ने कहा कि कुंटिया सभी कर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए सदैव तैयार हैं। कर्मचारियों की लंबित फाइलों और अन्य मामलों के लिए कर्मचारी कुंटिया कार्यालय आते हैं। इन सभी कर्मचारियों की मांग है कि प्रमोशन से संबंधित मामलों के प्रति सकारात्मक परिणाम आने के बाद ही कुंटिया का चुनाव कराया जाए।
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कुंटिया के पूर्व प्रधान नीलकंठ शर्मा का कहना है कि निवर्तमान कुंटिया कार्यकारिणी का कार्यकाल अप्रैल माह में समाप्त हो चुका है, जल्द से जल्द चुनाव का शेड्यूल जारी होना चाहिए।चुनाव शेड्यूल को लेकर कई बार निवर्तमान कुंटिया कार्यकारिणी से मुलाकात कर चुके है। कुंटिया कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष का होता है, लेकिन वर्तमान कार्यकारिणी को लगभग एक वर्ष और एक माह से ऊपर का समय हो चुका है जो कि कुंटिया संविधान के अनुसार उचित नहीं है।
कुंटिया पूर्व महासचिव रविंद्र तोमर का कहना है कि कुंटिया कार्यकारिणी को कर्मचारियों की प्रमोशन संबंधित मामलों में प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई करवानी चाहिए। सभी कर्मचारी कुंटिया चुनाव को त्योहार के रूप में मनाते है। चुनाव के पश्चात जो भी कुंटिया कार्यकारिणी बनेगी वो लंबित मांगों पर कार्रवाई करेगी।
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निवर्तमान कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर का कहना है कि कुछ समय पहले कार्यकारिणी की बैठक एसोसिएशन कार्यालय में हुई। जिसमें सभी कार्यकारिणी सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि कुंटिया का चुनाव विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से करवाया जाए, जिससे कुंटिया के मान-सम्मान को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है, जिसका जवाब केयू प्रशासन की ओर से जल्द आएगा।
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निवर्तमान महासचिव अनिल लोहट ने कहा कि कुंटिया सभी कर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए सदैव तैयार हैं। कर्मचारियों की लंबित फाइलों और अन्य मामलों के लिए कर्मचारी कुंटिया कार्यालय आते हैं। इन सभी कर्मचारियों की मांग है कि प्रमोशन से संबंधित मामलों के प्रति सकारात्मक परिणाम आने के बाद ही कुंटिया का चुनाव कराया जाए।
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कुंटिया के पूर्व प्रधान नीलकंठ शर्मा का कहना है कि निवर्तमान कुंटिया कार्यकारिणी का कार्यकाल अप्रैल माह में समाप्त हो चुका है, जल्द से जल्द चुनाव का शेड्यूल जारी होना चाहिए।चुनाव शेड्यूल को लेकर कई बार निवर्तमान कुंटिया कार्यकारिणी से मुलाकात कर चुके है। कुंटिया कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष का होता है, लेकिन वर्तमान कार्यकारिणी को लगभग एक वर्ष और एक माह से ऊपर का समय हो चुका है जो कि कुंटिया संविधान के अनुसार उचित नहीं है।
कुंटिया पूर्व महासचिव रविंद्र तोमर का कहना है कि कुंटिया कार्यकारिणी को कर्मचारियों की प्रमोशन संबंधित मामलों में प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई करवानी चाहिए। सभी कर्मचारी कुंटिया चुनाव को त्योहार के रूप में मनाते है। चुनाव के पश्चात जो भी कुंटिया कार्यकारिणी बनेगी वो लंबित मांगों पर कार्रवाई करेगी।