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रामगढ़ रोड में सरपंच पद का विवाद गहराया
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 14 Jan 2016 12:24 AM IST
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रामगढ़ रोड में सरपंच पद के लिए चल रहे विवाद गहराता जा रहा है। एक प्रत्याशी मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गयाहै।
राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित कर 24 जनवरी को होने की घोषणा कर दी है। इस मामले में दूसरे पक्ष ने भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। इस बीच दो प्रत्याशियों के पर्चे रद्द होने के बाद बची एक प्रत्याशी को रिटर्निंग अधिकारी ने निर्वाचन का प्रमाण पत्र भी दे दिया है।
यह विवाद उस समय गहराया जब बुधवार को चुनाव अधिकारी गांव पहुंचे और चुनाव चिह्न आवंटित करने लगे। इस पर गांव में बहसबाजी शुरू हो गई। तनाव का माहौल बना हुआ है।
चुनाव अधिकारियों की टीम बुधवार को गांव के सरकारी स्कूल में दोनों पक्षों को चुनाव चिह्न देने के लिए पहुंची। टीम ने दोनों प्रत्याशियों को स्कूल में बुलाया। लेकिन, एक प्रत्याशी अलका देवी और उसके परिजनों ने चुनाव चिह्न लेने से इनकार कर दिया।
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उनका कहना था कि जब सरपंच निर्वाचित हो चुका है, तो चुनाव चिह्न क्यों लें। चुनाव अधिकारी चुने गए को प्रमाण पत्र भी दे चुके हैं। बहुत देर बहसबाजी के बाद आखिरकार उन्होंने चुनाव चिह्न ले लिया। साथ ही मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात भी कही। सरपंच पद की उम्मीदवार अलका ने बताया कि पूनम के नाम पंचायती भूमि का विवाद है। इसलिए अधिकारियों ने उसका पर्चा रद्द किया था।
प्रशासन की गलती है इस मामले में
गांव के पूर्व सरपंच अशोक ने बताया कि प्रत्याशी पूनम का पर्चा चुनाव अधिकारियों ने जानबूझ कर रद्द कर दिया था, लेकिन वह हाईकोर्ट में चली गई। लेकिन, चुनाव अधिकारी ने दो उम्मीदवारों का पर्चा रद्द होने के बाद अलका को सरपंच घोषित कर दिया तो दोबारा चुनाव किसलिए किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि या तो पहले अधिकारियों ने दूसरे उम्मीदवार का पर्चा गलत रद्द किया था या अब उसे गलत तरीके से चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि दस जनवरी को पंच और जिला परिषद यहां तक की ब्लॉक समिति के उम्मीदवारों के लिए वोट डाल चुके हैं। एक जनवरी को अलका सरपंच बन गई थी। इसका सबूत उनके पास है।
गलत ढंग से भूमि उनके नाम दिखाई गई
सरपंच पद की दूसरी उम्मीदवार पूनम का दावा है कि गांव के कुछ लोगों ने पंचायती भूमि उनके नाम कर दी। इसके बाद यह विवाद हुआ और उनका पर्चा रद्द किया गया। उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर सभी कागज दिखाए तो कोर्ट के आदेश पर चुनाव पर रोक लगा दी गई। 24 जनवरी को चुनाव करने का निर्णय लिया गया। आज उन्हें चुनाव चिह्न मिल चुके हैं।
पिहोवा के केवल गांव रामगढ़ रोड में ही चुनाव होना है। बुधवार को इस गांव में दोनों उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न दे दिए हैं। एक प्रत्याशी अलका के पास सरपंच घोषित किए जाने के पत्र होने की जानकारी नहीं है। गांव में चुनाव शांतिपूर्वक करवाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
डॉ. किरण सिंह, एसडीएम एवं रिटर्निंग अधिकारी, पिहोवा।
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राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित कर 24 जनवरी को होने की घोषणा कर दी है। इस मामले में दूसरे पक्ष ने भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। इस बीच दो प्रत्याशियों के पर्चे रद्द होने के बाद बची एक प्रत्याशी को रिटर्निंग अधिकारी ने निर्वाचन का प्रमाण पत्र भी दे दिया है।
यह विवाद उस समय गहराया जब बुधवार को चुनाव अधिकारी गांव पहुंचे और चुनाव चिह्न आवंटित करने लगे। इस पर गांव में बहसबाजी शुरू हो गई। तनाव का माहौल बना हुआ है।
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चुनाव अधिकारियों की टीम बुधवार को गांव के सरकारी स्कूल में दोनों पक्षों को चुनाव चिह्न देने के लिए पहुंची। टीम ने दोनों प्रत्याशियों को स्कूल में बुलाया। लेकिन, एक प्रत्याशी अलका देवी और उसके परिजनों ने चुनाव चिह्न लेने से इनकार कर दिया।
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उनका कहना था कि जब सरपंच निर्वाचित हो चुका है, तो चुनाव चिह्न क्यों लें। चुनाव अधिकारी चुने गए को प्रमाण पत्र भी दे चुके हैं। बहुत देर बहसबाजी के बाद आखिरकार उन्होंने चुनाव चिह्न ले लिया। साथ ही मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात भी कही। सरपंच पद की उम्मीदवार अलका ने बताया कि पूनम के नाम पंचायती भूमि का विवाद है। इसलिए अधिकारियों ने उसका पर्चा रद्द किया था।
प्रशासन की गलती है इस मामले में
गांव के पूर्व सरपंच अशोक ने बताया कि प्रत्याशी पूनम का पर्चा चुनाव अधिकारियों ने जानबूझ कर रद्द कर दिया था, लेकिन वह हाईकोर्ट में चली गई। लेकिन, चुनाव अधिकारी ने दो उम्मीदवारों का पर्चा रद्द होने के बाद अलका को सरपंच घोषित कर दिया तो दोबारा चुनाव किसलिए किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि या तो पहले अधिकारियों ने दूसरे उम्मीदवार का पर्चा गलत रद्द किया था या अब उसे गलत तरीके से चुनाव मैदान में उतारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि दस जनवरी को पंच और जिला परिषद यहां तक की ब्लॉक समिति के उम्मीदवारों के लिए वोट डाल चुके हैं। एक जनवरी को अलका सरपंच बन गई थी। इसका सबूत उनके पास है।
गलत ढंग से भूमि उनके नाम दिखाई गई
सरपंच पद की दूसरी उम्मीदवार पूनम का दावा है कि गांव के कुछ लोगों ने पंचायती भूमि उनके नाम कर दी। इसके बाद यह विवाद हुआ और उनका पर्चा रद्द किया गया। उन्होंने हाईकोर्ट में जाकर सभी कागज दिखाए तो कोर्ट के आदेश पर चुनाव पर रोक लगा दी गई। 24 जनवरी को चुनाव करने का निर्णय लिया गया। आज उन्हें चुनाव चिह्न मिल चुके हैं।
पिहोवा के केवल गांव रामगढ़ रोड में ही चुनाव होना है। बुधवार को इस गांव में दोनों उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न दे दिए हैं। एक प्रत्याशी अलका के पास सरपंच घोषित किए जाने के पत्र होने की जानकारी नहीं है। गांव में चुनाव शांतिपूर्वक करवाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
डॉ. किरण सिंह, एसडीएम एवं रिटर्निंग अधिकारी, पिहोवा।