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Kurukshetra News: ठंड और शीतलहर का पड़ रहा असर, बढ़े सांस के रोगी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ठंड बढ़ने और शीतलहर चलने से लोगों की सेहत भी बिगड़ने लगी है। इससे अस्पतालों की ओपीडी में इजाफा हो रहा है। ठंड बढ़ने से सांस, हृदय और बीपी के रोगियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ठंड व शीतलहर से एलएनजेपी अस्पताल की ओपीडी भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में पहले जहां ओपीडी 700 के आसपास होती थी, अब एक हजार के पार चली गई है। शीतलहर से अस्पताल में सिर दर्द, बुखार और खांसी-जुकाम और गले व बदन में दर्द के मरीजों की ओपीडी बढ़ी है। इसके अलावा हृदय और बीपी के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। लकवा (अधरंग) के मामले भी सामने आने लगे हैं।
जिला अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित प्रतिदिन 15-20 मरीज आते थे, मगर अब 40-45 मरीज आने लगे हैं। बीपी और अस्थमा के मरीज भी पहले की अपेक्षा बढ़ गए हैं। वहीं, आने वाले दिनों में मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है, जिससे अस्थमा व हृदय रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। हालांकि अस्पताल में अभी भी सांस के मरीज पहुंच रहे हैं।
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ठंड में बीपी बढ़ना खतरनाक ः ठंड में बीपी बढ़े तो तुरंत चिकित्सकों के साथ संपर्क करें, क्योंकि अगर बीपी नियंत्रित नहीं हुआ तो अधरंग का अटैक हो सकता है। अस्पताल में प्रतिदिन अधरंग के मामले भी देखने को मिल रहे हैं। चिकित्सक बीपी के मरीजों को बीपी नियंत्रित रखने की सलाह दे रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए अच्छा मौसम ः जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि पहले उनकी ओपीडी में 120 मरीज आ रहे थे। अब करीब 200 मरीज पहुंच रहे है। हालांकि यह मौसम स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, मगर ठंड बढ़ने सांस, बीपी, हृदय और बीपी के मरीजों को परेशानी होती है। इन मरीजों को सुबह और शाम के समय घर से बाहर नहीं आना चाहिए। कोई तकलीफ हो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
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कुरुक्षेत्र। ठंड बढ़ने और शीतलहर चलने से लोगों की सेहत भी बिगड़ने लगी है। इससे अस्पतालों की ओपीडी में इजाफा हो रहा है। ठंड बढ़ने से सांस, हृदय और बीपी के रोगियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ठंड व शीतलहर से एलएनजेपी अस्पताल की ओपीडी भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में पहले जहां ओपीडी 700 के आसपास होती थी, अब एक हजार के पार चली गई है। शीतलहर से अस्पताल में सिर दर्द, बुखार और खांसी-जुकाम और गले व बदन में दर्द के मरीजों की ओपीडी बढ़ी है। इसके अलावा हृदय और बीपी के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। लकवा (अधरंग) के मामले भी सामने आने लगे हैं।
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जिला अस्पताल में हृदय रोग से संबंधित प्रतिदिन 15-20 मरीज आते थे, मगर अब 40-45 मरीज आने लगे हैं। बीपी और अस्थमा के मरीज भी पहले की अपेक्षा बढ़ गए हैं। वहीं, आने वाले दिनों में मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है, जिससे अस्थमा व हृदय रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। हालांकि अस्पताल में अभी भी सांस के मरीज पहुंच रहे हैं।
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ठंड में बीपी बढ़ना खतरनाक ः ठंड में बीपी बढ़े तो तुरंत चिकित्सकों के साथ संपर्क करें, क्योंकि अगर बीपी नियंत्रित नहीं हुआ तो अधरंग का अटैक हो सकता है। अस्पताल में प्रतिदिन अधरंग के मामले भी देखने को मिल रहे हैं। चिकित्सक बीपी के मरीजों को बीपी नियंत्रित रखने की सलाह दे रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए अच्छा मौसम ः जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि पहले उनकी ओपीडी में 120 मरीज आ रहे थे। अब करीब 200 मरीज पहुंच रहे है। हालांकि यह मौसम स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, मगर ठंड बढ़ने सांस, बीपी, हृदय और बीपी के मरीजों को परेशानी होती है। इन मरीजों को सुबह और शाम के समय घर से बाहर नहीं आना चाहिए। कोई तकलीफ हो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।